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'धर्म के सुसंस्कार ही समाज को विकृतियों से बचाते हैं और विकृतियों पर अंकुश रखकर समाज में पवित्रता स्थापित करते हैं। वर्तमान भारत को विकृतियों से मुक्ति के लिये आध्यात्मिक मूल्यों की रचनात्मक शक्ति से परिपूर्ण संस्कारों से सुसंस्कारित करने की आवश्यकता है'। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी ने गत 31 दिसंबर को कोटा (राजस्थान) में स्वामी विवेकानन्द सार्द्धशती समारोह समिति, कोटा महानगर के तत्वावधान में आयोजित 'प्रबुद्धजन समागम' को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
श्री सोनी ने कहा कि समाज धर्म से आत्म अनुशासित होता है, उसे हमेशा सदाचरण के लिये शिक्षित किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि बहुत पुरानी बात नहीं जब देश में पाप का पैसा घर में नहीं लाया जाता था, गलत पैसा नहीं आना चाहिये यह भावना नागरिकों में थी। मगर अब गलत पैसा यह कह कर ले लिया जाता है कि 'पापी पेट का सवाल है।' सोच का बदलाव ही भ्रष्टता का कारण है। यह सरकारें बदलने और अल्पकालिक आंदोलनों से नहीं जायेगा, बल्कि समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव करने से जायेगा।
श्री सोनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के जीवित रहने से ही विश्व जीवित रहेगा ओर उसी से विश्व में धर्म, मानवता, सद्गुण, संस्कार, प्रेम, अपनत्व जैसी आपसी भाईचारे की मानवीय संस्कृति बची रह सकेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ही विश्वबंधुत्व का भाव है। यदि यह नहीं रहेगी तो मानवता और भाईचारा भी नहीं रहेगा और सम्पूर्ण समाज पाश्चात्य प्रभाव में पशुवत् दानवी व्यवहारों से विकृत हो जायेगा।
वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर प्रहार करते हुये श्री सोनी ने कहा कि मैकाले ने जो शिक्षा प्रणाली भारत को धर्मविहीन करने के लिये चलाई थी, वह आज तक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तब ही पूर्ण है जब उसमें राष्ट्रगौरव और मानवता की पूरी-पूरी संवेदनायें हों।
श्री सोनी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के विचार भारतमाता की गौरवगाथा से परिपूर्ण हैं, ऐसे विचारों की आवश्यकता आज की परिस्थितियों में अधिक महसूस होती है। उन्हांेने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के विचार विश्वव्यापी स्पन्दन युक्त थे। वे राष्ट्रीय आन्दोलन तथा स्वतंत्रता संग्राम के आध्यात्मिक पितामह थे। उनकी प्रेरणा राष्ट्रगौरव से भरी हुई है और उनके विचार 'टोनिक' की तरह प्रभाव युक्त हैं। समय-समय पर उनके विचारों से भारत और भारत के बाहर के महापुरुषों ने प्रेरणा ग्रहण की है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शिक्षाविद् श्री आर.के. शर्मा ने की तथा अतिथियों का परिचय समिति के विभाग सहसंयोजक श्री बाबूलाल रेनवाल ने कराया। धन्यवाद ज्ञापन एवं आभार समिति के महानगर संयोजक श्री महेश शर्मा ने किया। अतिथियों का स्वागत समिति के विभाग संयोजक श्री त्रिलोक चन्द्र डूंगरवाल एवं प्रबुद्ध भारत संयोजक डा. गिरीश शर्मा ने किया। प्रस्ताव वाचन समिति के चित्तौड़ प्रान्त सह संयोजक श्री जटाशंकर शर्मा ने किया। अरविंद सिसोदिया











