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'इतिहास लेखन में वंशावलियों की भूमिका' पर विचार गोष्ठी
वर्तमान को परम्परा से जोड़ती है वंशावली
–इन्द्रेश कुमार, सदस्य, अ.भा. कार्यकारी मंडल, रा.स्व.संघ
शिमला (हि.प्र.) स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में गत दिनों 'इतिहास लेखन में वंशावलियों की भूमिका' विषय पर दीनदयाल उपाध्याय पीठ के तत्वावधान में दो दिवसीय विचार गोष्ठी सम्पन्न हुई।
संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए रा.स्व.संघ के अ.भा. कार्यकारी मंडल के सदस्य तथा हिमालय परिवार के संरक्षक श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय इतिहास को भारतीय दृष्टि से लिखने के हिमायती थे। उनका मानना था कि भारत के इतिहास लेखन में यदि भारतीय स्रोतों को छोड़ दिया गया तो वह इतिहास विश्वसनीय नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि वंशावली हमारे वर्तमान को परम्परा से जोड़ती है।
गोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध समाज विज्ञानी श्री राम प्रसाद माहेश्वरी ने कहा कि भारत में हजारों साल से वंशावली लिखने का इतिहास रहा है। इन वंशावलियों में भारतीय समाज का इतिहास ही नहीं छिपा हुआ, बल्कि ये आज की पीढ़ी को उनके पूर्वजों से भी जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि वंशावलियां, साधारण जन का इतिहास हैं जबकि अभी भारत का जो इतिहास लिखा जा रहा है उनके स्रोत राजाओं-महाराजाओं की जीवनियों पर ही आधारित हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. मोहन लाल छीपा ने कहा कि अनेक स्थानों पर पुरानी वंशावलियों की भाषा पढ़ सकने वाले लोग भी समाप्त हो रहे हैं। आज कम्प्यूटर का युग है। वंशावलियों की सामग्री को इंटरनेट पर डालना चाहिये ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हो सके।प्रतिनिधि
'खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) बनाम स्वावलंबन' पर स्वाध्याय मंडल का कार्यक्रम
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अर्थ है देश की स्वतंत्रता को खो दना
–मदनदास, संरक्षक, दीनदयाल शोध संस्थान
'जिस देश में विदेशी निवेश कुल निवेश का 4 से 5 प्रतिशत है वहां पूरी सरकार प्रधानमंत्री का ब्रह्मास्त्र प्रयोग करके विदेशी निवेश को संपूर्ण विकास का पर्याय बता रही है। यह सरासर गलत प्रचार है। दूसरी ओर खुदरा व्यापार क्षेत्र जिससे 20 से 25 लाख करोड़ की आय और 7 प्रतिशत रोजगार उत्पन्न होता है पूरी तरह से सरकार की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। भारतीय अर्थव्यवस्था सदैव से ही स्वावलंबी रही है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश स्वावलंबन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है'। उक्त विचार नयी दिल्ली स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में गत दिनों सम्पन्न हुए स्वाध्याय मंडल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री श्री मुरलीधर राव ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का विषय 'खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) बनाम स्वावलंबन' था।
श्री मुरलीधर राव ने आगे कहा कि यह बहुत विचित्र है कि एफ.डी.आई. पर प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संदेश देना पड़ा। यह नीति सुधार का मुद्दा है लेकिन इसे संपूर्ण विकास से जोड़ने में पूरी सरकार लगी हुई है। संसद में बहस द्वारा ही यह मुद्दा जनता के सामने आएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की इस सोच के पीछे अमरीकी दबाव है। लेकिन तथ्यों को देखा जाए तो खुदरा व्यापार में एफ.डी.आई. ने अमरीका में भी असमानता लायी है। वहां वॉलमार्ट से 1960 में इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई। आज बड़े किराना स्टोर वहां के 80 प्रतिशत बाजार पर कब्जा किए हुए हैं। यूरोप और लेटिन अमरीका का भी यही हाल है। वहां क्रमश: 60 और 40 प्रतिशत बाजार बड़ी किराना कम्पनियों के कब्जे में हैं।
इस मौके पर 'द पायनियर' के संपादक एवं राज्यसभा सांसद श्री चंदन मित्रा ने कहा कि भाजपा संसद में एफ.डी.आई. का डंटकर विरोध करेगी। उन्होंने जानकारी दी कि भाजपा सरकारें अपने-अपने राज्यों में एफ.डी.आई. लागू नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस की मिली-जुली सरकार ने भी खुदरा व्यापार में एफ.डी.आई. न लाने का फैसला किया है। दिल्ली में हाल ही में एफ.डी.आई. के समर्थन में हुई रैली में केरल का एक भी नेता शामिल नहीं हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्रजीत सिंह ने कहा कि आवश्यकता प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की न होकर स्वयं की पहल एवं पुरुषार्थ के आधार पर स्वदेशी संसाधनों एवं तकनीकों के विकास की है। दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक एवं रा.स्व.संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री मदनदास ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अर्थ देश की स्वतंत्रता को खो देना है। अत: दल एवं मत से ऊपर उठकर सभी को इसका एकजुट होकर विरोध करना चाहिए। इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष श्री प्रभाकर राव मुण्डले, श्री शंकर प्रसाद ताम्रकार एवं प्रधान सचिव डा. भरत पाठक सहित बड़ी संख्या में गण्यमान्य नागरिक उपस्थित थे।दप्रतिनिधि
लुधियाना में कृषि विज्ञान केन्द्रों का राष्ट्रीय सम्मेलन
कृषि विज्ञान केन्द्रों का सातवां तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन गत दिनों लुधियाना (पंजाब) में सम्पन्न हुआ। इसमें देशभर के सभी 589 कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुख लोगों ने भाग लिया।
सम्मेलन का उद्घाटन केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री शरद पवार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के डी.डी.जी. डा. के.डी. कोकाटे एवं आई.सी.ए.आर. के डी.जी. डा. एस. अयप्पन, द्वारा किया गया। इसमें दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित एवं स्व. नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां (सतना), कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां (चित्रकूट) तथा गोण्डा (उ.प्र.) एवं बीड़ (महाराष्ट्र) में स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुख भी उपस्थित रहे। यहां इन्होंने अपने कृषि विज्ञान केन्द्रों की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण किया।
तीन दिन तक चले सम्मेलन में जैव-विविधता, प्रदूषण, किसानों के समूह, विपणन, उद्योग लगाने के तौर-तरीकों के साथ-साथ कृषि की उपज की ठीक संभाल करने संबंधी विषयों पर चिन्तन किया गया। 589 कृषि विज्ञान केन्द्रों में से 8 कृषि विज्ञान केन्द्रों को प्रस्तुतिकरण हेतु चयनित किया गया। इसमें कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां (सतना) की निकरा परियोजना के अन्तर्गत सूखा एवं पाला पड़ने के समय उच्चतम तकनीक के प्रदर्शन को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्र गोण्डा को जिमीकंद और केला की उत्कृष्ट प्रजाति के उन्नयन हेतु विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में दीनदयाल शोध संस्थान के चारों कृषि विज्ञान केन्द्रों ने स्व. नानाजी देशमुख की युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना के अनुरूप अपने केन्द्रों को एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां ने अपने प्रस्तुतिकरण में दर्शाया कि मौसम की परिवर्तनशीलता को किसानों को भी समझना चाहिये।
सम्मेलन में दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने पंजाब के कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए वहां की मिट्टी की गुणवत्ता और खेती के आधुनिक तरीकों का बारीकी से अध्ययन किया तथा वहां की कारगर तकनीक को चित्रकूट क्षेत्र में प्रतिपादित करने की बात कही। सम्मेलन में दीनदयाल शोध संस्थान, गोण्डा (उ.प्र.) ने किसानों द्वारा अपनाई जा रही नवीन तकनीक एवं प्रयोगों की प्रदर्शनी लगाई। साथ ही उद्यमिता विद्यापीठ, चित्रकूट ने आंवला से संबंधित उत्पादों का प्रदर्शन किया। दप्रतिनिधि











