पूज्य सुदर्शन कोटि नमन्! दिंनाक: 29 Sep 2012 12:56:45 डा. श्रीकान्त दिव्य ध्येय के दिव्य पथिक हे! पूज्य सुदर्शन तुम्हें नमन्। राष्ट्रदेव के हे साधक! लो, जन-मानस का अभिवादन।। पूज्य सुदर्शन कोटि नमन् ।। थे संकल्पित बचपन से ही, नित शाखा व्रत अपनाया। घोर विरोधों की धरती पर, पग-पग बढ़ना ही भाया।। दृढ़ विश्वास भरा था मन में, पावनता से अन्तर-मन।।1।। पूज्य सुदर्शन कोटि नमन्।। तुम चिन्तक थे शोधक कल्पक, सृजक संगठक भाव अमर। केशव-माधव की ज्योति लिए, मधुकर का चैतन्य प्रखर।। भाव-भावना रज्जू भैया, परम्परा का नव-मन्थन।।2।। पूज्य सुदर्शन कोटि नमन्।। पर्यावरण-प्रकृति के ऊपर, अद्भुत- अभिनव किया मनन। हिन्दुत्व-स्वदेशी इन विषयों पर, किया सिंह जैसा गर्जन।। ऊर्जा के वैकल्पिक साधन, विकसित करने का चिन्तन।।3।। पूज्य सुदर्शन कोटि नमन्।। आज तुम्हारे भौतिक तन का, पुन: नहीं दर्शन होगा। किन्तु करोड़ों उर-अन्तर में, अमर चित्र पावन होगा।। श्रद्धाञ्जलि प्रेरणा पुरुष! अब कोटि नमन्, कोटि-कोटि नमन्।।44।। पूज्य सुदर्शन कोटि नमन्।।