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राजधानी दिल्ली में पानी के लिए हाहाकार मचा है। आजकल लोग एक-दूसरे से यही पूछते मिलते हैं- 'तुम्हारे यहां पानी आ रहा है क्या?' जवाब अक्सर यही मिलता है- 'अरे कहां, परसों आया था, आधा घंटा, पर पतली धार सा।' पूछने वाले के चेहरे पर तसल्ली का भाव तिरता है, मानो सोच रहा हो- चलो इसके यहां भी वही हाल है। घायल की गति घायल जाने।
सच में, राजधानी में इन दिनों दो ही मुद्दे हावी हैं- एक, राष्ट्रपति कौन-प्रणव या संगमा? और दूसरा-पानी की किल्लत। अखबारों में पहले पन्ने पर रोजाना- 'दिल्ली में पानी का हाहाकार, सो रही शीला सरकार', 'हरियाणा का देखो खेल, पानी की मची रेलमपेल' जैसे शीर्षक छाए हैं तो टेलीविजन चैनलों पर पानी के दीगर विशेषज्ञ बहस-मुबाहिसे में उलझे हैं कि पानी कितना है, कितना चाहिए, कितना बर्बाद हो रहा है, कितना संभल रहा है…। 45 डिग्री पारे पर तपते सूरज की तपिश झेलते दिल्ली वाले सच में, इन दिनों पानी की बेहद किल्लत झेल रहे हैं। सड़कों पर बाल्टियां और प्लास्टिक के कैन थामे लोग गली-गली सरकारी टैंकर तलाशते घूमते दिखते हैं तो वहीं सरकार की लापरवाही और कुप्रबंधन से गुस्साए लोग शहर के मुख्य चौराहों पर खाली गगरी लिए 'हाय-हाय' के नारे लगाकर चक्का जाम करते भी दिखते हैं। दिल्ली की कांग्रेसी सरकार महज कैमरों के आगे बयान देकर गेंद पड़ोसी हरियाणा के पाले में डाल देती है तो शाम तक हरियाणा के अफसर गेंद वापस दिल्ली सचिवालय के आंगन में उछाल देते हैं। दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, इधर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित हैं तो उधर मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा हैं। दोनों ही आम आदमी की पानी की किल्लत का जैसे मजाक उड़ाते एक-दूसरे पर आरोप मढ़ने में नम्बर बढ़ाने की फिराक में दिखते हैं। जनता की प्यास को अनदेखा कर दोनों ही पानी पर राजनीति करने में मशगूल हैं।
खाली हैं संयंत्र
पिछले दसेक दिन में दिल्ली के उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों की सैकड़ों रिहायशी कालोनियों में पानी की बेहद कभी महसूस की जा रही है। पर सांसदों, मंत्रियों और सफेदपोश नेताओं के घरों वाले 'लुटयन जोन' यानी नई दिल्ली के 'क्रीमी' इलाके में चौबीसों घंटे की पानी आपूर्ति में बेहद दबाव के बीच ही कटौती की गई है। दिल्ली को पानी की आपूर्ति कराने वाले दिल्ली जल बोर्ड, जिसकी अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित हैं, का साफ कहना है कि हरियाणा से जितना पानी आना चाहिए वह नहीं आ रहा है, लिहाजा जल संशोधन संयंत्रों से निथरे पानी की मात्रा कम हुई है। दिल्ली जल बोर्ड की मानें तो राजधानी में पानी की कुल मांग करीब 1100 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) है, जबकि सामान्य दिनों में संयंत्रों के लिए मिलने वाले पानी की मात्रा 835 एमजीडी, इन दिनों हरियाणा की हेकड़ी के चलते 790 एमजीडी रह गई है। इससे दिल्ली के तीन बड़े जल संयंत्रों-हैदरपुर, वजीराबाद और चंद्रावल- की जल शोधन मात्रा में भारी कमी आई है। हैदरपुर जहां 225 एमजीडी पेयजल बनाता था वहीं अब 207 बना रहा है, वजीराबाद 125 की जगह 80 और चंद्रावल 102 की जगह महज 57 एमजीडी पेयजल बना रहा है। इस कमी का सीधा असर उन दिल्ली वालों पर पड़ रहा है जो दिन में डेढ़ेक घंटे को मिलने वाले पानी से बाल्टियां और ड्रम भर कर रखते थे जो पीने, नहाने, रसोई के काम आता था। अब बाल्टियां ही नहीं भरतीं ड्रम तो बाद की बात है। हालत यह है कि, हुड्डा की सलाह के मुताबिक, दो की बजाय एक बार भी नहाना नसीब नहीं हो पा रहा है। और दिल्ली की मुख्यमंत्री सलाह देती हैं कि आधी बाल्टी पानी से ही नहाओ। नहाना तो दूर की बात, पहले पानी पीने को तो मिले।
आरोप–प्रत्यारोप
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अखबारों को रोज बताती हैं कि जल बोर्ड के अफसर हरियाणा के अफसरों को चिट्ठी लिख रहे हैं, फोन कर रहे हैं और जल्दी ही रास्ता निकलेगा। लेकिन रास्ता निकले तो कैसे, क्योंकि मुख्यमंत्री हुड्डा हर बार यही कहते हैं, 'हरियाणा दिल्ली को उसकी जरूरत (1100 एमजीडी) से ज्यादा ही पानी दे रहा है। दिल्ली की सरकार पानी की ठीक व्यवस्था करे, उसे बर्बाद होने से रोके।' बकौल शीला, हुड्डा तो अब उनका फोन भी नहीं उठाते। तकरार बढ़ती गई तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने दखल देकर तलवारें खींचे दोनों कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को दिल्ली में सुलह-सफाई करने की हिदायत दी। 18 जून को दोनों मिले भी, पर परिणाम ढाक के तीन पात ही रहा। किल्लत बनी रही, क्योंकि हुड्डा की एक ही टेक थी- दिल्ली को खूब पानी दे रहे हैं।
दोनों राज्यों में पानी पर टकराव की एक वजह वह मुनक नहर भी है जो हरियाणा सरकार ने दिल्ली सरकार से करीब 400 करोड़ रु. की सहायता राशि लेकर बनवाई थी। शर्त यह थी कि दिल्ली को इस नहर से 80 एमजीडी पानी रोजाना दिया जाएगा। लेकिन दिल्ली सरकार कहती है, हरियाणा सरकार शर्त से मुकर गई है। उधर हुड्डा सरकार ने दिल्ली सरकार पर पलट आरोप जड़ते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने बदले की भावना के चलते दिल्ली के शामनाथ पार्क इलाके में रह रहे हरियाणा सिंचाई विभाग के कर्मचारियों के 60 परिवारों को पानी की आपूर्ति काट दी है। दिल्ली के अफसर कहते हैं- कटौती पूरे इलाके के 25 लाख लोग झेल रहे हैं, सिर्फ वे 60 परिवार ही नहीं।
घटता जलस्तर
दिल्ली सरकार के तमाम 'एक्शन प्लान' धरे रह गए हैं। वजीराबाद बैराज में जलस्तर सामान्य से दो फुट नीचे आ गया है, जो पानी 675.5 फुट पर होना चाहिए, अब 672 के आस-पास है। पश्चिमी यमुना नहर का जलस्तर भी 710 से एक फुट नीचे आ गया है। पानी की भरपूर नहीं तो जरूरत लायक आपूर्ति देने में असफल रहने वालीं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित यह उपदेश तो देती हैं कि 'खपत कम करो, मैं आधी बाल्टी पानी से नहाती हूं, मेरे घर के पानी में भी कटौती करो', वगैरह वगैरह। लेकिन वे जगह-जगह रिसती पाइपलाइनों को ठीक न करने पर संबंधित अफसरों से जवाब-तलब क्यों नहीं करतीं? सरकारी टोंटियां टूटी क्यों रहती हैं, क्यों उनकी सही देखभाल नहीं की जाती? पानी की बर्बादी का एक उदाहरण दक्षिणी पटेल नगर का है जहां 12 साल से फटी पाइप लाइनों से पानी अनवरत बर्बाद हो रहा है।
यह सही है कि आज भी ऐसे लोग हैं जो पानी का मोल नहीं समझते और उसे जी खोलकर बेकार बहाते हैं। धरती भेदकर, 125 फुट से पानी खींचकर उससे अपनी कारें धुलवाते हैं, दिन में छत्तीसियों बार काम वाली से आंगन धुलवाते हैं, टंकी भर जाने पर भी पंप बंद नहीं करते। ऐसे लोगों को भी सबके भले के लिए अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। दिल्ली और हरियाणा में तो कांग्रेस की सरकारें हैं, जो कांग्रेसी अहमन्यता की संस्कृति में ही जीती हैं। वे आपस में छींटाकशी कर रही हैं, करती रहेंगी। बाबू भी जानते हैं कि जनता से असल सरोकार दोनों में से किसी को नहीं है। हां, सचिवालयों की टोटियां पानी देती रहनी चाहिए, भले सड़क पर खड़े टैंकर से पानी भरने वालों में धींगामुश्ती होती रहे।
दिल्ली के तीन संयंत्रों की स्थिति
संयंत्र साधारण उत्पादन इन दिनों उत्पादन
(मिलियन गैलन प्रतिदिन) (मिलियन गैलन प्रतिदिन)
हैदरपुर जल 225 207
संशोधन संयंत्र
वजीराबाद जल 125 80
संशोधन संयंत्र
चंद्रावल जल 102 57
संशोधन संयंत्र
एक मिलियन = 10 लाख
लाइन फटी है, खूब नहाओ
पानी की किल्लत और दिल्ली सरकार की लापरवाही उजागर करने के लिए दिल्ली के भाजपा नेताओं ने बड़ा अनूठा तरीका ईजाद किया। 18 जून को भाजपा नेता विजय गोयल और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्याम जाजू सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बाल्टियां लेकर दक्षिणी पटेल नगर में टूटी पाइपलाइन से रिसते पानी से नहाने पहुंच गए। बेशकीमती पानी किस कदर बर्बाद हो रहा है उसके खिलाफ भाजपा के इस प्रदर्शन को देखकर आने-जाने वाले ठिठककर खड़े हो गए। गोयल ने बताया, 'यहां 18 और 30 इंच व्यास की पाइपलाइनें पिछले 12 सालों से फटी पड़ी हैं। रोज एक लाख गैलन पानी बर्बाद हो रहा है। पानी की ठीक व्यवस्था न होने के चलते दिल्ली के लाखों नागरिक पानी को तरस रहे हैं। वे इस लापरवाही से सरकारी खजाने को लगने वाली चपत भी भुगतने को मजबूर हैं। कई चिट्ठियां लिखीं पर टूटे पाइप जोड़े नहीं गए।











