पाकिस्तानी हिन्दुओं की चिंता करे भारत
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पाठकीय
लापता बच्चों पर खामोश क्यों संसद?
पाञ्चजन्य (13 मई, 2012) ने रपट प्रकाशित कर एक गंभीर समस्या की ओर सबका ध्यान आकृष्ट किया है। एक समाचार के अनुसार पिछले तीन वर्षों में पंजाब से लगभग 550 और पूरे देश से लगभग 56000 बच्चे गायब हैं। पंजाब के केवल तीन बच्चे ही पुलिस प्रशासन ढूंढ पाया, शेष बच्चे कहां गए कोई नहीं जानता। जान लेना तो दूर की बात उनको कोई याद भी नहीं करता, उनका नाम कोई नहीं लेता, केवल उनके अभागे माता-पिता ही थानों और दफ्तरों के चक्कर लगाते, रोते और तड़पते हैं। क्या किसी को चिंता है कि ये बच्चे किसी वेश्यालय में बेचे गये हैं, किसी भिखारी समूह ने इनको अपाहिज बनाकर हमेशा के लिए भीख का कटोरा इनके हाथ में पकड़ा दिया है अथवा मनुष्य के अंगों का धंधा करने वालों ने इन्हें काट कर इनके शरीर के कुछ अंगों को बेचकर नोट कमा लिए हैं या फिर दुनिया के बाजार में कहीं ये नौकर और यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं।
भारत की संसद के साठ वर्ष पूरे हो गए, जश्न भी मना लिया गया। विधानसभाओं में काम भी होता है, वहां कीचड़ भी उछाला जाता है और कभी-कभी कुर्सियां, लाउडस्पीकर भी उठाकर एक-दूसरे पर फेंके जाते हैं, लेकिन कहीं भी इन बच्चों के विषय में कोई नहीं बोलता। घपलों, घोटालों में घिरी राजनीति और संसद में भी केवल घोटालों के नाम पर शोर मचाने वाले सांसदों और देश के सभी विधायकों से मेरा प्रश्न है कि क्या ये बच्चे अपने देश के नहीं? भारत के नागरिक नहीं? इनकी रक्षा करना क्या सरकारों का कर्तव्य नहीं? बहुत देर हो गई अब तो बोलो, नर्क में बसे बच्चों को बचाओ।
–लक्ष्मीकांता चावला
अमृतसर, पंजाब
सम्पादकीय 'हिन्दुओं के उत्पीड़न पर चुप क्यों है सरकार?' पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं की दर्दनाक दास्तान की एक और कड़ी है। जब भारत सरकार अपने ही देश में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं है तो वह पाकिस्तानी या बंगलादेशी हिन्दुओं की सुरक्षा की परवाह क्यों करेगी? शर्म की बात है कि देश की यह मुस्लिम-परस्त सरकार जिन्ना की मुस्लिम-लीग की राह पर चल रही है जिसने देश का विभाजन कराया था।
–आर.सी.गुप्ता
द्वितीय ए-201, नेहरू नगर, गाजियाबाद-201001 (उ.प्र.)
सम्पादकीय झकझोरने वाला है। पाकिस्तान में हिन्दू उत्पीड़न चरम पर पहुंच चुका है। पाकिस्तानी हिन्दुओं की पीड़ा को पाञ्चजन्य बराबर अपने पाठकों तक पहुंचाता है। न जाने सेकुलर मीडिया इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाता है?
–नित्यानन्द
335/8, पुराना शिल्ली रोड, सोलन (हि.प्र.)
पाकिस्तान की नींव ही घृणा पर आधारित है। 'हंस कर लिया है पाकिस्तान, लड़के लेंगे हिन्दुस्थान'- यह भावना आज भी पाकिस्तान के उन्मादियों के मन में है। यही उन्मादी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को प्रताड़ित करते हैं। हिन्दू बहन-बेटियों को जबरन उठा लिया जाता है, इस्लाम कबूलवाया जाता है और निकाह करा दिया जाता है। यह सब पाकिस्तान को हिन्दू-विहीन करने का षड्यंत्र है। इस षड्यंत्र में वहां की सरकार और न्यायपालिका भी शामिल है। यदि ऐसा नहीं होता तो रिंकल कुमारी को न्याय मिलता।
–प्रदीप सिंह राठौर
एम.आई.जी-37 बी, पनकी, कानपुर (उ.प्र.)
पाकिस्तान हिन्दुओं के लिए नरक साबित हो रहा है। ऐसा लगता है कि वहां हिन्दुओं को जीने और रहने का कोई अधिकार ही नहीं है। हिन्दुओं की पीड़ा न तो पाकिस्तान की सरकार सुनती है और न ही वहां की अदालत। पाकिस्तानी हिन्दुओं की रक्षा के लिए भारत सरकार को सक्रिय होना चाहिए। पाकिस्तान को भारत सरकार साफ-साफ कहे कि यदि तुम अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं करोगे तो तुमसे सारे संबंध तोड़ लेंगे।
–दिनेश गुप्त
पिलखुवा, गाजियाबाद (उ.प्र.)
पाकिस्तान और बंगलादेश में हिन्दू आबादी तेजी से घट रही है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो पाकिस्तान में एक हिन्दू को चपरासी की भी नौकरी नहीं दी जाती है। जबकि भारत में तथाकथित सभी सेकुलर राजनीतिक दल किसी मुसलमान को राष्ट्रपति तक बनाना चाहते हैं, बने भी हैं। आज भारत में बड़ी संख्या में सर्वोच्च पदों पर मुसलमान बैठे हैं, फिर भी कहा जाता है कि मुसलमानों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। दूसरी ओर बेचारे पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए कोई यह भी नहीं कहता कि उनके साथ बहुत अन्याय हो रहा है।
–अमोल अग्रवाल
महावीर गंज, नया बाजार, हल्द्वानी, (उत्तराखण्ड)
पाकिस्तानी हिन्दुओं के साथ भारत सरकार को हमदर्दी दिखानी चाहिए। पाकिस्तानी हिन्दुओं को भारत से मदद नहीं मिलेगी तो कहां से मिलेगी? यदि भारत सरकार हिन्दू के नाते उनकी मदद नहीं करना चाहती है, तो मानवता के नाते करे।
–सूर्यप्रताप सिंह सोनगरा
कांडरवासा, रतलाम-457222 (म.प्र.)
राष्ट्रपति ऐसा होना चाहिए
कमलेश सिंह की रपट 'कौन बने राष्ट्रपति' इस बात की साक्षी है कि आजकल राष्ट्रपति कौन हो पर विचार-विनिमय चल रहा है। मैं इस विषय पर एक और दृष्टि से विचार करने की बात कर रहा हूं। राष्ट्रपति एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जिसका किसी राजनीतिक दल से संबंध न हो और न कभी रहा हो। वह स्वच्छ छवि का, निर्भय तथा प्रशासन-प्रेमी होना चाहिए। अच्छा हो वह स्वयं कानून का विशेषज्ञ हो।
–शान्ति स्वरूप गुप्ता
जे-60, जनकपुरी, अलीगढ़-202001 (उ.प्र.)
साधुवाद!
आजकल पाञ्चजन्य के अंकों में डा. हर्षवर्धन विभिन्न प्रकार की बीमारियों पर अपने विचार रख रहे हैं। इसके अलावा वे इन बीमारियों का सरल-सा इलाज भी बता रहे हैं। डा. हर्षवर्धन एक योग्य चिकित्सक हैं। देश में पोलियो को दूर करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वे विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार भी हैं। आपने बीमारियों का इलाज पाठकों तक पहुंचाने में सही व्यक्ति का चयन किया है। आप साधुवाद के पात्र हैं।
–वीरेन्द्र सिंह जरयाल
28-ए, शिवपुरी विस्तार, कृष्णा नगर, दिल्ली-110051
पाञ्चजन्य का शंखनाद
पाञ्चजन्य,
अपने नाम को सार्थक
कर रहा है,
पत्रकारिता में उसका यह शंखनाद,
आपदाओं का शमन करेगा
संपादकीय के क्या कहने हैं,
निर्भीक लेखन पर बधाई
ढेरों शुभकामनाएं।
–श्रीराम मीना
परमार्थ गंगा संस्था, गुरुधाम, बाबई रोड
नक्सलवाद का खात्मा करो
आज तेजी से नक्सलवादी घटनाएं बढ़ रही हैं। इस समय नक्सलवाद देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसे समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को मिलकर कदम उठाने होंगे। इस समय देश के 200 जिलों में नक्सली सक्रिय हैं और 34 जिलों में समानान्तर सरकार चला रहे हैं। बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़ीसा आदि राज्यों में सबसे अधिक नक्सली सक्रिय हैं। ये लोग सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ आम लोगों को भी मार रहे हैं। पिछले दिनों उड़ीसा में एक विधायक और एक जिलाधिकारी का अपहरण कर लिया गया। यदि नक्सलवाद को खत्म नहीं किया गया तो इस तरह की घटनाएं होती ही रहेंगी।
–कृष्ण वोहरा
641 , जेल परिसर, सिरसा (हरियाणा )
हमारी मूकदर्शिता
भारत की यह नियति रही है कि हर बार यहां सज्जन शक्ति का वाहक अभिमन्यु ही दुष्ट शक्ति के चक्रव्यूह में फंसा है। विडम्बना यह है कि हम आज भी उस दुष्चक्र को समझ नहीं पा रहे हैं। इस संबंध में श्री देवेन्द्र स्वरूप की लेखमाला हमारा मार्गदर्शन करती है। सब प्रकार से सशक्त होने के उपरांत भी भारत सरकार का अपनी विरोधी शक्तियों- चीन, पाकिस्तान आदि के सामने झुकना खेद की बात है। हमारी मूकदर्शिता और प्रचार तंत्र की कमजोरी ने हमें हानि ही पहुंचाई है। पाकिस्तानी दुष्प्रचार हो या चीनी दुष्टता, इसीलिए बढ़ रही है कि हम उस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं। रूस में विशाल प्राचीन हिन्दू मंदिर को गिराने का प्रयास हमारी अस्मिता पर प्रहार है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए।
–गोकुल चंद गोयल
85, इन्द्रा नगर, सवाई माधोपुर (राजस्थान)
मालाखेड़ी, होशंगाबाद-461001 (म.प्र.)
आरक्षण रद्द
न्यायालय ने कर दिया है आरक्षण रद्द
पिटी केन्द्र सरकार की, इससे भारी भद्द।
इससे भारी भद्द, अल्पसंख्यक–बहुसंख्यक
दो भागों में देश बांटते बन कर भक्षक।
कह 'प्रशांत' भारत को एक बनाना होगा
हम हैं भारतवासी, नाद गुंजाना होगा।।
–प्रशांत
पञ्चांग
वि.सं.2069 तिथि वार ई. सन् 2012
आषाढ़ कृष्ण 6 रवि 10 जून, 2012
” ” 7 सोम 11 ” “
” ” 8 मंगल 12 ” “
” ” 9 बुध 13 ” “
” ” 10 गुरु 14 ” “
” ” 11 शुक्र 15 ” “
” ” 12 शनि 16 ” “











