तारानगर में हिंसा का तांडव
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राज्यों से
प.बंगाल /प्रतिनिधि
पर शासन–प्रशासन ने हिन्दुओं की सुध तक नहीं ली
पश्चिम बंगाल के हालात सुश्री ममता बनर्जी के नियंत्रण में नहीं हैं। माओवादियों और मुस्लिमों के प्रचण्ड समर्थन से वामपंथियों को सत्ता से उखाड़कर मुख्यमंत्री बनीं सुश्री ममता बनर्जी के लिए यही दोनों वर्ग सिरदर्द का कारण बन गए हैं। एक तरफ माओवादी हथियार नहीं डाल रहे हैं तो दूसरी तरफ कट्टर मुस्लिम भी उग्र हो रहे हैं। तारानगर में गत 14 मई को लगभग 2000 उग्र भीड़ ने हिंसा का जो तांडव रचा उससे स्पष्ट हो रहा है कि उन्हें किसी का भय नहीं है और प्रशासन भी उनके विरुद्ध असहाय है। दक्षिण 24 परगना जिले के जॉयनगर थानान्तर्गत तारानगर गांव में गत 14 मई की सुबह 11 बजे से लेकर देर रात तक इन उपद्रवियों ने हिन्दुओं को बंधक बनाकर रखा, घरों में लूटपाट की, महिलाओं की अस्मत लूटी और 46 घरों को आग के हवाले कर दिया। आतंकित शेष सभी हिन्दू परिवार अपना घर-बार छोड़कर भाग गए और अब तक वापस नहीं लौटे हैं। पर इतनी भीषण और बर्बर घटना के बावजूद मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमण्डलीय सदस्य या सांसद, विधायक तो दूर पंचायत अध्यक्ष, पंचायत प्रतिनिधि या निचले स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों तक ने गांव जाकर पीड़ितों के हालात जानने तक की कोशिश नहीं की, राहत और सहायता पहुंचाना तो बहुत दूर की बात है।
यह सारा घटनाक्रम शौकत खान नामक एक व्यक्ति की उसी दिन सुबह हुई राजनीतिक हत्या की प्रतिक्रियास्वरूप घटा। माना जा रहा है कि 10 साल पहले हुई भाकपा नेता बिमल हलधर की हत्या का बदला लेने के लिए शौकत खान की हत्या की गई। पर इस हत्या से उपजे आक्रोश का निशाना बने तारानगर के निर्दोष और निरपराध हिन्दू। उग्र गुण्डों ने लूट, आगजनी और हिंसा के दौरान पुलिस के सामने ही दो महिलाओं का अपहरण कर लिया। बाद में ये महिलाएं शौकत खान के घर की छत से बरामद की गईं। चेन से इनके हाथ-पैर बंधे थे, मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था, पर सामूहिक बलात्कार का शिकार इन महिलाओं को पुलिस अस्पताल तक नहीं ले गई। अब ये महिलाएं कहां हैं, किसी को पता नहीं।
तारानगर गांव की स्थिति इतनी भयावह है कि अधिकांश लोग घर छोड़कर भाग गए हैं, कहां हैं पता नहीं, गांव वापस लौटेंगे या नहीं, यह भी पता नहीं। जो कुछेक लोग बचे हैं वे सामूहिक रूप से खाना बनाते हैं और खुले में सोने को मजबूर हैं। इन लोगों के लिए चावल या थोड़ा-बहुत राशन पास के हिन्दू समाज ने ही पहुंचाया। पर 15 दिन बीत जाने के बाद तक शासन-प्रशासन ने उनकी सुध तक नहीं ली, क्योंकि- वे हिन्दू जो हैं!!
उत्तर प्रदेश /शशि सिंह
सरकारी संरक्षण में मतान्तरण का खेल
पूर्वी उत्तर प्रदेश के पिछड़े माने जाने वाले जिले सुल्तानपुर में ईसाई मिशनरियों का मतान्तरण का खेल तेजी से जारी है, वह भी सरकारी संरक्षण में। पिछले एक दशक से चल रहे इस खेल में समय-समय पर जिला प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत की बात भी सामने आई है। कभी इस खेल का खुला विरोध नहीं हुआ, इसलिए मामला चर्चा में नहीं आया। इस बार राष्ट्रवादियों ने विरोध किया तो हंगामा हो गया और प्रशासन मतान्तरण करने वालों के साथ खड़ा दिखा। दो वकीलों समेत 20 हिन्दुओं पर अनेक धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया। दो लोगों को तो गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया है।
इस बार मतान्तरण का कुचक्र रचा गया जिले के खुटेहना जैसे अति पिछड़े इलाके में। कई साल पहले चर्च के कुचक्रों में फंसकर यहां के वंचित वर्ग के राम प्रकाश ईसाई मत अपनाकर राम प्रकाश मसीही बन गए। उन्होंने अपने भाई राजकुमार को भी ईसाई बना लिया। इन पर चर्च का प्रभाव बढ़ता गया और इन दोनों भाइयों ने आस-पास के भोले-भाले ग्रामीणों को भी बरगलाना शुरू कर दिया। प्रार्थना सभा के बहाने ईसा मसीह की शिक्षा का प्रसार करने लगे। लोगों को यीशु वंदना के नाम पर चर्च से जोड़ना शुरू कर दिया। बीते दिनों मतान्तरण का ऐसा ही कुचक्र रचा तो विरोध हुआ। हुआ यह कि खुटेहना गांव में ही मतान्तरण का एक बड़ा आयोजन किया गया। राम प्रकाश और राजकुमार ने 'प्रकाश हीलिंग सोसाइटी' के बैनर तले हो रहे आयोजन में आस-पास के सैकड़ों भोले-भाले ग्रामीणों को प्रार्थना सभा के नाम पर बुलाया। लोगों को नहीं मालूम था कि यह चर्च प्रेरित षड्यंत्र है, लेकिन प्रशासन को मालूम था। तभी तो स्थानीय थाने के दो सिपाही और एलआईयू (स्थानीय अभिसूचना इकाई) का एक कर्मी भी वहां मौजूद था।
मतान्तरण के प्रयास की यह खबर भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, हिन्दू जागरण मंच, हिन्दू युवा वाहिनी आदि संगठनों को लगी तो इनके प्रतिनिधि वहां पहुंच गए। चर्च समर्थकों से केवल यह जानने की कोशिश की गई कि क्या हो रहा है, यह सुनते ही राम प्रकाश और राजकुमार के समर्थक आग बबूला हो गए। उन सभी ने हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया। लाठी-डंडे व सरिया लेकर वे इसके लिए पहले से तैयार थे। इस हमले में कई लोग घायल हो गए। जख्मी रामजीवन पांडेय, सुभद्रा, विजय, शांति, पूर्णिमा, गंगाराम, मीरा, लक्ष्मी आदि को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। चर्च समर्थकों के इस उत्पात की सूचना जब पुलिस अधीक्षक अलंकृता सिंह को लगी तो वह भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने हिन्दुओं को ही दोषी मानते हुए दो वकीलों समेत 20 हिन्दुओं पर मारपीट और दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया। गांव के रिंकू और पिंटू को पहले पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया, फिर उन पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया, जबकि चर्च समर्थकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
विश्व हिन्दू परिषद के विभाग संगठन मंत्री मुकेश का आरोप है कि प्रशासन पूरी तरह चर्च के साथ खड़ा दिखा। पुलिस ने विश्व हिन्दू परिषद के प्रांतीय कार्याध्यक्ष शुभ नारायण सिंह, जिलाध्यक्ष नागेंद्र सिंह और संतोष सिंह जैसे वरिष्ठ लोगों को मुकदमे में नामजद आरोपी बनाया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह, पूर्व महामंत्री रामभुवन मिश्र, हिन्दू युवा वाहिनी के विजय पांडेय, विहिप जिलाध्यक्ष नागेंद्र सिंह आदि ने आरोप लगाया है कि जिले में चर्च द्वारा हिन्दुओं के मतान्तरण का कुचक्र जारी है। विडम्बना यह कि मतान्तरण के इस कुचक्र तथा प्रशासन के इस उत्पीड़न पर जब विरोध शुरू हुआ तो उसका संज्ञान नहीं लिया गया। चर्च समर्थकों की सुरक्षा के लिए गांव में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई है। हिन्दू संगठनों के लोग बड़ी संख्या में वहां न पहुंच सकें, इसके लिए आस-पास निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इन सबके विरोध में वकीलों ने एक दिन कामकाज रोककर अदालत का बहिष्कार किया। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के साथ ही सभी मुकदमे वापस किए जाएं। यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि ईसाई बनने के बाद जाति बंधन खत्म हो जाता है, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने राम प्रकाश और राजकुमार सहित उनके सभी साथियों को अनुसूचित जाति का मानते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया, इसका बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।
राष्ट्रवादियों ने विरोध किया तो मारपीट और हिंसा
दो वकीलों समेत 20 हिंदुओं पर मुकदमा, दो को जेल
जलाधिकार ने बताया
पानी के लिए तरसाएगी सरकार
भारत के आम नागरिक के लिए नि:शुल्क एवं शुध्द पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अभियान चला रही संस्था 'जलाधिकार' के तत्वाधान में नोएडा में गत दिनों नागरिक सम्मेलन आयोजित किया गया। जलाधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोपाल अग्रवाल ने इस पूरे अभियान की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए बताया कि मनुष्य मात्र का जीवन जल पर पूरी तरह अवलंबित है। पर देश की सरकार पानी के संरक्षण, वितरण एवं प्रबंधन की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। नागरिकों को प्रचुर मात्रा में शुध्द पेयजल प्राप्त हो, इसके लिए एक समग्र जलनीति की अत्यंत आवश्यकता है। दुर्भाग्य से औद्योगिक एवं व्यावसायिक घरानों के हित साधने हेतु केन्द्र सरकार एक जनविरोधी नीति के द्वारा देश में उपलब्ध जल संसाधनों का निजीकरण करने की चेष्टा कर रही है। इस नीति के लागू हो जाने से आम नागरिक का देश के जल संसाधनों पर से अधिकार पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और सभी जल के स्रोत व्यापारिक घरानों के हाथ में सिमटकर रह जाएंगे। सरकार और निजी कंपनियां यह भ्रामक प्रचार कर रही हैं कि देश में पेयजल की भारी कमी है। सच तो यह है कि देश में प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल स्रोतों का प्रबंधन यदि वैज्ञानिक ढंग से किया जाए तो सन् 2050 तक देश में पानी की कोई कमी नहीं होगी। परंतु सरकार पेयजल की उपलब्धता का रोना रोकर निजी कंपनियों के हाथ में जल स्रोतों को बेच देना चाहती है ताकि निजी कंपनियां मनमाने तरीके से पानी का धंधा कर सकें। ऐसा होने से आम जनता को पानी पर भारी शुल्क चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। दक्षिण अफ्रीका में आम नागरिकों ने वहां की सरकार द्वारा जल स्रोतों का निजीकरण पूरी तरह नकार दिया। इटली में भी जनादेश द्वारा आम नागरिकों ने जल वितरण के क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दिया। पर भारत, जिस देश में 65 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा से नीचे रहते हैं तथा जो लोग दो जून की रोटी को भी तरसते हैं, उन पर पानी के मूल्य का बोझ डालना न केवल अनैतिक है बल्कि अमानवीय भी है।
'जलाधिकार' के महामंत्री श्री कैलाश गोदुका ने जल के निजीकरण का विरोध करते हुए जल के स्रोतों का संवर्द्धन करने के कई प्राचीन तरीकों का सुझाव दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन चिन्मय मिशन के उत्तर भारत क्षेत्र प्रमुख स्वामी श्री निखिलानंद द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे प्रमुख समाजसेवी तथा व्यवसायी श्री मोतीलाल गुप्ता। कार्यक्रम में भारत भवन के पूर्व अध्यक्ष श्री दयाप्रकाश सिन्हा द्वारा लिखित एक नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया। कार्यक्रम से पूर्व स्कूली विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।प्रतिनिधि











