पर्यावरण संरक्षण में नई राह दिखाता गुजरात
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एक नये आयाम के रूप में राज्य के विकास एवं सामान्य पर्यावरण की आधारभूत संरचना के संवर्धन हेतु गुजरात का एक अप्रतिम स्थान समझा जाता है। उद्योग संघ के नेतृत्व में वर्तमान पर्यावरण आधारित संरचना के सुदृढ़ीकरण और संवर्धन इस क्षेत्र में विशिष्ट लक्षण थे। अनेक रणनीतिक और जानकारी प्रद समझौता ज्ञापन किए गए जिससे क्लीनर उत्पादन के सिद्धांत और नई प्रौद्योगिकियों व इनवेंटरी का संवर्धन पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए स्पष्ट किए गए।
क्लीनर उत्पादन (सीपी) में पहल
राज्य सरकार ने पिछले दस वर्षों से क्लीनर उत्पादन की संकल्पना को आगे बढ़ाया है। जितने स्रोत पर प्रदूषण में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग में कमी और लाभप्रदता में वृद्धि के संदर्भ में लाभान्वित किया है और देश में यह एकमात्र राज्य है जिसने उद्योग के लिए सीपी पुरस्कार की घोषणा की और राज्य की औद्योगिक नीति में सीपी और सीटी को एकीकृत भी किया है।
हरित भवन की ओर चलना
गुजरात सरकार नए सरकारी भवनों में हरित भवन की संकल्पना का संवर्धन करती रही है, जिसका निर्माण हरित भवन की संकल्पना के अनुसार किया जाएगा, जिसमें विशिष्टता निहित होगी जैसे कि सौर प्रकाश व्यवस्था, वर्षा जल एकत्र करना इत्यादि। यह सब नीति संबंधी दिशा निर्देश उपलब्ध कराने वाली एक समिति के द्वारा किया जाता है।
गांधीनगर प्लास्टिक रहित नगर
यह एक ज्ञात तथ्य है कि प्लास्टिक थैलियां नदियों, धाराओं, झीलों तथा समुद्र में डाल दी जाती हैं। ये जल मार्गों, सीवरों, ड्रैनेज लाइनों को अवरुद्ध कर देती हैं, जिससे अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। प्लास्टिक थैलियों से सड़क के किनारे व्यर्थ कचरा इकट्ठा हो जाता है। यह वृक्षों और मिट्टी इत्यादि को खराब कर देती हैं और प्लास्टिक थैलियों को रंगने के लिए प्रयुक्त रासायनिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं। इसके अतिरिक्त प्लास्टिक थैलियों के खाने से गाय आदि पशुओं की मृत्यु हो सकती है, जब वे खाने के पदार्थों के साथ इन थैलियों को भी खा जाते हैं। गांधीनगर, गुजरात राज्य की राजधानी है और यह भारत में एक अत्यधिक सुंदर और हरित नगरों में एक है। गांधीनगर शहर के इस स्तर को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने गांधीनगर शहर को अगस्त 2011 से प्लास्टिक कैरी बैग रहित नगर के रूप में घोषित किया है।
मैंग्रोव वृक्षारोपण
गुजरात सरकार ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार को मामलों की अनुशंसा करते समय कुछ वर्ष पूर्व उद्योगों से पूछा था कि वे तट पर आएं और मैंग्रोव वृक्षारोपण का कार्य ग्रहण करें। यह मैंग्रोव वृक्षारोपण एक पीपीपी पद्धति पर, स्थानीय समुदाय और सीबीओज को शामिल करके किया गया था। आज तक 4400 हेक्टेयर भूमि पर मैंग्रोव वृक्षारोपण इस ढंग से पूरा कर लिया गया है।
पर्यावरणीय आधारित संरचना
त्वरित आर्थिक समृद्धि दर सहित गुजरात राज्य निरंतर एक प्रगतिशील औद्योगिक राज्य है। इसके बावजूद राज्य में रासायनिक उद्योगों के साथ एक औद्योगिक राज्य होने के कारण पर्यावरणीय महत्व को छोड़ा नहीं गया है और पर्यावरणीय क्षेत्र में भी स्थायी प्रगति हो रही है। वह निम्नलिखित तथ्यों एवं आंकड़ों से दर्शाया जा सकता है-
बायोमेडिकल अवशेष
22100 स्वास्थ्य रक्षा इकाइयों से प्रतिदिन अवशेष का 20 एमटी 13 कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो उसे खत्म कर देती हैं। 5 और कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधाएं राज्य में 10 करोड़ निवेश के साथ आ रही हैं।
सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र
राज्यभर में 43 सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र परिचालन में हैं तथा 27 और लगाए जा रहे हैं। राज्य में ऐसे आक्सीडेशन पाइंट 28 हैं, जो परिचालन में हैं।
कॉमन ऐफ्लूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी)
वर्तमान में, राज्य में 28 सीईटीपी प्लांट्स हैं, जो प्रतिदिन 495 मिलियन लीटर का परिशोधन कर रहे हैं।
खतरनाक वेस्ट सुविधाएं
गुजरात के पास देश में कॉमन खतरनाक वेस्ट टीएसडीएफ (ट्रीटमेंट स्टैबिलाइजेशन डिस्पोजल सुविधा) की अधिकतम संख्या है और वर्तमान में राज्य में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सृजित खतरनाक वेस्ट का सुरक्षित निपटान करने के लिए आठ ऐसी स्थल सुविधाएं हैं। गुजरात में पांच कॉमन खतरनाक वेस्ट भष्मीकरण सुविधाएं हैं।
ई गवर्नेंस
आधुनिक टूल उपकरण ई गवर्नेंस द्वारा पर्यावरण का गवर्नेंस एवं प्रबंधन गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक लक्ष्य था जिसे इसने एन आइसी की मदद से ऑन लाइन सॉफ्टवेयर एक्स जी एन (एक्सटेंडेड ग्रीन नोड) विकसित करके सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। बोर्ड ने इस सॉफ्टवेयर के लिए दो राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त किये थे जो इस प्रकार हैं-
l दिनांक 18 फरवरी, 2010 को प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत विभाग भारत को राष्ट्रीय ई गवर्नेंस अवार्ड (रजत पुरस्कार) (जीपीसीबी देश में प्रथम बोर्ड है जिसे ऐसा पुरस्कार मिला।)
l भारत की कम्प्यूटर समिति हैदराबाद द्वारा सीएस निहिलेंट ई गवर्नेंस अवार्ड, जो पर्यावरण के क्षेत्र में गुणवत्ता सेवाओं के लिए, और पर्यावरण प्रबंधन में ई गवर्नेंस के क्षेत्र में मूल्यवान योगदान के लिए एक विशेष मान्यता अवार्ड है।
जीपीसीबी प्रथम आइएसओ 9001 एवं आइएसओ 14001 प्रमाणित संगठन जीपीसीबी एक उत्कृष्ट गुणवत्ता का संस्थान बन गया है।
जहां पर मूल कार्य तकनीकी व्यवसायियों द्वारा किए जाते हैं, यह अपेक्षा की गई थी कि जीपीसीबी प्रबंधन के आधुनिक उपकरणों के साथ कदम से कदम मिलाएगा। आईएसओ 9001 और आईएसओ 14001 प्रमाणपत्र शेयर धारकों के लिए बेहतर प्रबंधन और सेवाओं के लिए उपकरण के रूप में चुने गए थे। बोर्ड ने आइएसओ 9001 और आईएसओ 14001 प्रमाणन अपने प्रधान कार्यालय और कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए प्राप्त किये थे। जीपीसीबी शायद देश में पहला ऐसा बोर्ड है, जिसे ऐसा प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इसका एक ऑनलाइन पंजीकरण और शिकायत प्रणाली है। जहां पर ग्राहक उद्योगों में 20000 से अधिक और बायोमेडिकल वेस्ट उनकी निकासियों की प्रक्रिया करती है और ऑनलाइन मुद्दों को हल करवाती है।
वापी औद्योगिक क्लस्टर एमओईएफ ऋण स्थगन से बाहर
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने प्रदूषण क्षमता संभावना के आधार पर देश के 43 औद्योगिक क्लस्टरों में नवीन उद्योग विस्तार हेतु एक ऋण स्थगन किया था। उनमें से वापी जीआईडीसी एक थी। समय रूपरेखा की अल्पावधि कार्रवाइयों और उपायों की श्रृंखला सहित एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी। कार्ययोजना के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु नये उपकरण जैसे कि तृतीय पक्ष अनुप्रवर्तन जीआईडीसी द्वारा निजी कार्यकर्त्ताओं के कॉमन एफ्लूरेंट ट्रीटमेंट प्लांट का परिचालन ग्रहण करना, अनुशासन नीति का निर्माण जिसे एकल एवं अन्य उद्योगों द्वारा अनुपालन किया जाएगा, उसे इस भावना से लागू किया गया था कि उन प्रदूषित औद्योगिक सेक्टर की सूची से वापी औद्योगिक संपदा को सूची से निकाल दिया जाए। सभी शेयर धारकों द्वारा किए गए प्रयासों को ध्यान में रखने के बाद पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ यह निर्णय किया कि इसे इसकी प्रथम सूची से अलग किया जाए।
बस रेपिड ट्रांजिट प्रणाली (बीआरटीएस) बीआरटीएस सार्वजनिक परिवहन (यातायात) के 40 प्रतिशत को शिफ्ट करने के लक्ष्य से शुरू की गई है। उसके द्वारा निजी वाहन घटाना और ईंधन उपभोग को कम करना तथा उसके प्रदूषण स्तर को घटाना आदि उद्देश्य सामने रखे गए हैं। बीआरटीएस नगर में सफलतापूर्वक चल रही है, क्योंकि इसकी व्यवस्था के लिए और अंगीकरण तथ्य के लिए अच्छी पहल की गई है। बीआरटीएस की कुल परिचालन लंबाई 26 किमी.है, जिसमें 21 बसों की एक फ्लीट है जो 240 किमी.प्रति बस कवर करती है और एक लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं।प्रतिनिधि











