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हिसार में कांग्रेस प्रत्याशी की हार क्या हुई, प्रदेश कांग्रेस में घमासान मचा है, विशेषकर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के विरोधियों ने मोर्चा खोल दिया है। भितरघात का आरोप लगाते हुए कई नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तक की गई है। हिसार लोकसभा उपचुनाव में भाजपा हजकां गठबंधन प्रत्याशी कुलदीप बिश्नोई की 6323 मतों से जीत ने जहां यह संदेश दिया है कि अब आने वाला समय भाजपा हजकां गठबंधन का है, वहीं दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हुड्डा के लिए खतरे के संकेत हैं। कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो जाना कांग्रेस के लिए बेहद शर्मनाक माना जा रहा है। इस चुनाव का यह भी संदेश है कि जाट मतदाता फिर से इनेलो की तरफ झुक रहे हैं।
गठबंधन प्रत्याशी ने जहां शहरी क्षेत्रों में भारी मत प्राप्त किए, वहीं लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले 6 विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकतर स्थानों पर कुलदीप बिश्नोई ने बढ़त बनाकर अपना दबदबा बरकरार रखा। जबकि इनेलो सुप्रीमो के बेटे अजय चौटाला ने दूसरे स्थान पर अपनी बढ़त बनाई, इससे साफ हो गया है कि जनता अब प्रदेश में कांग्रेस सरकार को नकार चुकी है। यह चुनाव जहां गठबंधन के लिए एक नई सौगात लेकर आया है, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश को जिस तरह करारी शिकस्त मिली है इससे प्रदेश सरकार की गिरती साख और कहीं न कहीं हुड्डा सरकार के प्रति जनता में आक्रोश प्रकट होता है। चुनाव से प्रदेश में एक नए राजनीतिक समीकरण का सूत्रपात भी हो गया है।
प्रदेश में लगभग सभी राजनीतिक दलों में जाट नेताओं का प्रतिनिधित्व रहा है। गठबंधन जहां अपने कद्दावर जाट नेताओं के बलबूते जाट राजनीति को पुष्ट करता है, वहीं कुलदीप बिश्नोई एक गैर जाट नेता के रूप में चुनाव जीत कर उभरे हैं। जिससे प्रदेश में करीब एक दशक से शून्य हुई गैर जाट राजनीति का स्थान भी भर गया है, और जनता को चौधरी भजन लाल के निधन के बाद उनके बेटे के रूप में विकल्प मिल गया है। यहां यह बताना आवश्यक है कि गठबंधन की जीत में भारतीय जनता पार्टी की विशेष भूमिका रही, जिसमें भाजपा ने पूरी ईमानदारी से एकजुट होकर चुनाव की नैया को विजय अभियान तक पहुंचाया। प्रदेश के मुख्य मंत्री भूपंेद्र सिंह हुड्डा पूरे चुनाव के दौरान करीब 15 दिन तक जनता से लुभावने वादे करते रहे, लेकिन जनभावना कांग्रेस के इतना ज्यादा खिलाफ हो चुकी थी कि जनता ने इस ओर कोई रुचि नहीं ली और मौकापरस्ती के वायदों को नजरअंदाज कर दिया।
हिसार लोकसभा उपचुनाव की हार से बौखलाई कांग्रेस को अभी भी होश नहीं आया है, क्योंकि जहां कांग्रेस को अपनी कुनीतियों एवं क्षेत्रवाद व पक्षपात पूर्ण राजनीति के प्रति आत्ममंथन करना चाहिए और जनता की भावना को समझना चाहिए, वहीं इस हार का ठीकरा कांग्रेस नेता अब एक दूसरे के सिर पर फोड़कर अपनी अपनी साख बचाने में लगे हैं। कांग्रेस की हार के बाद हुई पार्टी की मंथन बैठक में तो हुड्डा विरोधी नेताओं चौ. वीरेन्द्र सिंह, केन्द्रीय मंत्री शैलजा व किरण चौधरी के सिर हार का ठीकरा फोड़ने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तक करने की आवाजें उठीं। बेशक आदमपुर क्षेत्र कुलदीप बिश्नोई का गढ़ माना जाता है, यहां पिछले कई दशकों से उनके दिवंगत पिता चौ. भजन लाल ने हमेशा ही अपने प्रतिद्वंदियों को धूल चटाई है, लेकिन कांग्रेस के राज्यसभा सांसद वीरेन्द्र सिंह के पैतृक गांव डूमरखां व कुमारी शैलजा के उकलाना क्षेत्र स्थित प्रभूवाला गांव व सांसद नवीन जिंदल के हिसार क्षेत्र व किरण चौधरी के गढ़ बवानीखेड़ा व कांग्रेस के विधायक संपत सिंह के क्षेत्र में भी जनता ने कांग्रेस को औंधे मुहं गिराया। पहली बार भाजपा ने इनेलो से पल्ला झाड़कर हजकां से गठबंधन किया, उसकी दबी जुबां से ही सही पूरे प्रदेश में प्रशंसा हो रही है। लेकिन यह चुनाव भाजपा के लिए भी एक सबक है कि पार्टी की एकजुटता के आधार पर प्रदेश की राजनीति में अच्छी संभावनाएं बन सकती हैं, जबकि अभी तक भाजपा की यही सबसे बड़ी कमजोरी रही है।
प्रदेश में मुख्यमत्री भूपंेद्र सिंह हुड्डा की कांग्रेस सरकार पहले ही पंगु हालात में है और अपने दूसरे कार्यकाल में हजकां के बागी विधायकों के बलबूते शासन चला रही है। जहां लोग केंन्द्र सरकार की नीतियों के कारण दुखी हैं और बढ़ती महंगाई, काला धन, भ्रष्टाचार का बढ़ता दायरा और उसमें भी सरकार के अनेक मंत्रियों व नेताओं पर आरोप लगना भी प्रदेश सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है। यह चुनाव जहां कांग्रेस के लिए एक सबक है वहीं हजकां को ठेंगा दिखाकर सत्ता के लोभ में दल बदल करने वाले हजकां विधायकों के लिए भी एक गहरा आघात है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केन्द्र सरकार ने जिस तरह अण्णा हजारे की मुहिम को नजरअंदाज किया, वह भी उसके लिए भारी पड़ गया। कुछ भी हो, अब जनता जाग चुकी है। कोई भी राजनीति पार्टी जो सत्ता में आने का सपना देखती है, उसे अपने वादों को पूरा करना होगा और जनता के हित में काम करना होगा।











