विविध
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विवादित निबंध का समर्थन करने वालों को विहिप की चेतावनी
इन्द्रप्रस्थ विश्व हिन्दू परिषद की गत दिनों सम्पन्न हुई प्रांत बैठक में कार्यकर्ताओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से प्रो. ए.के. रामानुजम के विवादित निबंध को हटाए जाने का विरोध कर रहे लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसे लोग हिन्दूविरोधी मानसिकता के शिकार हैं।
इन्द्रप्रस्थ विहिप के महामंत्री श्री सत्येन्द्र मोहन ने ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह लोग हिन्दू मान बिन्दुओं का उपहास करने से बाज नहीं आए तो विहिप-बजरंग दल के कार्यकर्ता सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
बैठक में पारित हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि हिन्दुओं के आदर्श व मान-बिन्दुओं का उपहास उड़ाना आज एक प्रचलन सा बनता जा रहा है। प्रस्ताव में जहां उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार विश्वविद्यालय के इतिहास (विशेष) द्वितीय वर्ष के छात्रों को प्रो. रामानुजम के निबंध “रामायण के 300 लेख” को न पढ़ाए जाने का स्वागत किया गया है, वहीं इस लेख का समर्थन करने वालों को नसीहत दी गई है कि वे अपनी हिन्दूद्रोही मानसिकता को त्यागकर विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त शिक्षा देने के बारे में सोचें। अन्यथा उन्हें रामायण के अपमान के लिए विश्वभर के हिन्दुओं के कोप को सहना पड़ेगा।
बैठक में प्रान्त उपाध्यक्ष श्री महावीर गुप्ता, संगठन मंत्री श्री करुणा प्रकाश, बजरंग दल प्रान्त संयोजक श्री शैलेन्द्र जायसवाल, मीडिया प्रमुख श्री विनोद बंसल सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे। द प्रतिनिधि
कटक में भारतीय किसान संघ का प्रांतीय कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न
कृषि योग्य जमीन का अधिग्रहण नहीं होना चाहिए
-दिनेश कुलकर्णी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, किसान संघ
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि किसी भी प्रकार की कृषि योग्य जमीन का अधिग्रहण किसी और कार्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय किसान संघ का स्पष्ट मानना है कि इससे किसानों की आजीविका के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा संकट में पड़ जाएगी। इसलिए इसके खिलाफ किसान संघ द्वारा पूरे देश में आंदोलन शुरू हो चुका है और आगामी दिनों में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह विचार गत दिनों कटक (उड़ीसा) में भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यकर्ता सममेलन में व्यक्त किए।
श्री कुलकर्णी ने आगे कहा कि अन्य कार्यों के लिए कृषि योग्य जमीन के अतिरिक्त भूमि का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास 18 प्रतिशत बंजर भूमि है। इस भूमि को विकसित कर इसका उपयोग उद्योग व अन्य कार्यों के लिए किया जा सकता है। श्री कुलकर्णी ने कहा कि अत्यावश्यक स्थिति में किसानों से जमीन लेते समय उन्हें पर्याप्त मात्रा में मुआवजा प्रदान करने के साथ-साथ उनकी आजीविका भी सुनिश्चित की जाए। श्री कुलकर्णी ने कहा कि किसानों के कई मुद्दों को लेकर किसान संघ पूरे देश में आंदोलन चला रहा है। किसानों को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य प्रदान करने, किसानों की उपज की खरीद व्यवस्था को सरकार द्वारा सुनिश्चित करने की मांग इसमें प्रमुख है।
तीन दिन तक चले इस सम्मेलन में राज्य में आई भीषण बाढ़ के कारण किसानों को हुए नुकसान तथा अन्य प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में 200 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के महिला विभाग से श्रीमती विमला तिवारी, किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रमोद मेहेर, प्रदेश संगठन महामंत्री श्री प्रदीप्त राय, प्रदेश महामंत्री श्री जानकी बल्लभ स्वाईं, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री निमाईं नायक व अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे। द समन्वय नंद
संस्कृत भारती की अखिल भारतीय बैठक
तकनीक को कार्य वृद्धि का आधार बनाने का संकल्प
राजस्थान के कोटा महानगर में गत दिनों सम्पन्न हुई संस्कृत भारती की अ.भा. बैठक में आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर संस्कृत के कार्य को कैसे बढ़ाया जा सकता है, पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं का मत बना कि तकनीक की मर्यादा को समझकर उसकी सहायता से कार्य को आगे बढ़ाया जाए।
बैठक में, जो कार्यकर्ता पहले से ही तकनीक का उपयोग कर रहे हैं उन्होंने अन्य कार्यकर्ताओं को तकनीक के उपयोग का प्रशिक्षण दिया। कार्यकर्ताओं को ईमेल, सोशल नेटवर्किंग साइट्स आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
यहां आगामी तीन वर्षों के लिए नए पदाधिकारियों की घोषणा भी हुई, इनमें अध्यक्ष प्रो. चान्दकिरण सलूजा, महामन्त्री डा. नन्द कुमार, मंत्री श्री श्रीश देवपुजारी, संगठन मंत्री श्री दिनेश कामत, प्रकाशन प्रमुख श्री चमू कृष्ण शास्त्री, प्रशिक्षण प्रमुख डा. विश्वास, सम्पर्क प्रमुख श्री वसुवज हैं।
बैठक में 6 नई पुस्तकों का लोकार्पण उज्जैन संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मिथिला प्रसाद त्रिपाठी द्वारा किया गया। बैठक में 20 प्रान्तों के 211 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। द प्रतिनिधि
ज्ञान-विज्ञान मेला
गत दिनों शिशु शिक्षा समिति, असम का तीन दिवसीय प्रांतीय ज्ञान-विज्ञान मेला तेजपुर के शंकरदेव शिशु विद्या निकेतन में सम्पन्न हुआ। इसमें 228 छात्रों तथा 55 शिक्षकों ने भाग लिया।
मेले का शुभारम्भ शिशु विद्या निकेतन की संचालन समिति के मंत्री डा. संजीव कुमार डेका द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर शिशु शिक्षा समिति के अनेक पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मेले के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए डा. देवेन बरुआ ने कहा कि यदि हम छोटी-छोटी घटनाओं अथवा विषयों का गंभीरता से अध्ययन करेंगे तो हम भी विज्ञानी बन सकते हैं। इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित शिशु शिक्षा समिति, असम के उपाध्यक्ष डा. दयानंद पाठक ने कहा कि हमारे चारों ओर विज्ञान का प्रभाव है। हमें विज्ञान की गंभीरता में प्रवेश करना चाहिए तभी हम एक वैज्ञानिक बन पाएंगे।
अंतिम दिन, मेले में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को असम के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री ईश्वर प्रसाद चौधरी ने पुरस्कृत किया। मेले का समापन वंदेमातरम के साथ हुआ। इस अवसर पर अनेक प्रकार के रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। द प्रतिनिधि
नेत्र जांच शिविर
अ.भा.ग्राहक पंचायत एवं चित्रकूट नेत्र चिकित्सालय के संयुक्त तत्वावधान में गत दिनों मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित वनवासी क्षेत्र चरगवां में नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 30 वनवासी ग्रामों के 500 से अधिक लोगों ने अपनी आंखों की जांच कराई तथा आयोजकों की ओर से जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क दवाई भी दी गई। आंखों की जांच डा. आशुतोष राय ने की।
शिविर के संबंध में जानकारी देते हुए अ.भा.ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय सह-सचिव श्री संतोष गोडबोले ने बताया कि संगठन द्वारा 30 से अधिक पहाड़ी ग्रामों में सम्पर्क कर ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया जिन्हें आंखों से संबंधित बीमारी थी। शिविर में अ.भा. ग्राहक पंचायत के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री दिनकर सबनीस, प्रांत अध्यक्ष श्री रमेश गुप्ता, प्रांत संगठन मंत्री श्री देवेन्द्र पांडे आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे। द प्रतिनिधि
लघु उद्योग भारती की कार्यकारिणी गठित
पिछले दिनों लघु उद्योग भारती की दो दिवसीय वार्षिक बैठक महाराष्ट्र के औरंगाबाद में सम्पन्न हुई। बैठक में 23 राज्यों के सूक्ष्म और लघु उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा इन उद्योगों के विकास के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, पर चर्चा की। साथ ही बैठक में लघु उद्योग भारती की नई कार्यकारिणी भी गठित की गई।
बैठक में नई कार्यकारिणी के लिए श्री वी.जे. वघसिया अध्यक्ष, श्री ओम प्रकाश मित्तल महामंत्री तथा श्री घनश्याम ओझा कोषाध्यक्ष चुने गए। नई कार्यकारिणी मेंअध्यक्ष सहित कुल 14 पदाधिकारी हैं। द प्रतिनिधि
विहिप के कार्यक्रम सम्पन्न
विश्व हिन्दू परिषद, पूर्व आंध्र प्रांत के तत्वावधान में गत दिनों विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न हुए। विहिप के ही प्रकल्प भारत संस्कृत परिषद का प्रांत समावेश कार्यक्रम विजयवाड़ा में आयोजित किया गया। इसमें प्रांतभर से आए संस्कृत के विद्वानों ने भाग लिया। समावेश में संस्कृत के अनेक विद्वानों को सम्मानित भी किया गया। इसमें भारत संस्कृत परिषद् के अ.भा. प्रमुख श्री राधा कृष्ण मनोड़ी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
वहीं परिषद् द्वारा संचालित एकल विद्यालय के शिक्षकों का 5 दिवसीय अभ्यास वर्ग भी विजयवाड़ा में ही सम्पन्न हुआ। इसमें विद्या विकास समिति के कोषाध्यक्ष श्री वी.वी.एस. नायडु, श्री हनुमंतराव, श्री कन्ना भास्कर आदि ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। 8-9 अक्तूबर को विशाखापटनम में प्रांत अधिवेशन सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय अधिवेशन में प्रांत के 28 जिलों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। द प्रतिनिधि
“साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक” पर संगोष्ठी
हिन्दू कभी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार नहीं कर सकता
-भैयाजी जोशी
सरकार्यवाह, रा.स्व.संघ
“हिन्दू कभी भी आतंकवादी नहीं हो सकता और न ही वह कभी अल्पसंख्यकों पर अन्याय-अत्याचार कर सकता”। उक्त उद्गार रा.स्व.संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेशराव जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी ने गत दिनों सिल्चर में सम्पन्न हुई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। अ.भा. अधिवक्ता परिषद् की ओर से आयोजित संगोष्ठी का विषय “साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक” था। इसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ता तथा शहर के प्रबुद्ध गण्यमान्य नागरिक उपस्थित थे।
श्री भैयाजी जोशी ने आगे कहा कि “साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक” कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् ने तैयार किया है, जिसमें हिन्दू विरोधी“शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह पक्षपातपूर्ण और खतरनाक विधेयक इस मान्यता के आधार पर बनाया गया है कि हमेशा हिन्दू ही आक्रमण करता है और किसी मुस्लिम और ईसाई को ही पीड़ा उठानी पड़ती है। हिन्दू समाज ही साम्प्रदायिक हिंसा के लिए जिम्मेदार होता है इसलिए उसे ही कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कानून मुख्यत: बहुसंख्यक हिन्दू समाज पर ही लागू होगा और लाखों हिन्दुओं को जेल में डाल दिया जाएगा। भैयाजी ने कहा कि इस विधेयक को वोट बैंक की घिनौनी राजनीति के चलते एक सोची-समझी रणनीति के तहत तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक को कानून का रूप धारण करने से पूरी ताकत के साथ रोका जाना चाहिए।
अ.भा. अधिवक्ता परिषद् के श्री जयदीप रथ ने कहा कि “साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक” को तैयार करने वाले पूरी तरह हिन्दू विरोधी हैं। अगर यह कानून बन गया तो हिन्दू समाज का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा और हिन्दुओं को अल्पसंख्यकों के दबाव में रहना पड़ेगा।
संगोष्ठी में मुख्य रूप से उपस्थित प्रसिद्ध कवि श्री अतीन दास ने कहा कि विधयेक के द्वारा हिन्दू समाज को जानबूझकर दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है। यह भारतीय संविधान की मूल भावनाओं के विपरीत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता श्री अनिल चंद्र ने की। इस अवसर पर श्री भैयाजी जोशी ने अधिवक्ता श्री शांतनु नायक द्वारा लिखित पुस्तक “लॉ ऑफ डेन्जर एंड कम्पेनसेशन” का लाकार्पण भी किया। द बासुदेब पाल
समाज की भागीदारी से हो विकास
-राममाधव
सदस्य, अ.भा. कार्यकारी मंडल, रा.स्व.संघ
“संघ और उससे जुड़े संगठन जनता के अधिकार की ऐसी लड़ाई लड़ रहे हैं जो ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करेगा। आजादी के बाद देश में इस तरह की नीति लागू की गई जिससे सारी सामाजिक व्यवस्था का सरकारीकरण हो गया। लोग हर चीज के लिए सरकार पर आश्रित हो गए। भारत के नवनिर्माण के लिए इस व्यवस्था में परिवर्तन लाना जरूरी है। इसमें समय लगेगा, परन्तु हिम्मत से काम करने पर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।” उक्त विचार रा.स्व. संघ के अ.भा. कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री राममाधव ने गत दिनों दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। वर्ग संस्थान के दिल्ली स्थित कार्यालय में सम्पन्न हुआ।
संस्थान के दिल्ली प्रकल्प से जुड़े कार्यकर्ताओं के एक दिवसीय अभ्यास वर्ग में उन्होंने कहा कि आजादी के बाद महात्मा गांधी, राममनोहर लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय तीन ऐसे विचारक हुए जिन्होंने कुछ अलग तरह की सोच प्रकट की। ये तीनों पुरानी व्यवस्था में परिवर्तन के पक्षधर थे। उनका मानना था कि समय के साथ यह बदलाव इसलिए होना चाहिए क्योंकि जरूरी नहीं है कि जो आज बेहतर है वह कल के लिए लाभदायक हो। इन तीनों की चिंता का कारण था स्वतंत्रता के बाद समाज व्यवस्था की जिम्मेदारी को सरकार द्वारा हड़पने का प्रयास करना। वे समझ गए थे कि ये उपाय सरकार खुद को समाज से ज्यादा शक्तिमान बनाने के लिए कर रही है। भारत हमेशा से विकेन्द्रीकरण व्यवस्था से चलता रहा है। यहां कोई भी किसी एक पर केन्द्रित नहीं रहा। आज हालात ऐसे हो गए हैं कि खेती, शिक्षा सहित समाज द्वारा की जाने वाली सारी व्यवस्था सरकार ने अपने हाथों में ले ली है। नतीजा,भूमि कानून किसान को देखकर नहीं बनाया जाता बल्कि उद्योगपतियों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इसी तरह से शिक्षा का हाल है। ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता। जहां समाज की भगीदारी से विकास होना चाहिए वहां सारा कुछ सरकार द्वारा तय करने से सारे क्षेत्र विकास से दूर होते जा रहे हैं। दीनदयाल जी ने तब अन्त्योदय का ऐसा मंत्र दिया था जिससे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास से जोड़ा जा सके। आज संघ परिवार उसी सोच के अनुरूप काम कर रहा है। अब हमें संघर्ष के लिए खड़े होने की जरूरत है। स्व. नानाजी देशमुख जैसे लोग इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने राजनीति में अच्छा अवसर पाने के बावजूद सत्ता का त्यागकर समाज निर्माण के रास्ते पर चलने का जो संकल्प लिया उसे पूरा करके दिखाया।
इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित राज्यसभा सांसद श्री बाल आप्टे ने कहा कि स्व. नानाजी का सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में निर्माण विचारधारा के कारण हुआ। विकास की प्रेरणा उन्हें विचारधारा से मिली। विचारधारा व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन से जोड़ने वाले पक्के धागे की तरह है। कार्यकर्ताओं को अभाविप के पूर्व अध्यक्ष श्री राजकुमारभाटिया तथा राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डा. महेशचंद्र शर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव श्री अभय महाजन ने रखी। द प्रतिनिधि











