| दिंनाक: 04 Jan 2007 00:00:00 |
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सरकारी विभागों में मुस्लिमों की भर्ती करो-फिरदौस खानउत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए केन्द्र की संप्रग सरकार मुसलमानों को लुभाने के लिए सच्चर समिति का भरपूर इस्तेमाल कर रही है। इस कड़ी में अब केन्द्र सरकार ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश जारी कर कहा है कि वे नौकरियों में मुसलमानों की भर्ती के लिए किए गए प्रयासों की छमाही रपट कार्मिक मंत्रालय को सौंपें।अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ए.आर.अंतुले ने 19 मार्च को राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि सभी मंत्रालयों को आगामी अप्रैल माह से यह रपट पेश करनी होगी। उल्लेखनीय है कि गत 8 जनवरी को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए 15 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत सभी मंत्रालयों को कार्यालय आदेश जारी कर पुलिस कर्मिकों, केंद्रीय पुलिस बलों, रेलवे, राष्ट्रीयकृत बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की भर्ती में अल्पसंख्यकों (यानी मुस्लिमों!) पर विशेष ध्यान देने और इस प्रयोजन के लिए चयन समितियों में प्रतिनिधिनात्मक व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिये थे। इस आदेश के मुख्य बिन्दु इस प्रकार हैं-चयन समितियों की संरचना प्रतिनिधिनात्मक होनी चाहिए। 10 या इससे अधिक रिक्तियों की भर्ती के लिए चयन बोर्डों/समितियों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का एक सदस्य और अल्पसंख्यक समुदाय का एक सदस्य होना अनिवार्य है।जहां रिक्तियों की संख्या 10 से कम है तो ऐसी समितियों/बोर्डों में अल्पसंख्यक समुदाय का एक अधिकारी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का एक अधिकारी शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए।सरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में सभी नियुक्तियों के लिए व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए।जिन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय का बाहुल्य है, उपयुक्त व्यवस्था करके उन क्षेत्रों में रिक्त परिपत्र को स्थानीय भाषा में वितरित किया जाए।ये निर्देश करीब दो साल पहले गठित अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के उन 15 सूत्रीय कार्यक्रमों का हिस्सा हैं, जिन्हें गत 23 फरवरी को संसद सत्र के पहले दिन नए रूप में पेश किया था।सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार ने राज्यों को यह भी सलाह दी है कि उन अद्र्ध सरकारी संस्थानों में भी मुसलमानों की भर्ती को प्राथमिकता दी जाए, जहां सरकार को नामांकन का अधिकार है। सरकार के इन निर्देशों के बाद राज्य सरकारें आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में उठाए गए कदमों की तर्ज पर आगे बढ़ सकती हैं। उल्लेखनीय है कि स्थानीय निकायों में मुसलमानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने एक विधेयक पारित कर सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की थी। भारतीय जनता पार्टी सहित अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया था। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के निवर्तमान नगर विकास मंत्री आजम खां का कहना है कि कांग्रेस सच्चर समिति का इस्तेमाल कर एक बार फिर मुसलमानों को धोखा देने की कोशिश कर रही है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह भी है कि मुसलमानों का हितैषी होने का दावा करने वाले राजनीतिक दलों द्वारा शासित राज्यों में मुसलमान ज्यादा पिछड़े हुए हैं। सच्चर समिति की रपट के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 25.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 18.5 प्रतिशत और बिहार में 16.5 प्रतिशत है। इन राज्यों की सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की भागीदारी क्रमश: 4.2, 5.1 और 7.6 प्रतिशत है। दिल्ली में मुस्लिम आबादी 11.7 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 10.6 प्रतिशत है। इन राज्यों में सरकारी नौकरियों में क्रमश: 3.2 और 4.4 प्रतिशत ही मुसलमान हैं। इस मामले में गुजरात और तमिलनाडु की स्थिति बेहतर है। गुजरात में 9.1 और तमिलनाडु में 5.6 प्रतिशत मुसलमान हैं, जबकि सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी 5.4 और 3.2 प्रतिशत है। देशभर में सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की भागीदारी मात्र 4.9 प्रतिशत है। आल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा का मानना है कि मुसलमानों की बदहाली दिखाकर केन्द्र सरकार सच्चर समिति के माध्यम से पूरे मुस्लिम समुदाय को आरक्षण का शगूफा दिखाना चाह रही है।12