अगर आपके घर में छोटा बच्चा है और अभी तक उसका आधार कार्ड नहीं बनवाया गया है, तो इस खबर को नजरअंदाज न करें। आमतौर पर लोग आधार को सिर्फ पहचान से जुड़े दस्तावेज के तौर पर देखते हैं, लेकिन बच्चों के मामले में इसकी उपयोगिता इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। किसी अनहोनी या मुश्किल परिस्थिति में बच्चे की पहचान और उसके परिवार तक पहुंचने में आधार रिकॉर्ड मददगार साबित हो सकता है। इसी अहमियत को समझाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने एक भावनात्मक वीडियो के जरिए माता-पिता को जागरूक किया है।
मेले में माता-पिता से बिछड़ गया बच्चा
UIDAI की वीडियो कहानी में सुरेश नाम का एक बच्चा अपने माता-पिता के साथ मेले में जाता है। मेले में अचानक भीड़ बढ़ जाती है और इसी दौरान सुरेश का हाथ अपने माता-पिता से छूट जाता है। कुछ ही देर में बच्चा अपने परिवार से अलग हो जाता है। पुलिस को सुरेश अकेला मिलता है। उससे घर का पता पूछने पर वह पूरी जानकारी नहीं दे पाता। परिवार से संपर्क न हो पाने के कारण उसे चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में रखा जाता है। काफी समय बीतने के बाद वहां बच्चों के आधार एनरोलमेंट की प्रक्रिया शुरू होती है और सुरेश का भी आधार बनाया जाता है। आधार रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के जरिए उसकी पहचान और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आती है। इसके बाद संस्था की वार्डन पुलिस को जानकारी देती हैं। पुलिस दिए गए पते के आधार पर उसके परिवार तक पहुंचती है और आखिरकार सुरेश अपने माता-पिता से दोबारा मिल जाता है। UIDAI के मुताबिक, बच्चों का आधार बनवाने के बाद उम्र बढ़ने पर जरूरी बायोमेट्रिक अपडेट भी कराया जाना चाहिए। 5 साल की उम्र और फिर 15 साल की उम्र में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट का प्रावधान है। इससे बच्चे के आधार रिकॉर्ड में उसकी पहचान से जुड़ी जानकारी को अपडेट रखने में मदद मिलती है।
बच्चों का सही समय पर आधार एनरोलमेंट और मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) कराएँ।
क्योंकि सही समय पर अपडेट की गई पहचान, मुश्किल घड़ी में अपनों तक पहुँचने का रास्ता बन सकती है।आज की सही पहचान… कल अपनों तक पहुँचने का भरोसा।#Aadhaar #MBU #MandatoryBiometricUpdate #UIDAI pic.twitter.com/wbBk5BJvp5
— Aadhaar (@UIDAI) August 25, 2026
बच्चों के लिए आधार कई जरूरी कामों में उपयोगी हो सकता है। स्कूल और शिक्षा से जुड़े कार्यों के अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं में भी इसकी आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, किसी विशेष सेवा में आधार अनिवार्य है या नहीं, यह संबंधित विभाग के नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए माता-पिता को बच्चे का आधार समय पर बनवाने के साथ-साथ जरूरी अपडेट की जानकारी भी रखते रहना चाहिए। UIDAI की यह कहानी साफ संदेश देती है कि बच्चे की पहचान से जुड़ी जानकारी सही और अपडेट रखना सिर्फ दस्तावेजी जरूरत नहीं, बल्कि मुश्किल समय में परिवार से दोबारा मिलाने में भी मददगार साबित हो सकता है।














