दिल्ली में राहुल गांधी ने अपने पार्टी के रचनात्मक संग़ठन की बैठक में राजनीतिक मर्यादा की सारी सीमा का उलंघन कर दिया है। उन्होंने ऐसा करके खुद से ही अपने नेता प्रतिपक्ष होने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए अभद्रता की सारी सीमाएं पार कर दिया है क्योंकि किसी भी देश की विदेश नीति पूरे देश की होती है न कि किसी ख़ास पार्टी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व के प्रधानमंत्रियों का विदेश नीति देश की विदेश नीति थी और भाजपा सहित अन्य विपक्षी दलों ने हमेशा दलगत भावना से ऊपर उठकर विदेश नीति का समर्थन किया था।
नरसिम्हाराव ने अटल को सौंपी थी जिम्मेदारी
1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमेटी में भारत का पक्ष रखने के लिए भारतीय दल के नेतृत्व की जिम्मेदारी विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को सौंपा था। उस प्रतिनिधिमंडल में राव सरकार में विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद, फारूक अब्दुल्ला जैसे लोगों नेता शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने भारत की निंदा करने वाले प्रस्ताव के लिए पाकिस्तान की कोशिश को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया था।
ऑपरेशन सिंदूर का पक्ष रखने के लिए विपक्ष को दी थी जिम्मेदारी
मोदी सरकार ने विपक्षी दलों का सम्मान करते हुए देश का पक्ष रखने के लिए मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद 59 सदस्यों वाले सात संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने 30 से ज़्यादा देशों और दुनिया के बड़े संस्थानों में का दौरा किया था। मोदी सरकार का मकसद इन प्रतिनिधिमंडलों के मार्फत पाकिस्तान से देश में हो रही आतंकवाद को पूरे विश्व समुदाय के समक्ष प्रदर्शित करना था। मोदी सरकार की यह पहल काफी कारगर साबित हुई थी और पूरे विश्व ने भारत की सहराना करते हुए पाकिस्तान को दोषी माना था।
मगर चुनाव दर चुनाव में मिली हार के बाद राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के पैरों तले जमीन खिसक गई हैं और ये सभी अपना मानसिक संतुलन खोते जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव में लगातार दो बार 2014 और 2019 में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए जरूरत भर सीट भी नहीं प्राप्त करने के बाद कांग्रेस पार्टी 2024 में 99 सीट जीतकर अवश्य नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को प्राप्त कर लिया हैं मगर उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम में कांग्रेस पार्टी को मिली अप्रत्याशित हार के बाद अब कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का उम्मीद पूरी तरह से समाप्त हो गया है और अब ये सभी अनगर्ल प्रलाप कर रहे हैं। राहुल गांधी को आभास हो गया है कि आगामी चुनाव में उनसे यह कुर्सी भी छीन जाएगी अतएव वो किसी भी प्रकार से मोदी सरकार सरकार को खटघरे में खड़ा करना चाह रहे हैं। राहुल गांधी का यह व्यक्त्व यह भी दर्शाता है कि उनके पास मोदी सरकार को घेरने के लिए मुद्दों का सख्त अभाव है।
विदेश नीति की आलोचना के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल क्यों ?
राहुल गांधी या किसी भी अन्य विपक्षी नेता के लिए मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना करने के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने की कोई जरूरत नहीं थी। राहुल गांधी को किसी अन्य देश की महिला प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मिलोनी का नाम लेने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। संदीप दीक्षित की बातों का समर्थन करके राहुल गांधी ने नारी सम्मान के साथ भी खिलवाड़ किया है। राहुल गांधी और संदीप दीक्षित की जोड़ी ने कांग्रेस पार्टी के झूठे नारी सम्मान की हकीकत खोलकर रख दिया है।
राहुल गांधी द्वारा इटली के बारे में ऐसा बोलना ज्यादा पीड़ादायक है क्योंकि उनका ननिहाल उसी देश में है और वहां के बारे में ऐसा बोल रहे हैं। उनकी माँ सोनिया गांधी का जन्म उसी देश में हुआ था। किसी देश की विश्व स्तर पर पहचान सिर्फ सत्ताधारी दल के कारण ही नहीं होती है, बल्कि विपक्षी दल भी काफी महत्वपूर्ण होता है और विश्व में किसी विपक्षी दल की भूमिका को भी देखा जाता है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का यह आचरण महिला विरोधी है। भारतीय समाज में महिलाओं का बड़ा सम्मान होता है। इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी, राहुल गाँधी और संदीप दीक्षित का यह नीच हरकत न सिर्फ पार्टी बल्कि, विश्वस्तर पर देश का सिर शर्म से झुका देने वाला है।
राहुल गांधी की हालत-अध जल गगरी छलकत जाय
राहुल गांधी को पूरी जानकारी का अभाव हैं क्योंकि देश के प्रथम प्रधानमंत्री और उनकी पिताजी के नाना जवाहरलाल नेहरू की बात की जाए तो ब्रूस रीडेल की पुस्तक JFK’s Forgotten Crisis में यह उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने 1961 में जवाहरलाल नेहरू की वाशिंगटन यात्रा के बाद अपने राजदूत से चर्चा में इसे अपने कार्यकाल के सबसे कठिन दौरों में गिना था और यह टिप्पणी की थी कि नेहरू गंभीर भू-राजनीतिक चर्चाओं की तुलना में जैकलीन कैनेडी से बातचीत में अधिक रुचि रखते थे।
विश्व के भू राजनीति के पटल पर गले मिलना एक आम बात है। 7 मार्च 1983 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए सातवें गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गले लगाया था। उन्होंने इंदिरा गांधी को अपनी “बहन” कहा और सम्मेलन की अध्यक्षता का हथौड़ा उन्हें सौंपा था।
राहुल गांधी का यह कथन कि देश किसी का मित्र नहीं होता, बल्कि वह सबसे पहले अपना राष्ट्रहित देखता है भी सत्य से कोसो दूर है। भारत को इजराइल ने एकतरफा मदद किया है। भारत ने लम्बे समय तक इजराइल से दूरी बनाकर रखा था और 29 जनवरी 1992 को प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने नई दिल्ली में इजराइल का दूतावास और तेल अवीव में भारतीय दूतावास खोलकर पूर्ण राजनयिक संबंधों की शुरुआत की थी। इसके बावजूद भी 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इज़राइल ने भारत को मिराज 2000 जेट के लिए ‘लाइटनिंग’ टारगेटिंग पॉड, लेज़र-गाइडेड हथियार, मानवरहित हवाई वाहन ( ड्रोन), और मोर्टार गोला-बारूद की आपूर्ति करके महत्वपूर्ण सैन्य सहायता प्रदान किया था।
इजराइल द्वारा दी गई मदद ने भारतीय वायुसेना की सटीक मारक क्षमता बढ़ने के कारण भारत को कारगिल युद्ध में काफी मदद मिला था। इजरायल ने भारत को कारगिल युद्ध के दौरान टारगेटिंग पॉड और लेज़र हथियार मिराज 2000 विमानों पर इजरायल लेज़र डेसिग्नेटर और टारगेटिंग पॉड दिया था, जिससे ऊंचे पहाड़ों पर छिपे पाकिस्तानी ठिकानों पर सटीक हमले करके पाकिस्तान को नेस्तनाबूद किया जा सका था। इजराइल ने घुसपैठ की सटीक जानकारी और बंकरों की स्थिति का पता लगाने के लिए भारत को सर्विलांस ड्रोन उपलब्ध कराए थे।











