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Exclusive: इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में मां दुर्गा के जयकारे, जय श्री राम का उद्घोष, भावविभोर कर देगा यह Video

पाकिस्तान के कराची शहर में स्थित ऐतिहासिक श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर हिंदू धर्म की आस्था, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

Published by
Mahak Singh

सनातन धर्म पर सैकड़ों वर्षों से आक्रमण हो रहे हैं, फिर भी हिंदुओं की आस्था अडिग है। इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के बाद भी सनातन की गूंज धीमी नहीं पड़ी है। कराची शहर से एक वीडियो आया है, जिसे देखकर गर्व महसूस होगा। यहां नवरात्र पर मां के जयकारे लगे तो विजायदशमी पर जय श्री राम का उद्घोष। सैकड़ों साल पुराने श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर से इसका वीडियो आया है।

पाकिस्तान के कराची शहर में स्थित ऐतिहासिक श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर हिंदू धर्म की आस्था, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। कराची के सोल्जर बाजार क्षेत्र में स्थित इस प्राचीन मंदिर में आज भी श्रद्धालु भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। नवरात्रि और विजयादशमी जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सीमाओं और परिस्थितियों के बावजूद धार्मिक आस्था अपनी परंपराओं से जुड़ी रहती है।

नवरात्रि और विजयादशमी पर भक्तिमय हुआ मंदिर

नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विजयादशमी के अवसर पर भी श्रद्धालु एकत्र होकर भगवान की आराधना करते हैं। कराची जैसे शहर में, जहां हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक है, वहां इन त्योहारों का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मंदिर में गूंजते भजन और ‘जय श्रीराम’ तथा ‘जय बजरंगबली’ के जयकारे श्रद्धालुओं की आस्था और अपनी परंपराओं के प्रति उनके समर्पण को दर्शाते हैं।

करीब 1,500 वर्ष पुराना है पंचमुखी हनुमान मंदिर

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर को आमतौर पर लगभग 1,500 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर की धार्मिक महत्ता का एक प्रमुख आधार भगवान हनुमान की पंचमुखी स्वरूप में पूजा है, जिसे हिंदू मान्यताओं में शक्ति, सुरक्षा और संकटों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि कराची में रहने वाले हिंदू परिवारों की धार्मिक स्मृतियों, सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है।

रामनाथ मिश्र जी और उनका परिवार करता है मंदिर की सेवा

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के संदर्भ में रामनाथ मिश्र जी और उनके परिवार का नाम भी महत्वपूर्ण रूप से सामने आता है। उपलब्ध विवरणों और मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, रामनाथ जी मंदिर की देखरेख तथा धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। उनके परिवार का मंदिर के संरक्षण और परंपराओं को आगे बढ़ाने में योगदान है। मंदिर से जुड़ी चर्चाओं में रामनाथ जी की माता जी के साहस का भी उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि जब कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने मंदिर में तोड़फोड़ करने का प्रयास किया, तब उन्होंने डटकर उनका सामना किया और मंदिर की रक्षा के लिए साहस दिखाया।

वर्ष 1947 में विभाजन से पहले कराची भारत का हिस्सा था। विभाजन के बाद यह पाकिस्तान में शामिल हो गया। इसके बावजूद कराची में रहने वाले हिंदू समुदाय ने अपने धार्मिक स्थलों और परंपराओं से संबंध बनाए रखा है।

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