विश्व

ईरान में ऑनर किलिंग के बढ़ते मामले: इज्जत के नाम पर महिलाओं की बेरहमी से हत्या

ईरान में ऑनर किलिंग के बढ़ते मामले। मरियम और 16 वर्षीय येगानेह की हत्या, परिवार द्वारा समर्थन, कम सजा और कानून का संरक्षण। UN रिपोर्ट और फेमिनिस्टों की चुप्पी पर विस्तृत विश्लेषण।

Published by
सोनाली मिश्रा

ईरान में यूं तो कई मामले ऐसे हैं, जिन पर लगातार ही चर्चा हो रही है, मगर इन दिनों ईरान में ऑनर किलिंग के बढ़ते मामलों को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। ऑनर किलिंग अर्थात इज्जत के नाम पर कत्ल! इज्जत के कारण कत्ल!

मरियम की हत्या

ईरान में 5 अक्टूबर 2026 को केशमद्वीप पर एक 28 वर्षीय महिला मरियम का बेरहमी से कत्ल उसके अपने ही भाई और शौहर ने कर दिया था। कत्ल भी ऐसा कि लोगों की रूह कांप जाए। उसका शव पूरी तरह से क्षतविक्षत स्थिति में मिला था। उसके घरवालों को उसके किरदार पर शक था, इसलिए उसे इतनी खौफनाक मौत दी गई। मगर जो सबसे भयावह था, वह था कि जब पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लिया तो उसके परिवार के ही 50 से ज्यादा रिश्तेदारों ने अस्पताल के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन किया और कहा कि यह सबसे न्यूनतम सजा थी, जो उसके घरवालों ने उसे दी थी।

ऐसे जो भी मामले होते हैं, उनमें यह विश्वास होता है कि अगर एक आदमी, फिर चाहे वह लड़की का भाई हो, शौहर हो या वालिद हो, उसकी इज्जत लड़की के कारण चली गई है, तो उसकी सजा तो लड़की को मिलनी ही चाहिए। मगर इससे भी खौफनाक जो है, वह यह कि इन लड़कियों की सुनवाई ही कहीं नहीं होती है। महिलाओं के अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठनों का कहना है कि ईरान में कई स्थानों पर ऐसी तमाम घटनाएं होती हैं, मगर यह अधिक सामने नहीं आ पाती हैं क्योंकि वहाँ के स्थानीय लोगों का समर्थन उस व्यक्ति के साथ हो जाता है, जो इस प्रकार की इज्जत वाली हत्याएं करता है।

इसके अनुसार ईरान की पुलिस अकैडमी का वर्ष 2020 का अध्ययन यह कहता है कि परिवार की इज्जत और माडिस्टी के सामाजिक नियमों का उल्लंघन करने के लिए लड़की के अब्बा, शौहर, चाचा, ताऊ या भाई के हाथों होने वाली हत्याओं का प्रतिशत कुल हत्याओं का 45% तक है। पिछले वर्ष मार्च में ही मानवाधिकारों पर UN के स्पेशल रिपोर्टर ने बताया कि 2024 में कम से कम 179 महिलाओं की उनके परिवार के लोगों ने हत्या कर दी। इन मामलों को फेमिसाइड के तौर पर दर्ज किया गया।

यह बहुत ही रोचक बात है कि पूरी दुनिया में पितृसत्ता को कोसने वाली फेमिनिस्ट ईरान के मामले में एकदम चुप हो जाती हैं। ईरान की सरकार द्वारा अनिवार्य हिजाब न पहनने वाली लड़कियों की हत्या की बात हो या फिर फेमिसाइड की बात, भारत में फेमिनिस्ट महिलाओं का रवैया ईरान में घट रही घटनाओं के प्रति शांत ही रहता है। हाँ, वे लोग तब बहुत खुश होती हैं, जब बुर्का और हिजाब पहने महिलाएं अमेरिका का विरोध करने के लिए सड़क पर उतर आती हैं। उन्हें वे महिलाएं अमेरिका का विरोध करें वाली बहादुर लगती हैं, मगर इज्जत के नाम पर मारी जा रही इन महिलाओं को लेकर यह मुंह सिल लेती हैं।

16 वर्षीय बाल निकाह से पीड़ित एक बच्ची की उसके शौहर द्वारा हत्या

इज्जत के नाम पर केवल मरियम की हत्या ही चर्चा में नहीं है, बल्कि एक और हत्या चर्चा में है। यह हत्या है एक 16 वर्षीय बच्ची की। येगानेह हुसैनजई नामक इस बच्ची का निकाह महज 10 वर्ष की उम्र में ही उसके फुफेरे भाई के साथ तय कर दिया गया था। और 14 वर्ष का होते ही उसका उसके साथ निकाह कर दिया गया।

मगर निकाह के बाद से ही लगातार उसके साथ मारपीट होने लगी थी। और घटना वाले दिन अर्थात 9 अक्टूबर को भी उसके शौहर ने उस पर बेरहमी से हमला किया और उसे एक बिजली के केबल और भारी लकड़ी के डंडे से तब तक पीटा गया, जब तक वह अधमरी नहीं हो गई, मगर उसके बाद भी उसके शौहर को तसल्ली नहीं हुई और उसके बाद उसके शौहर ने उसका गला घोंटकर उसकी जान ले ली।

मगर इसके बाद जब वे लोग उसे नाम के लिए अस्पताल लेकर गए थे तो डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि शक होने पर उसके शौहर को फिलहाल हिरासत में ले लिया गया है।

इज्जत के नाम पर हत्या में नाम मात्र की सजा

यह देखना और भी महत्वपूर्ण है कि यदि घर की इज्जत की खातिर लड़कियों का खून पानी की तरह बहाया जाता है, तो ईरान का कानून कितना ऐसे लोगों को दंड देता है? कानून कितना लचर है यह इसी वर्ष जुलाई में आए एक मामले के निर्णय से स्पष्ट होता है।

वालिद और दादा को कम सजा

जुलाई 2026 में ईरान की एक अदालत ने एक 17 वर्षीय लड़की के अब्बा को केवल आठ साल की सुनाई है।

मजे की बात यही है कि ईरान में इस बच्ची का कत्ल सरेआम इसलिए उसके अब्बा ने कर दिया था, क्योंकि वह परिवार की बंदिशों से हटकर काम कर रही थी। उसके अब्बा को यह पसंद नहीं था कि वह काम के बहाने पराए मर्दों से बात करे और अपने पैरों पर खड़ी हो। ऐसे में उनकी भावनाएं आहत हो गई और साथ ही उन्होनें इसे अपने परिवार की इज्जत पर चोट माना और फातेमह सुल्तानी की हत्या कर दी।

अब इस मामले में मुकदमा पूरे दो साल चलाना पड़ा, मगर जब निर्णय आया तो लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गईं और सुलेमानी की हत्या करने वाले को महज आठ साल की सजा मिली।

इसे भी पढ़ें: हिंसा की आग में जल रहा फ्रांस: 1500 से ज्यादा दुकानें लूटी, 2400 गिरफ्तार और 1000 पुलिसकर्मी भी घायल 

क्या कानून ही ऐसा है?

एक प्रश्न यहाँ पर यह भी उठता है कि आखिर लड़कियों की हत्या के मामले में उसके परिजनों को कम सजा क्यों मिलती है? तो इसके उत्तर में उस संरक्षण को ध्यान में रखा जा सकता है, जो ईरान के ऐसे लोगों को वहा के कानूनों के अनुसार सुरक्षा कवच मिला हुआ है। इस कानून के अनुसार “यदि कोई पिता (Father) या दादा (Paternal Grandfather) अपनी संतान या पोते-पोती की हत्या करता है, तो उसे ‘किसास’ (Retribution यानि मृत्युदंड या ‘खून के बदले खून’) की सजा नहीं दी जा सकती।।“

यह और भी रोचक है कि जहां लड़कियों को महज इस कारण मौत के घाट उतारा जा सकता है कि उनके किसी काम से इज्जत में कमी आई मगर यदि वे यह आंदोलन करें कि उन्हें हिजाब नहीं पहनना तो उन्हे न केवल जेल में डाला जाता है, बल्कि  तरह-तरह के अत्याचार भी किए जाते हैं। उसके बाद उनपर मुकदमा चलाकर सजा दी जाती है। कुछ को कुछ वर्षों की तो काइयों को मौत की सजा!

मगर चाहे ईरान में महिलाओं की इज्जत के नाम पर हत्या हो या फिर किसी और तरह हत्या, फेमिनिस्ट समुदाय एक बहुत ही सहज चुप्पी साध लेता है। उनकी यह सुविधाजनक चुप्पी बहुत कुछ बातें बयान करती है।

Share

Recent News