
कार्बेट पार्क: कभी-कभी इंसान से ज्यादा किसी पालतू जीव का जाना किसी सदमे से कम नहीं होता, जिम कार्बेट टाइगर रिज़र्व में कुछ ऐसा ही दुःखद माहौल इन दिनों छाया हुआ है। 80 वर्ष की आयु में हथिनी सोनाकली का निधन हो गया जिसका पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
कार्बेट टाइगर रिजर्व में लगभग 80 वर्ष की उम्र प्राप्त कर चुकी मादा हथिनी ‘सोनाकली’ हथिनी आयु संबंधी बीमारियों से ग्रसित थी तथा दिनांक 23 जनवरी, 2018 को विधिवत सेवानिवृत्त किया गया था। सेवानिवृत्ति के उपरान्त उससे किसी भी प्रकार का राजकीय कार्य नहीं लिया जाता था। इस अवधि में हथिनी के स्वास्थ्य एवं शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उसके रख-रखाव, उचित देखभाल तथा शारीरिक सक्रियता बनाए रखने हेतु नियमित व्यायाम (एक्सरसाइज से संबंधित गतिविधियां कराई जाती थीं। हथिनी के निधन की सूचना प्राप्त होने पर उच्चाधिकारियों एवं वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी द्वारा उसके शव का निरीक्षण किया गया।
इसके उपरान्त दिनांक निर्धारित क्रिया के अनुरूप वन कर्मियों द्वारा सलामी देकर हथिनी सोनाकली का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
हथिनी सोनाकली वर्ष 1997 में कार्बेंट टाइगर रिजर्व में लाई गईं थी। इसने वर्ष 1997 से 2002 तक ढिकाला रेंज, वर्ष 2002 से 2016 तक हल्दूपड़ाव, कालागढ़ क्षेत्र तथा वर्ष 2016 से वर्तमान तक ढिकाला रेंज में अपनी सेवाएं दीं। अपने सेवाकाल के दौरान सोनाकली ने वन्यजीव संरक्षण एवं बाघ रेस्क्यू अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 2011 में गर्जिया क्षेत्र में आदमखोर बाघ के रेस्क्यू अभियान में इसका विशेष योगदान रहा। वर्ष 2012 में सर्पद्ली रेंज में बाघ के हमले में श्री दीवानी राम की मृत्यु के उपरान्त सोनाकली ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए उनके शव को बाघ के मुंह से निकालकर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2023 में सर्पदुली क्षेत्र में बाघ रेस्क्यू अभियान में भी इसने उल्लेखनीय योगदान दिया।
अपने सेवाकाल के दौरान सोनाकली ने बाघ रेस्क्यू अभियानों एवं’वन क्षेत्रों में गश्त के दौरान अनेक अवसरों पर महावतों एवं चारा काटने वाले श्रमिकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शांत एवं सरल स्वभाव की सोनाकली ने अपने जीवनकाल में कार्बेट टाइगर रिजर्व में महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। उसका निधन कार्बेट टाइगर रिजर्व के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मानव वन्यजीव संघर्ष एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उसकी सेवाएं एवं योगदान सदैव स्मरणीय रहेंगे।
इस अवसर पर पंडित शिरीन संजय (IFS), उप निदेशक, कार्बेट टाइगर रिजर्व, बिन्दरपाल, पार्क वार्डन, कार्बेट टाइगर रिजर्व, डॉ. दुष्यंत शर्मा, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी, कार्बेट टाइगर रिजर्व, श्री संजय पाण्डे वन क्षेत्राधिकारी, सर्पद्ली, श्री रमेश ध्यानी, वन क्षेत्राधिकारी, ढिकाला सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपरिथत रहे।।