महाराष्ट्र

नागपुर के लॉ स्कूल में प्रोफेसर पर छात्राओं को इस्लाम अपनाने, कुरान पढ़ने का मैसेज भेजने का आरोप

एबीवीपी ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की। संगठन का कहना है कि जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं और शिकायतकर्ता छात्रा की पहचान गोपनीय रखी जाए।

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सुनीता मिश्रा

महाराष्ट्र के नागपुर स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में छात्राओं को आ​पत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मैसेज भेजने का मामला सामने आया है। संस्थान के एक प्रोफेसर पर आरोप है कि उसने मैसेज भेजकर छात्राओं को इस्लाम अपनाने और कुरान पढ़ने के लिए कहा। रविवार 18 अक्टूबर तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इन आरोपों के बाद प्रोफेसर को जांच पूरी होने तक अवकाश पर भेज दिया गया है। इस मामले को लेकर शनिवार 17 अक्टूबर को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। संगठन ने इसे छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान, शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और उचित कार्रवाई की मांग की।

एबीवीपी ने क्या मांगें रखीं?

एबीवीपी ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं और शिकायतकर्ता छात्रा की पहचान गोपनीय रखी जाए। इसके अलावा, छात्रा और गवाहों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ने देने, उन्हें प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से बचाने तथा जांच से संबंधित जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

मामला कैसे सामने आया?

यह मामला तब सामने आया, जब एक छात्रा ने अपने पिता को प्रोफेसर की ओर से भेजे गए मैसेज दिखाए। इसके बाद छात्रा के पिता ने हिंदू संगठनों के सदस्यों से संपर्क किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने मामला कॉलेज प्रशासन के सामने उठाने के साथ नागपुर के पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात की।विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति प्रोफेसर के पिछले कार्यस्थल, हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में उनके आचरण से संबंधित आरोपों की भी जांच करेगी।

प्रदर्शनकारियों, प्रशासन के बीच हुई बातचीत

पुलिस आयुक्त नित्यानंद झा ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्रोफेसर को जांच पूरी होने तक अवकाश पर भेज दिया है। शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे अलग-अलग संगठनों के 15 से 17 लोग विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। शिकायतकर्ता छात्रा और उसके पिता के साथ 15 से 20 लोगों का एक और समूह भी शाम को परिसर में पहुंचा। उस समय जांच कमेटी छात्रों के साथ चर्चा कर रही थी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत कराई। ताकि मामले को जल्द से जल्द निपटाया जा सके।

जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

बैठक के दौरान जांच समिति ने शिकायतकर्ताओं को आश्वासन दिया कि सभी आरोपों की जांच की जाएगी और निर्धारित समय के भीतर उचित कार्रवाई की जाएगी। नित्यानंद झा के अनुसार, पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई। फिलहाल विश्वविद्यालय की समिति मामले की जांच कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

 

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