लघु उद्योग भारती की ओर से गत 1 अक्तूबर को नई दिल्ली में ‘टेक्सटाइल कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया गया। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि वस्त्र उद्योग देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि 2014 में इस क्षेत्र का आकार 138 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 190 मिलियन डॉलर हो गया है।
2030 तक इसे 350 मिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसमें 250 मिलियन डॉलर घरेलू बाजार और 100 मिलियन डॉलर निर्यात से शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि शुल्क युद्ध (टैरिफ वार) की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने 40 नए देशों को चिन्हित किया है, जहां व्यापार बढ़ाया जाएगा। देश के 548 जिलों से हथकरघा और हस्तशिल्प का निर्यात 132 देशों को किया गया है।
उन्होंने बताया कि करीब 7-8 नए प्रकार के रेशों के उत्पादन पर जल्द काम शुरू होगा, जिससे विदेशों पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने बांस, अनानास और केले के रेशों जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों से स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने पर भी जोर दिया। मानव निर्मित वस्त्र अनुसंधान संघ (मंत्रा) के निदेशक डॉ. पंकज गांधी ने वस्त्र प्रौद्योगिकी, तकनीकी वस्त्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तकनीकी वस्त्रों का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, वाहन, निर्माण, परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. विजय सिंघल ने पर्यावरण संरक्षण, जबकि विवेक वर्मा ने वस्त्र उद्योग के अपशिष्ट जल से जुड़े विषय पर जानकारी दी।















