अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव के दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं। ऐसे डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध खत्म करने की पूरी कोशिशों में लगे हुए हैं। लेकिन, अब ईरान ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका उसकी सात शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई बातचीत नहीं होगी। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रजाई ने अमेरिकी जवाब को “अपर्याप्त” बताया है।
ईरान का प्रस्ताव और शर्तें
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अपना प्रस्ताव रखा था। उसने कहा था कि अगर अमेरिका उसकी सात शर्तें मान लेता है, तो सात दिनों के अंदर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल कर दिया जाएगा। रजाई ने स्टेट मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिकियों के सामने सात शर्तें रखीं और साफ बता दिया कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, न तो हॉर्मुज उनके लिए खुलेगा और न ही कोई बातचीत होगी।
अमेरिका का जवाब और ईरान की प्रतिक्रिया
रजाई के मुताबिक अमेरिका ने कुछ शर्तें तो मान ली हैं, लेकिन कुछ बातें अभी भी साफ नहीं हैं। इसलिए ईरान अब अमेरिका के जवाब का इंतजार नहीं कर रहा। सितंबर के अंत में ईरान को अमेरिका का जवाब मिला था। यह जवाब खाड़ी में टूटे हुए युद्धविराम को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव पर था। उससे कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।
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बिचौलियों की भूमिका
कतर और कुछ अन्य देशों के माध्यम से वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेश आ-जा रहे हैं। इनका मकसद संघर्ष खत्म करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।
हॉर्मुज क्यों महत्वपूर्ण है
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है। युद्ध शुरू होने से पहले यहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरता था। यह युद्ध फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था।रजाई ने रविवार को राज्य मीडिया के हवाले से ये बातें कही हैं। ईरान का रुख फिलहाल यह है कि शर्तें पूरी होने से पहले न तो जलडमरूमध्य खुलेगा और न ही कोई बातचीत शुरू होगी।

















