सोमवार को उमेश पाल हत्याकांड में 5 लाख रुपए का इमामी अभियुक्त अरमान बिहारी प्रयागराज की जिला न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने उसका ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर लिया। अरमान बिहारी ने न्यायालय से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उसके अनुरोध पर सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 14 दिन बाद न्यायालय में अगली सुनवाई होगी। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने अरमान की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की।
बता दें कि गत 24 फरवरी 2023 की शाम को उमेश पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उमेश पाल, बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह थे। उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने वर्ष 2007 में अतीक अहमद के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। उस अपहरण के मुकदमे में 24 फरवरी को अभियुक्तों की ओर से बहस की जानी थी। इसीलिए उमेश पाल, गनर संदीप निषाद और गनर राघवेन्द्र के साथ जनपद न्यायालय गए थे। शाम को जैसे ही घर के सामने कार से उतरकर गली में मुड़ने ही वाले थे कि गुड्डू मुस्लिम, गुलाम, अतीक अहमद का बेटा और करीब 9 अन्य लोगों ने गोली चलाना शुरू कर दिया। गोली और बम से हुए हमले में उमेश पाल और दोनों सुरक्षाकर्मियों की हत्या हो गई थी।
सीसीटीवी वायरल में दिखी सच्चाई
घटना के कई सीसीटीवी फुटेज भी वायरल हुए जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि हमलवार ने पहले उमेश पाल को गोली मारी। गोली लगने के बाद उमेश पाल गिर गए। थोड़ी ही देर में उठकर उमेश पाल घर के अंदर भागे। हमला करने वाले ने घर मे घुस कर गोली चलाना शुरू कर दिया। उमेश पाल के घर के बगल में एक मोबाइल फोन की दुकान पर एक शूटर पहले से मौजूद था। वह दुकानदार से फोन खरीदने की बात कर रहा था।
जैसे ही उमेश पाल पर पहली गोली चली उसने दुकान से बाहर निकल कर गोली चलाना शुरू कर दिया। मौके पर बमबाजी की गई जिससे आस – पास धुआं फैल गया। घटना के बाद सभी शूटर मौके से फरार हो गए। उमेश पाल और उनके दोनों गनर संदीप और राघवेंद्र को घायलवस्था में स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय ले जाया गया। उमेश पाल और संदीप को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गनर राघवेंद्र को दो दिन के बाद संजय गांधी पीजीआई लखनऊ में भर्ती कराया गया था, इलाज।के दौरान राघवेंद्र की मृत्यु हो गई थी।

















