दिल्ली पुलिस ने सोमवार को राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें पत्रकारों से कहा गया है कि वे प्रदर्शन स्थल पर अपनी पहचान साफ-साफ रखें और पुलिस के काम या आवाजाही में कोई रुकावट न डालें। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके लिखा, “स्टोरी मायने रखती है, लेकिन उसे हासिल करने का तरीका भी मायने रखता है।”
पहचान पत्र साथ रखना और दिखाना जरूरी
एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि प्रदर्शन की कवरेज के लिए मौके पर पहुंचने वाले पत्रकार अपने संस्थान की ओर से जारी वैध पहचान पत्र जरूर साथ रखें। जिन पत्रकारों के पास वैध पीआईबी या डीआईपी मान्यता कार्ड है, वे उसे भी ले जा सकते हैं। पुलिस ने सलाह दी है कि पहचान पत्र ऐसी जगह प्रदर्शित करें जहां मौके पर कानून-व्यवस्था संभाल रहे सुरक्षाकर्मी आसानी से पत्रकारों को पहचान सकें।
पुलिस के काम में बाधा न बनें
पत्रकारों से अनुरोध किया गया है कि प्रदर्शन कवर करते समय उनकी मौजूदगी या गतिविधियां पुलिस के कामकाज और जवानों की आवाजाही को प्रभावित न करें। खासकर तनावपूर्ण स्थिति में घटनास्थल से सुरक्षित और उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
प्रदर्शनकारियों से अलग नजर आएं
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि तनावपूर्ण हालात में पत्रकार ऐसी जगह खड़े हों जहां उनकी पहचान प्रदर्शनकारियों से अलग साफ नजर आए। इससे सुरक्षाकर्मियों को पत्रकारों और प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच अंतर समझने में आसानी होगी।
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एडवाइजरी जारी होने का मौका
यह एडवाइजरी तीन महिला पत्रकारों की शिकायतों के कुछ दिन बाद आई है। इन पत्रकारों ने तीन अक्टूबर को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। नई दिल्ली जिला पुलिस को ये शिकायतें मिली थीं। पुलिस ने रविवार को एक्स पर बताया कि तीन महिला पत्रकारों के आरोपों को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।
इन आरोपों के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले में कार्रवाई की मांग की थी। उसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ हैंडल्स ने दावा किया था कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ शारीरिक उत्पीड़न हुआ। नई दिल्ली के डीसीपी ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ये आरोप बेबुनियाद और गुमराह करने वाले हैं।
महिला प्रदर्शनकारियों को महिला स्टाफ ही संभालता है और उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाता है। हिरासत और रिहाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक होती है। पुरुष प्रदर्शनकारियों को भी तय समय में रिहा कर दिया गया। इसी घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए यह नई एडवाइजरी जारी की है।

















