गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से शाखाओं के माध्यम से समाज में राष्ट्रभक्ति, संस्कार, अनुशासन और संगठन की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रहा है। संघ की शताब्दी यात्रा सेवा, संस्कार, संगठन और समाज जागरण के विभिन्न आयामों से जुड़ी रही है। शताब्दी वर्ष के अंतिम चरण में अब शाखा विस्तार के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक निरंतर संपर्क और संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है।
सिक्टौर मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक स्थानों पर शाखाएं प्रारंभ करने तथा गांव-गांव जाकर समाज संपर्क बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के स्वयं में परिवर्तन से होती है। जब व्यक्ति अपने आचरण और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाता है तो उसका प्रभाव परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र पर पड़ता है।
गांवों में रहकर शाखा विस्तार और संपर्क का आह्वान
प्रान्त प्रचारक ने अल्पकालिक विस्तारक योजना का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से गांवों में रहकर शाखा विस्तार और समाज संपर्क को गति देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज समाज में अपनी संस्कृति, परंपराओं और महापुरुषों के प्रति रुचि बढ़ रही है। इस जागृति को सकारात्मक दिशा देने के लिए निरंतर संवाद और संपर्क आवश्यक है।
“जिस प्रकार हनुमान जी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया गया, उसी प्रकार समाज की अंतर्निहित शक्ति और सामर्थ्य को जागृत करने का प्रयास होना चाहिए। ‘स्वयं जागृत हम हों, जगाना देश है अपना’ की भावना के साथ राष्ट्र और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी होगी।” — रमेश जी, प्रान्त प्रचारक, गोरक्ष प्रान्त
बैठक में कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हुए अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना और गांव-गांव संपर्क बढ़ाना।
- विस्तार कार्य: 27 सितंबर से गांवों में रहकर शाखा विस्तार कर रहे अजय नारायण जी तथा विभाग प्रचारक गोरखपुर की भूमिका का विशेष उल्लेख किया गया।
- उपस्थिति: शिवशक्ति शाखा के कार्यवाह विशाल यादव, मुख्यशिक्षक विकास पांडेय, अभय पांडेय सहित मंडल के विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों ग्रामवासी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि वे समाज के बीच जाकर लोगों की आवश्यकताओं और समस्याओं को समझें तथा सकारात्मक वातावरण निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।












