देश में आबादी के बदलते स्वरूप को समझने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय के तहत बनी उच्चस्तरीय समिति अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अलग-अलग इलाकों में जनसंख्या से जुड़े आंकड़े जुटा रही है। इस जानकारी के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि पिछले वर्षों में किन क्षेत्रों में आबादी में बदलाव हुआ है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने 26 मई 2026 को ‘हाई लेवल कमिटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज’ का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं। समिति में जनगणना आयुक्त के साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। समिति को एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है।
जिलों और सीमावर्ती इलाकों पर फोकस
समिति राज्यों से जिलों, औद्योगिक क्षेत्रों और सीमावर्ती जिलों में पिछले वर्षों के दौरान आबादी में हुए बदलाव की जानकारी मांग रही है। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों की आबादी और उनकी धार्मिक संरचना से जुड़े आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं। समिति यह भी जानना चाहती है कि जिन इलाकों में आबादी में बड़ा बदलाव हुआ है, वहां इसके पीछे कौन-कौन से कारण रहे हैं। इसके लिए सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा।
आंकड़े जुटाने के बाद समिति अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा भी करेगी। इस दौरान स्थानीय अधिकारियों से सीधे जानकारी ली जाएगी। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों से भी संबंधित विषयों पर जानकारी और सुझाव लिए जाएंगे। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में आंकड़े जुटाना एक बड़ी चुनौती है। कई सरकारी विभागों में धर्म या अन्य आधार पर जानकारी नियमित रूप से दर्ज नहीं की जाती। ऐसे में समिति उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही स्थिति का अध्ययन करेगी। अंतिम रिपोर्ट में देश के अलग-अलग हिस्सों में आबादी में हुए बदलाव और उनके संभावित कारणों की जानकारी सामने आ सकती है। इसके आधार पर भविष्य की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सुझाव भी दिए जा सकते हैं।











