भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीक आधारित बताते हुए आरोप लगाया कि चुनावी स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए देश में भ्रम और अराजकता का माहौल पैदा करने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किया गया मतदाता सूची का पुनरीक्षण अधिक शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जानबूझकर एसआईआर को लेकर नकारात्मक माहौल बनाने और चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
‘13 करोड़ नाम सीधे मतदाता सूची से नहीं हटाए गए’
मुख्यमंत्री माझी ने इस दावे को खारिज किया कि करीब 13 करोड़ वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस में जिस 13 करोड़ की संख्या का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें अलग-अलग श्रेणियों की प्रविष्टियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इनमें करीब 2.8 करोड़ प्रविष्टियां मृत व्यक्तियों की, तीन करोड़ अनुपस्थित लोगों की, 6.3 करोड़ अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं की तथा करीब एक करोड़ एक से अधिक स्थानों पर दर्ज दोहरी प्रविष्टियों की थीं।
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रविष्टियों को वास्तविक मतदाता मानकर उन्हें मनमाने तरीके से मताधिकार से वंचित किए जाने का आरोप लगाना भ्रामक है। माझी ने कहा कि गलत, मृत, स्थानांतरित अथवा दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करना मतदाता सूची के पुनरीक्षण का आवश्यक हिस्सा है।
‘बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भूमिका’
माझी ने कहा कि मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के एजेंटों की भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि सत्यापन प्रक्रिया पर नजर रखते हैं और मतदाताओं को दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने का अधिकार भी प्राप्त है। इसलिए प्रक्रिया को पूरी तरह एकतरफा बताना उचित नहीं है।
|निर्वाचन आयोग ने भी एसआईआर को मतदाताओं, राजनीतिक दलों, बूथ लेवल अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों की भागीदारी वाली प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया है।
‘फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं’
फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को भी मुख्यमंत्री ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। माझी ने कहा कि मतदाताओं की सुविधा के लिए इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र की व्यवस्था की गई है। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाना है, न कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों को सीमित करना।
‘मतदाता डेटाबेस केंद्रीकृत नहीं, प्रक्रिया को किया गया डिजिटल’
मुख्यमंत्री ने मतदाता डेटाबेस को केंद्रीकृत किए जाने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य की मतदाता सूची का संचालन मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के माध्यम से होता है और उनकी वैधानिक एवं प्रक्रियागत शक्तियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था मूल रूप से विकेंद्रीकृत थी और अब भी विकेंद्रीकृत है। केवल प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है तथा ECI-NET और ERO-NET जैसे तकनीकी मॉड्यूल स्थापित किए गए हैं।
माझी ने कहा कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को केंद्रीकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। तकनीक का उद्देश्य मतदाता सूची के प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुगम बनाना है।
‘2.37 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए’
मुख्यमंत्री ने युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को लेकर उठाई जा रही आशंकाओं को भी खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि 24 जून 2025 से अब तक करीब 2.37 करोड़ नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इनमें बड़ी संख्या में युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 17.38 करोड़ है तथा पात्र युवाओं के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरे वर्ष उपलब्ध रहती है।
‘मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा निर्णय नहीं लिया’
मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य दो चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लिए जाने के आरोप को माझी ने भ्रामक और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के सभी निर्णय विचार-विमर्श और परामर्श के बाद लिए जाते हैं तथा आयोग के स्तर पर निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने ओडिशा मंत्रिमंडल का उदाहरण देते हुए कहा कि कैबिनेट की बैठकों में भी मंत्री विभिन्न विषयों पर सवाल और टिप्पणियां करते हैं। उनका जवाब दिया जाता है और अंततः सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में चर्चा और विचार-विमर्श स्वस्थ प्रक्रिया का हिस्सा है।
‘राजनीतिक हताशा में कांग्रेस मुद्दा बना रही’
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर को लेकर ऐसा नैरेटिव तैयार करने का प्रयास कर रही है, जिसका उद्देश्य जनता के बीच भ्रम पैदा करना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है और इसलिए वह मतदाता सूची के पुनरीक्षण को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। माझी ने कहा कि राजनीतिक दलों को सवाल उठाने और आपत्तियां दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
केरल में कांग्रेस नेता के रुख का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला का उदाहरण देते हुए पार्टी के एसआईआर संबंधी रुख पर सवाल उठाया। माझी ने कहा कि केरल में चेन्निथला ने एसआईआर का स्वागत किया और मतदाता सूची में कथित फर्जी प्रविष्टियों को हटाए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि एक ही प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस का रुख अलग क्यों दिखाई देता है।
2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर भी कांग्रेस को घेरा
माझी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को लेकर कांग्रेस की आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे पहले की व्यवस्था की तुलना में अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया।
उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर विचार करने को कहा।
‘संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं’
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका सहित विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी संस्था का निर्णय कांग्रेस के अनुकूल नहीं होता, पार्टी उस संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगती है। माझी ने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के इतिहास पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के अभियान में नहीं बदला जाना चाहिए।
‘संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास निंदनीय’
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर देश में भ्रम और अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “भारत के राजनीतिक इतिहास को देखें तो 1984 से 2014 के बीच कोई बहुमत वाली सरकार नहीं बनी। कांग्रेस पार्टी की भी वर्तमान में कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है। इसलिए अत्यंत हतोत्साहित होकर वे देश की संवैधानिक व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। यह अत्यंत निंदनीय है और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”
माझी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर संस्थागत मतभेद को लोकतंत्र पर संकट के रूप में पेश करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अभियान चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री ने एसआईआर को लेकर अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने और गलत सूचनाओं के माध्यम से व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास सफल नहीं होंगे।

















