भागलपुर (बिहार)। भागलपुर के नरगाकोठी, चंपानगर स्थित पूरनमल बाजोरिया शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में चल रहे क्षेत्रीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग का चौथा दिन शुक्रवार को अत्यंत भव्यता के साथ आरंभ हुआ. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव, झारखंड के प्रदेश मंत्री ब्रजेश कुमार, दक्षिण बिहार के प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा और स्थानीय विधायक रोहित पांडे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर योजना के 75 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं, जिसे पूरे देश में ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा.
“बिना किसी सरकारी सहायता के मैकाले शिक्षा पद्धति के विरुद्ध शुरू हुई थी शिशु मंदिर योजना”
सरस्वती शिशु मंदिर योजना के स्वर्णिम इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ब्रह्माजी राव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने शिक्षा के क्षेत्र में युगांतरकारी और ऐतिहासिक कार्य करने के उद्देश्य से वर्ष 1952 में इसकी स्थापना की थी. राष्ट्र के सर्वांगीण पुनर्निर्माण के लिए इसे अत्यंत आवश्यक समझा गया तथा समाज को अपना आधार मानकर, बिना किसी सरकारी सहायता के मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के विरोध में शिशु मंदिरों की शुरुआत की गई थी.
“सरस्वती शिशु मंदिर योजना विद्या भारती की मूल जड़ है। संघ की प्रेरणा से प्रारंभ होने वाली इस योजना का मुख्य और सर्वोपरि लक्ष्य राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा हिंदुत्वनिष्ठ बालकों का निर्माण करना है, जो आगे चलकर देश की बागडोर संभाल सकें।” – ब्रह्माजी राव, अखिल भारतीय मंत्री, विद्या भारती
क्षेत्रीय मंत्री राम अवतार नारसरिया ने अपने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक प्रबंधन केवल पैसों के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का संपूर्ण आर्थिक व्यवहार है. उन्होंने विषयों की पुनरावृत्ति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब हम किसी महत्वपूर्ण विषय पर बार-बार चर्चा नहीं करते हैं, तो विस्मृति आने लगती है, इसलिए वैचारिक विषयों को बार-बार याद करना और उन पर सतत मंथन करना आवश्यक है.
प्राचीन गुरुकुल पद्धति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर मंथन
झारखंड के प्रदेश मंत्री ब्रजेश कुमार ने अपने संबोधन में प्राचीन गुरुकुल पद्धति की शिक्षा व्यवस्था के गहरे महत्व को रेखांकित किया. इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को विस्तारपूर्वक समझाते हुए इसके सफल और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया.
क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम द्वारा ‘कुटुंब प्रबोधन’:
- भारतीय संस्कृति के छह स्तंभ: क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने उपस्थित कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों का ‘कुटुंब प्रबोधन’ करते हुए संस्कृति के छह प्रमुख स्तंभों—भाषा, भूषा, भोजन, भजन, भवन एवं भ्रमण के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
- जीवन में उतारने का आह्वान: उन्होंने इन पारंपरिक मूल्यों को अपने दैनिक जीवन और आचरण में पूरी तरह उतारने का जोरदार आह्वान किया।
इस गरिमामय कार्यक्रम में क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम, दक्षिण बिहार के प्रदेश मंत्री नरेंद्र कुमार सिंह, झारखंड के प्रदेश सचिव नकुल कुमार शर्मा, उत्तर बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह, सह प्रांत प्रचारक आशीष जी, भाजपा नेत्री प्रीति शेखर, मृणाल शेखर, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार वर्मा, विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य अमरेश कुमार, उमाशंकर पोद्दार, ब्रह्मदेव प्रसाद, सतीश कुमार सिंह, निर्माल्य कुमार, मीडिया प्रभारी अजीत कुमार दुबे, शशि भूषण मिश्र सहित कुल 40 पूर्णकालिक कार्यकर्ता एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक मुख्य रूप से उपस्थित रहे.











