जम्मू जिला प्रशासन ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ नरवाल और उसके आस-पास के क्षेत्रों में एक बड़ा अभियान शुरू किया। जिला उपायुक्त के निर्देश पर प्रशासन ने उन निजी भूमि मालिकों को नोटिस जारी किए थे, जिन्होंने इन्हें जमीन किराये पर दी थी। नोटिस मिलने के बाद अवैध कब्जे और तंबू हटाए जा रहे हैं। कई जगहों पर निर्माण भी तोड़े गए हैं।
स्थानीय संगठनों और व्यापार मंडलों का आरोप है कि इन अवैध बस्तियों से क्षेत्र की सुरक्षा और जनसांख्यिकी संतुलन पर असर पड़ रहा है। इस कारण कार्रवाई की मांग की जा रही है। जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए पिछले 24 घंटों में शहर के नरवाल व साथ वाले क्षेत्रों में बसाए गए करीब सात हजार रोहिंग्याओं से प्लाट खाली करवाया हैं। इन प्लाटों में रोहिंग्याओं ने दुकानें और झुग्गियां बनाई हुई थीं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक एक दर्जन से अधिक लोगों ने खाली प्लाटों में रोहिंग्याओं को षड्यंत्र के तहत बसाया था।

जम्मू में ऐसे बसाए गए घुसपैठिये
प्रशासन द्वारा मिले सख्त नोटिस के कारण नरवाल के कारयानी तालाब और बर्मा बस्ती इलाके में लगभग 500 रोहिंग्या परिवारों ने 16 सितंबर 2026 से खुद ही अपनी झुग्गियों और दुकानों को हटाना और सामान समेटना शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक जांच के तहत नरवाल में लगभग 40 कनाल जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई करीब 300 झुग्गियों को पूरी तरह साफ करा दिया गया है। जांच में पाया गया कि स्थानीय प्लॉट मालिकों ने इनसे किराया लेकर इन्हें यहां बसाया था। निष्कासन के बाद कुछ रोहिंग्या परिवारों ने बठिंडी के ऊपरी जंगली इलाकों में नया ठिकाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से भी खदेड़ दिया।
उच्चस्तरीय समिति ने किया था दौरा
यह कार्रवाई केंद्र सरकार की एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा अगस्त 2026 में जम्मू क्षेत्र में हुए जनसांख्यिकी बदलावों की समीक्षा के लिए किए गए दौरे के बाद अमल में लाई गई है। सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ स्थानीय प्लॉट मालिकों ने मामूली किराए के एवज में अवैध घुसपैठियों को जमीन उपलब्ध कराई थी। अब प्रशासन इन्हें बसाने के पीछे के तंत्र की भी गहन जांच कर रहा है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इन्हें बसाने में स्थानीय स्तर पर बिजली-पानी के कनेक्शन दिलाने और अन्य दस्तावेज बनवाने में मदद दी गई थी। अब प्रशासनिक स्तर पर इसकी भी समीक्षा की संभावना है।

मकान मालिक पर भी कसेगा शिकंजा
भारत के अधिकांश राज्यों और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस द्वारा किरायेदारों का सत्यापन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। ऐसा न करने पर मकान मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता या अन्य स्थानीय नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। विदेशी या स्थानीय नागरिक फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करता है तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज होता है। इसके अलावा अगर मकान मालिक को इसकी जानकारी थी या उसने जानबूझकर बिना जांच के उसे जगह दी है तो उसे भी अपराध को बढ़ावा देने या सह-आरोपी के रूप में देखा जा सकता है।
कड़ी कार्रवाई का प्रावधान
यदि कोई विदेशी नागरिक, घुसपैठिया या रोहिंग्या बिना वैध वीजा या दस्तावेजों के रह रहा है तो फॉरेनर्स एक्ट के तहत उस पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। अवैध रूप से रहने वाले विदेशियों को आश्रय देने पर मकान मालिक को कानूनी पूछताछ और मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है। जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से प्रशासन समय-समय पर किरायेदार सत्यापन अभियान चलाता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले मकान मालिकों पर कानून व्यवस्था को खतरे में डालने के आरोप में भी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
















