जम्मू प्रशासन ने रोहिंग्या बस्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन जमीन और प्लॉट मालिकों को नोटिस जारी किए हैं जिन्होंने अपनी जमीन पर अवैध रूप से इन्हें बसाया था। नरवाल और कयानी तालाब जैसे इलाकों में विशेष रूप से कार्रवाई की जा रही है। यहां जमीन मालिकों द्वारा किराए पर दी गई झुग्गियों और दुकानों को खाली कराया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या जनसंख्या असंतुलन पैदा कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि करीब 24 घंटे में सात हजार रोहिंग्याओं से प्लॉट खाली कराए गए हैं। नरवाल इलाके से लगभग 40 कनाल जमीन को खाली करा लिया गया है। हाल ही में गृह मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय टीम ने जम्मू का दौरा कर जनसांख्यिकीय बदलाव और इन बस्तियों का जायजा लिया था जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। प्रशासन के दबाव और नोटिस के बाद जमीन मालिकों ने रोहिंग्या परिवारों को अवैध रूप से कब्जा की गई संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया है। इसके बाद लोग खुद अपने अस्थायी ढांचे और झुग्गियां हटा रहे हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस अवैध बसावट के पीछे के तंत्र की जांच कर रही हैं।
वर्तमान स्थिति और बायोमेट्रिक सत्यापन:
हाल के वर्षों में, सरकार ने इन अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाए हैं। जम्मू के मौलाना आजाद स्टेडियम में उनके बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन) एकत्र किए गए थे और बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे लोगों को कठुआ के हीरानगर में बनाए गए होल्डिंग सेंटर (डिटेंशन सेंटर) में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई थी ताकि उनके प्रत्यर्पण की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

















