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भारत के संसाधन सिर्फ भारतीयों के लिए: अवैध घुसपैठ पर मोदी सरकार की सख्ती

भारत के संसाधन सिर्फ 140 करोड़ भारतीयों के लिए हैं। अवैध घुसपैठ पर मोदी सरकार का डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट फॉर्मूला, बिहार-बंगाल में 1.5 करोड़ संदिग्ध प्रविष्टियों का खुलासा और राष्ट्रहित की रक्षा।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Jun 23, 2026, 09:53 am IST
in विश्लेषण
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

भारत कभी भी एक भाषा, एक धर्म, एक जाति या एक संस्कृति वाला देश नहीं रहा है। इसके बावजूद भी 140 करोड़ भारतीय एक संविधान के तहत एक तिरंगे के नीचे एक राष्ट्रीय पहचान के साथ खड़े है। यही भारत की असली ताकत है। लेकिन इस ताकत की सबसे बड़ी शर्त अपनी देश की सीमाओं का सम्मान और उसको रक्षा भी है। इसका एक अन्य कारण यह भी है कि जब नागरिकता का कोई मूल्य नहीं रहता है और जब कोई भी अवैध रूप से सीमा पार करके भारत में प्रवेश कर सकता है। तब राष्ट्र का अर्थ धूमिल और कमजोर होने लगता है। जब भारतीय नागरिकों के अधिकार और गैरकानूनी घुसपैठियों के बीच कोई फर्क नहीं रहता तो फिर राष्ट्र का अर्थ ही क्या रह जाता है?

भारत के संसाधन सिर्फ अपने देशवासियों के लिए हैं

भारत के संसाधनों जैसे एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट, अस्पताल, स्कूल, सरकारी योजनाएं और सब्सिडी सिर्फ अपने देशवासियों के लिए हैं। ना कि किसी गैर भारतीय के लिए। इस देश को बनाने वाले भारतीय हैं, टैक्स देने वाले भारतीय हैं और रात दिन मेहनत करके भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाले भी सिर्फ भारतीय ही हैं। अतएव देश की सभी सुविधाओं पर भी केवल अपने देशवासियों का ही अधिकार है।

इसे भी पढ़ें: अल नीनो ने बिगाड़ा मानसून का हाल! रफ्तार पूरी तरह सुस्त, क्या जुलाई-अगस्त में होगी भरपाई

लेकिन जब अवैध घुसपैठिए भारत में दाखिल होते हैं तो ऐसा नहीं है कि वे सिर्फ देश की सीमा पार कर रहे हैं। अवैध घुसपैठिये भारत की उस व्यवस्था पर बोझ बनते हैं, जिसे देशवासियों ने अपने खून पसीने से खड़ा किया है। वर्षों तक देशवासियों को बरगलाया गया कि घुसपैठ कोई समस्या ही नहीं है।

SIR ने घुसपैठियों के लिए खड़ी की मुश्किलें

लेकिन अवैध घुसपैठिये की सच्चाई काफी चौकाने वाला और आँख खोलने वाला है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में अकेले बिहार में लगभग 65 लाख संदिग्ध और अमान्य प्रविष्टियों को चिन्हित किया गया था। वहीं बिहार के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख नाम हटाए गए जो राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 12% था। इन दोनों प्रदेशों की सीमा बांग्लादेश से लगती है। सिर्फ इन दो राज्यों में 1.5 करोड़ से ज्यादा प्रविष्टियां कई सवालों को खड़ा करता है। इसके बावजूद भी कुछ राजनीतिक दलों जैसे कांग्रेस पार्टी, कम्युनिस्ट दलों, समाजवादी पार्टी, आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और ममता बनर्जी की पार्टी सहित कई अन्य दलों की चुप्पी बताती है कि उनके लिए घुसपैठ कोई मुद्दा ही नहीं है। इसका कारण इन दलों का अपना स्वार्थ है क्योंकि इन दलों और इनके नेताओं के लिए राष्ट्रहित से बड़ा उनका वोट बैंक है। इन दलों के लिए देशवासियों की सुविधा और सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती है।

देश के सीमाई इलाकों में जनसांख्यकी में हो रहा बदलाव

देश की सीमा से लगे कई इलाकों में सांख्यिकीय में होता बदलाव भी कान खड़े करता है। सवाल ये है कि क्या इन अवैध प्रवासियों को वोट बैंक के अलावा अन्य कारणों से भी देश में बसाया जा रहा हैं? आने वाले समय में ये अवैध प्रवासी देश की सुरक्षा के लिए भी समस्या खड़ी कर सकते हैं। अतएव इस समस्या को नजरअंदाज करना किसी भी देशभक्त सरकार के लिए संभव नहीं है। 1947 में देश के विभाजन के कारण लाखों परिवारों के उजड़ने के साथ ही लाखों लोगों को अपने जिंदगी से हाथ धोना पड़ा था। 1971 में एक नया देश बांग्लादेश बनने के साथ ही भारत के लिए अवैध प्रवासियों का प्रवेश बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो गई है। इस उपमहाद्वीप के लिए भारत ने इतनी बड़ी कीमत चुकाई है। अब भारत अपनी धरती पर अवैध घुसपैठ को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है।

असंभव लगने वाले नक्सलवाद को जड़ से मोदी सरकार ने समाप्त किया

एक समय कहा जाता था नक्सलवाद कभी खत्म नहीं होगा। मगर मोदी सरकार ने दृढ़ निश्चय और संकल्प के साथ जब निर्णायक कार्रवाई किया तो असंभव सा लगने वाला कार्य भी संभव हो गया है। मोदी सरकार वैसी ही निश्चयता के साथ अब वैसी ही कार्रवाई और लड़ाई अवैध घुसपैठ के खिलाफ छेड़ दिया है। मोदी सरकार का मूल मंत्र डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट है। इसमें घुसपैठियों की पहचान करना, सिस्टम से उनके नाम को हटाना और जिन्हें भारत में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं। उन्हें वापस भेजना मोदी सरकार का अहम मुद्दा है।

मोदी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य-देश के संसाधन सिर्फ भारतीयों के लिए

भारत के संसाधन सिर्फ देशवासियों के लिए हैं यह स्पष्ट सोच मोदी सरकार की है। भारत की योजनाएं सिर्फ अपने देशवासियों के लिए ही है। भारत के नौकरी और व्यवसाय के अवसर सिर्फ भारतीयों के लिए ही है। देश में सरकार की स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास सहित अन्य योजनायों पर केवल इस देश के वैध नागरिकों का है, के मूल मंत्र पर मोदी सरकार आगे बढ़ रही है। देशवासी भी अपने इस अधिकार को समझते हुए कई हिस्सों में खुद से आगे आकर अवैध प्रवासियों की पहचान करने में मदद कर रहे हैं जो स्वागत योग्य कदम है।

Topics: अवैध घुसपैठडिटेक्ट डिलीट डिपोर्टभारत के संसाधन सिर्फ भारतीयों के लिए
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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