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Weather Today: 17 सितंबर के बाद भी बारिश के आसार, जानें अगले 10 दिनों का हाल

मानसून की विदाई केवल बारिश रुकने से तय नहीं होती। इसके लिए हवाओं की दिशा बदलना, वातावरण में नमी कम होना और बारिश की गतिविधियों में लगातार कमी आना जरूरी होता है।

Published by
Mahak Singh

देश से मानसून की विदाई का इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ दिन और बारिश का सामना करना पड़ सकता है। मौसम का मिजाज फिलहाल मानसून की वापसी के पक्ष में नहीं है। पश्चिम से आने वाली शुष्क हवाओं को मानसूनी हवाएं पीछे धकेल रही हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के आसपास बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत के कई इलाकों में बारिश फिर तेज हो गई है। ऐसे में मानसून की विदाई अभी टलती नजर आ रही है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार मानसून की वापसी 17 सितंबर के बाद शुरू हो सकती है। इतना ही नहीं, बंगाल की खाड़ी में 20 सितंबर के आसपास एक नया मौसमी सिस्टम बनने की संभावना है। इसके सक्रिय होने पर बारिश का दौर कुछ और दिनों तक जारी रह सकता है।

मानसून की वापसी में क्यों हो रही देरी?

मानसून की विदाई केवल बारिश रुकने से तय नहीं होती। इसके लिए हवाओं की दिशा बदलना, वातावरण में नमी कम होना और बारिश की गतिविधियों में लगातार कमी आना जरूरी होता है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में नमी और बारिश दोनों मौजूद हैं। यही कारण है कि मानसून की वापसी के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह नहीं बन पाई हैं। देशभर में इस साल अब तक बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है। कुछ राज्यों में यह कमी 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऐसे में सितंबर की बारिश किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गई है। अच्छी बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी और फसलों को फायदा मिल सकता है। पिछले साल पश्चिमी राजस्थान से 14 सितंबर को मानसून की वापसी शुरू हो गई थी। इस बार अभी वहां भी विदाई के अनुकूल मौसम नहीं बना है।

अगले कुछ दिनों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। उत्तराखंड में कुछ जगह तेज बारिश भी हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर में भी स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पूर्वी गुजरात में बारिश का असर ज्यादा रह सकता है। गुजरात के कुछ हिस्सों में लंबे सूखे के बाद बारिश होने से राहत मिली है, हालांकि सौराष्ट्र और कच्छ में बारिश की कमी अब भी बनी हुई है।

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