पूर्व गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों के बाद एक और गैंगस्टर का पंजाब की राजनीति में पदार्पण हो गया है। जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने लखबीर सिंह सततिी सिधाना को बठिंडा जिले के मौड़ विधानसभा क्षेत्र सीट से टिकट दिया है। इसके अलावा अकाली दल ने तलवंडी साबो से दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू को मैदान में उतारने का ऐलान किया है।
दोनों प्रत्याशियों के नाम का ऐलान अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने किया। दीप सिद्धू ने कट्टरपंथी संगठन वारिस पंजाब दे का गठन किया था और दीप सिद्धू की मौत के बाद अमृतपाल सिंह इस संगठन पर काबिज हो गया था।
लखबीर सिंह लक्खा सिधाना इससे पहले साल 2022 में भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इस सीट से चुनाव लड़ चुका ह लेकिन वो हार गया था। यह उसका पहला चुनाव था।
अकाली दल वारिस पंजाब दे द्वारा की गई इस घोषणा से पहले मनदीप सिंह सिद्धू मौड़ विधानसभा में प्रचार कर रहे थे। पूरी विधानसभा में उनकी पोस्टर भी लगे हुए हैं। पार्टी द्वारा मनदीप सिंह सिद्धू को तलवंडी साबो से चुनाव लडऩे के लिए राजी किया गया क्योंकि लखबीर पिछले पांच सालों से मौड़ विधानसभा में काम कर रहा है। इसके अलावा खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के परिवार ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी लखबीर सिंह सिधाना का समर्थन किया था।
कौन है लखबीर सिंह सिढाना?
बठिंडा जिले के सिधाना गांव का रहने वाला लखबीर सिंह का विवादों से पुराना नाता है। साल 2024 में बठिंडा लोकसभा चुनाव में दाखिल किए गए शपथ पत्र में उन्होंने अपने ऊपर कुल 14 आपराधिक मामले होने की जानकारी दी थी। इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण और आम्र्स एक्ट के तहत लगे आरोप शामिल हैं।
किसान आंदोलन को भी भडक़ाया था
साल 2021 में केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के दौरान उन पर लाल किले के पास हुई हिंसा के लिए प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगा था।
हालांकि वह आरोपों से इनकार करता है। लखबीर सिंह सिधाना ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से ग्रेजुएशन किया है। वह दावा करता है कि वह अपराध की दुनिया से दूरी बना चुका है और सामाजिक कार्यों में जुटा है।
पहले भी राजनीति करने का प्रयास किया
लक्खा सिधाना ने साल 2011 में पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब का दामन थामा था लेकिन दो साल बाद ही इससे नाता तोड़ लिया। इसके बाद वह कई सामाजिक कार्यों में लगा, इनमें गरीब परिवारों की बेटियों के सामूहिक विवाह करवाना शामिल हैं।
साल 2017 में लक्खा अंग्रेजी व हिन्दी लिखे साइनबोर्डों को खराब करने और उन्हें पंजाबी में लिखने के कारण चर्चा में आया था। उसे गिरफ्तार करके फरीदकोट मॉडर्न जेल भेज दिया गया था। इसके अतिरिक्त उसने मौड़ मंडी के सर्वहितकारी विद्या मंदिर में घुस कर गुंडागर्दी भी की थी।
अमृतपाल नहीं लड़ेगा तलवंडी साबो से चुनाव
दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू के नाम के ऐलान के बाद अमृतपाल के तलवंडी साबो निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लडऩे की अटकलों पर पूरी तरह से विराम लग गया। इससे वारिस पंजाब दे ने अमृतपाल से सहयोगी पपलप्रीत सिंह को मजिठा को और सतवंत सिंह को बस्सी पठाना से टिकट दिया। सतवंत सिंह, इंदिरा के हत्यारे केहर सिंह का बेटा है। केहर सिंह को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या में उसकी भूमिका के लिए फांसी दी गई थी।
इससे पहले गुरप्रीत सिंह सेखों ने थामी झाड़ू
इससे पूर्व गैंगस्टर से नेता बने गुरप्रीत सिंह सेखों रविवार को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया। सेखों के खिलाफ 47 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और वह 2016 के चर्चित नाभा जेलब्रेक मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में उनके आप में शामिल होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला था। फिरोजपुर जिले के मुदकी इलाके के रहने वाले सेखों ने जीरा में आयोजित एक जनसभा के दौरान आप की सदस्यता ली। नाभा जेलब्रेक मामले में मार्च 2023 में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई थी।

















