52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारी तेज, हरिद्वार में जुटेंगे 3,000 से अधिक विद्वान और प्रतिभागी
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52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारी तेज, हरिद्वार में जुटेंगे 3,000 से अधिक विद्वान और प्रतिभागी

हरिद्वार के विश्वविद्यालय पतंजलि में 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बैठक हुई। सम्मेलन में 3,000 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Sep 11, 2026, 11:04 pm IST
inउत्तराखंड

हरिद्वार: भारत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा, संस्कृति, दर्शन, संस्कृत एवं प्राच्यविद्याओं के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके समकालीन संदर्भों में पुनर्पाठ के उद्देश्य से आयोजित होने वाले 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन (All India Oriental Conference-AIOC) की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय पतंजलि के प्रशासनिक भवन स्थित कॉन्फ्रेंस रूम में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता पूज्य साध्वी डॉ. देवप्रिया, प्रो-वाइस चांसलर, विश्वविद्यालय पतंजलि ने की। बैठक में सम्मेलन के सफल एवं भव्य आयोजन को लेकर तैयारियों, व्यवस्थाओं, कार्य-विभाजन और विभागवार दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन की सफलता के लिए सामूहिक सहभागिता पर जोर

बैठक में कुलसचिव श्री दीपेश सक्सेना, उप-कुलसचिव डॉ. निर्विकार, डीन-एकेडमिक्स डॉ. ऋत्विक बिसारिया, डीन स्टूडेंट्स अफेयर्स, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पूज्य साध्वी डॉ. देवप्रिया ने अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सम्मेलन से संबंधित उनके दायित्वों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इतने व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन की सफलता के लिए सामूहिक सहभागिता, आपसी समन्वय, अनुशासन एवं समर्पण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि 52वां AIOC केवल विश्वविद्यालय पतंजलि के लिए एक प्रतिष्ठित अकादमिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान-विरासत, संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं के संरक्षण एवं वैश्विक स्तर पर उनके पुनर्प्रतिष्ठापन का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी फैकल्टी एवं नॉन-टीचिंग स्टाफ से अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।

भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक अकादमिक विमर्श से जोड़ने का प्रयास

पूज्य साध्वी डॉ. देवप्रिया ने कहा कि विश्वविद्यालय पतंजलि की पावन भूमि पर आयोजित होने वाला यह सम्मेलन देश-विदेश के विद्वानों, आचार्यों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।

सम्मेलन के माध्यम से धर्म, दर्शन, संस्कृत, योग, आयुर्वेद, साहित्य, कला, शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली की गौरवशाली परंपरा को आधुनिक अकादमिक विमर्श से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

देश-विदेश के विद्वानों का होगा संगम

52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन में भारत के प्रख्यात विद्वानों के साथ-साथ विदेशों से भी विद्वान एवं प्रतिभागी शामिल होंगे। सम्मेलन में 3,000 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के भाग लेने की संभावना है।

संस्कृत, भारतीय दर्शन, धर्म, योग, आयुर्वेद, इतिहास, पुरातत्त्व, भाषाविज्ञान, पांडुलिपि विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस व्यापक अकादमिक आयोजन में सहभागिता करेंगे।

यह सम्मेलन धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग एवं Oriental Studies का एक विराट मंच बनेगा, जहां भारत की प्राचीन ज्ञानधारा आधुनिक शोध, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैश्विक अकादमिक विमर्श के साथ संवाद करेगी।

इन विषयों पर होगा अकादमिक विमर्श

सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर शोध एवं अकादमिक विमर्श आयोजित किया जाएगा। इनमें वैदिक अध्ययन, संस्कृत एवं शास्त्रीय भाषाएं, पालि एवं बौद्ध अध्ययन, प्राकृत एवं जैन अध्ययन, इतिहास, पुरातत्त्व एवं पांडुलिपि विज्ञान शामिल हैं।

इसके अलावा भारतीय भाषाएं एवं भाषाविज्ञान, भारतीय दर्शन, धर्म अध्ययन, प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भारतीय ललित कलाएं, संस्कृत एवं कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स तथा AI, आधुनिक संस्कृत साहित्य, इतिहास एवं पुराण, भारतीय सौंदर्यशास्त्र एवं काव्यशास्त्र, धर्मशास्त्र एवं अर्थशास्त्र पर भी चर्चा होगी।

सम्मेलन में योग एवं आयुर्वेद, ईरानी-अरबी-फारसी एवं एशियाई अध्ययन, प्राचीन भारतीय शिक्षा एवं शिक्षाशास्त्र, भारतीय ज्ञान प्रणाली, भारतीय अनुसंधान पद्धति (Bāratīya Anusandhāna Paddhatiḥ), कुंभ रहस्यम्, इंडोलॉजिकल स्टडीज तथा बाल-साहित्य जैसे विषय भी अकादमिक विमर्श का हिस्सा होंगे।

पंडित परिषद होगी सम्मेलन का विशेष आकर्षण

AIOC की विशिष्ट परंपराओं में शामिल पंडित परिषद (Pandit Parisat) सम्मेलन का विशेष आकर्षण होगी। इसमें पारंपरिक शास्त्र-परंपराओं में प्रशिक्षित विद्वान पंडितों द्वारा गंभीर शास्त्रीय विमर्श एवं संवाद किया जाएगा।

वैज्ञानिक संस्कृत में होने वाली यह विद्वत् परिषद प्राचीन अवधारणाओं और आधुनिक व्याख्याओं के बीच सार्थक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनेगी।

युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर

सम्मेलन युवा शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं उभरती हुई अकादमिक प्रतिभाओं के लिए भी विशेष अवसर प्रदान करेगा। वे अपने मौलिक शोध एवं विचार देश-विदेश के वरिष्ठ विद्वानों, पारंपरिक पंडितों एवं आधुनिक शोधकर्ताओं के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे।

इसके साथ ही युवा प्रतिभागियों को विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ विद्वानों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।

शोध-सारांश और पूर्ण शोध-पत्र आमंत्रित

52वें AIOC के लिए विद्वानों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालय शिक्षकों एवं स्वतंत्र शोधकर्ताओं से मौलिक एवं अप्रकाशित शोध आमंत्रित किए गए हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां

  • शोध-सारांश (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2026
  • पूर्ण शोध-पत्र (Full Paper) जमा करने की अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2026
  • Delegate Fee जमा करने की अंतिम तिथि: 10 अक्टूबर 2026

शोध-पत्र संस्कृत, हिंदी अथवा अंग्रेजी में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। पूर्ण शोध-पत्रों की अकादमिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए Double-Blind Peer Review प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

प्रकाशकों और अकादमिक संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण मंच

52वां AIOC प्रकाशकों, अकादमिक संस्थानों, लेखकों, शैक्षिक संगठनों एवं ज्ञान-संसाधन प्रदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण मंच होगा।

3,000 से अधिक संभावित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के बीच पुस्तकें, शोध प्रकाशन, जर्नल्स, पाठ्यपुस्तकें, संदर्भ ग्रंथ एवं अन्य शैक्षिक संसाधन प्रदर्शित किए जा सकेंगे।

इससे देश-विदेश के विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं संस्थानों के बीच नए अकादमिक एवं व्यावसायिक संबंधों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।

वर्ष 1918 से चली आ रही है अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की परंपरा

अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की गौरवशाली परंपरा वर्ष 1918 से चली आ रही है। अब इसका 52वां संस्करण विश्वविद्यालय पतंजलि, हरिद्वार में आयोजित होना अपने आप में महत्वपूर्ण अवसर है।

“Preserving Heritage, Inspiring the Future — विरासत का संरक्षण, भविष्य की प्रेरणा”

इसी भावना के साथ आयोजित होने वाला यह सम्मेलन अतीत का केवल स्मरण नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा को वर्तमान की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए भविष्य के लिए नई दिशा तलाशने का प्रयास है।

सम्मेलन को सफल बनाने का लिया संकल्प

बैठक के अंत में विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग एवं समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि 52वां अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन हरिद्वार की पावन धरती पर भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन, योग एवं प्राच्यविद्या का एक ऐसा महामिलन बनेगा, जो विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिष्ठा के साथ-साथ भारत की अमूल्य ज्ञान-विरासत को वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त रूप से प्रतिष्ठित करेगा।

Topics: 52वां अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलनसंस्कृतप्राच्यविद्यायोगOriental Studiesआयुर्वेदहरिद्वारभारतीय दर्शनभारतीय ज्ञान परंपराAIOC 2026अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलनविश्वविद्यालय पतंजलिप्राच्यविद्या सम्मेलन
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