विश्लेषण

Explainer: BRICS समिट के लिए दिल्ली में जुट रहे दुनिया के दिग्गज, जानिए कैसे बढ़ा भारत का कद?

भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स समिट। समूह अब 11 पूर्ण सदस्य देशों का हो चुका है। जनसंख्या 49.5%, वैश्विक GDP में 40% हिस्सेदारी। जानें कौन-कौन नेता आ रहे हैं और मुख्य एजेंडा क्या है

Published by
कुलदीप सिंह

नई दिल्ली का भारत मंडपम इस वक्त वैश्वक दिग्गजों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 12 और 13 सितंबर 2026 को यहां 18वां ब्रिक्स समिट हो रहा है। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और ये समिट उसके अध्यक्षीय साल का सबसे बड़ा मौका है।

ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन से हुई थी। बाद में साउथ अफ्रीका जुड़ा, फिर 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई आए, और 2025 में इंडोनेशिया भी फुल मेंबर बन गया। अब ये 11 देशों का बड़ा समूह है। साथ में 10 पार्टनर देश भी जुड़े हुए हैं।

समिट का थीम क्या है?

भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन की थीम — “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी”। समिट में मल्टीलैटरलिज्म, ट्रेड, इनवेस्टमेंट, एनर्जी और फूड सिक्योरिटी, सप्लाई चेन्स और ग्लोबल गवर्नेंस जैसे मुद्दे चर्चा में रहेंगे।

कौन-कौन आ रहा है

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आ रहे हैं — सात साल बाद भारत की उनकी ये पहली यात्रा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। इसके अलावा साउथ अफ्रीका के सिरिल रामाफोसा, ईरान के मसूद पेजेशकियान, मिस्र के अब्देल फतह अल-सीसी, इथियोपिया के आबी अहमद, इंडोनेशिया के प्राबोवो सुबियांतो और यूएई के अबू धाबी क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी लिस्ट में हैं। ब्राजील से विदेश मंत्री आने वाले हैं। कई पार्टनर देशों के नेता भी शामिल होंगे।

ब्रिक्स की कुल आर्थिक ताकत

आंकड़ों के मुताबिक ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी रखते हैं। ग्लोबल जीडीपी में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। वैश्विक व्यापार में इनका हिस्सा करीब 26 प्रतिशत बैठता है।

चीन अकेले ब्रिक्स की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा रखता है, लेकिन भारत दूसरे नंबर पर मजबूती से खड़ा है। भारत की नॉमिनल जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बताई जा रही है, जो ब्रिक्स के अंदर दूसरे स्थान पर है। रूस, ब्राजील और इंडोनेशिया भी अच्छी-खासी ताकत जोड़ते हैं। समूह में एनर्जी एक्सपोर्टर्स भी शामिल हैं, जिससे इसकी वजनदारियत बढ़ गई है।

भारत का कद कैसे बढ़ा

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और 2012, 2016, 2021 के बाद इस साल चौथी बार अध्यक्षता कर रहा है। दिल्ली में समिट होस्ट करना अपने आप में बड़ा मौका है। शी जिनपिंग का आना भारत-चीन संबंधों में राहत का संकेत माना जा रहा है। पुतिन का आना भी द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती देता है।

भारत की तेज आर्थिक वृद्धि ब्रिक्स के अंदर उसकी आवाज को और वजनदार बना रही है। समूह में भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और इनोवेशन जैसे मुद्दों पर भारत अपनी प्राथमिकताएं आगे बढ़ा रहा है। ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का मंच भी भारत के लिए अहम है।

ब्रिक्स अब पहले जितना छोटा और सीमित नहीं रहा। विस्तार के बाद इसमें अलग-अलग हितों वाले देश शामिल हो गए हैं, लेकिन आर्थिक वजन और जनसंख्या की वजह से ये मंच दुनिया के बड़े फोरम में अपनी जगह बना चुका है। दिल्ली समिट इसी बड़े ब्रिक्स की एक महत्वपूर्ण बैठक है, जहां भारत होस्ट के तौर पर एजेंडा सेट कर रहा है।

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