हल्द्वानी में पूर्व सैनिक सम्मेलन : नितिन नवीन बोले- सैनिक देश के सुख, शांति और स्वतंत्रता के आधार
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हल्द्वानी में पूर्व सैनिक सम्मेलन : नितिन नवीन बोले- सैनिक देश के सुख, शांति और स्वतंत्रता के आधार

Haldwani Ex Servicemen Conference: हल्द्वानी में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मेलन में नितिन नवीन ने कहा कि सैनिकों का जज्बा कभी रिटायर नहीं होता। वे देश की सुरक्षा का आधार हैं।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Sep 10, 2026, 09:14 pm IST
inउत्तराखंड
Haldwani Ex Servicemen Conference Nitin Nabin Address Uttarakhand Veterans Panchjanya

हल्द्वानी कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों को संबोधित करते नितिन नवीन

हल्द्वानी: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हल्द्वानी में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सैनिक देश के सुख, शांति और स्वतंत्रता के आधार हैं। उन्होंने कहा कि सैनिक सरहद पर कठिन परिस्थितियों में खड़े रहकर देश की सुरक्षा करते हैं और उनका राष्ट्रप्रेम तथा जज्बा कभी रिटायर नहीं होता।

अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर में की पूजा-अर्चना

कार्यक्रम से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हल्द्वानी के बेरीपड़ाव स्थित पवित्र ‘अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर’ में विधिवत पूजा-अर्चना कर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने शहीद स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके उपरांत उन्होंने हल्दूचौड़ बूथ भाजपा अध्यक्ष राकेश चंद्र आर्य के आवास पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ चाय पर चर्चा की। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, कर्नल अजय कोठियाल, राम सिंह कैड़ा, सूबेदार मेजर बहादुर सिंह मेहरा, कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी, कैप्टन गंभीर सिंह धामी, शमशेर सिंह बिष्ट सहित अन्य नेतागण और पूर्व सैनिक मौजूद रहे।

‘सैनिकों के कारण 140 करोड़ देशवासी सुख-शांति से रहते हैं’

नितिन नवीन ने कहा कि सैनिकों ने देश के लोगों को सुख, शांति और स्वतंत्रता के साथ जीवन दिया है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी सैनिकों को प्रणाम, अभिनंदन और नमन किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें सरहद पर जाकर उन सीमाओं को देखने का मौका मिला, जहां सैनिक बिना धूप, पानी और बारिश की चिंता किए निरंतर देश की सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं, तब उन्हें महसूस हुआ कि देश के 140 करोड़ लोग यदि सुख और शांति से रहते हैं तो इसका बड़ा कारण सरहद पर खड़ा सैनिक है।

“सैनिकों के रिटायर होने पर ‘पूर्व सैनिक’ लिखा जाता है, लेकिन उनका जज्बा, खून, राष्ट्रप्रेम और हमेशा जीवंत रहने वाली जवानी कभी रिटायर नहीं हो सकती।”

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद भी देश की सेवा में लगे रहते हैं।

देवभूमि और वीरभूमि को किया नमन

नितिन नवीन ने हल्द्वानी की ऐतिहासिक धरा पर मां काली चौड़ के पावन चरणों में शीश झुकाने की बात कही। उन्होंने मां नैना देवी के जागृत शक्तिपीठ, सिद्ध कैंची धाम के नीम करौली बाबा और घोड़ाखाल में विराजमान कुमाऊं के न्याय के देवता गोलू देवता की पवित्र भूमि को भी नमन किया।

उन्होंने कहा कि जिस भूमि की रक्षा स्वयं देव करते हों और जो वीरों के बलिदान से पवित्र हुई हो, वहां कोई अन्याय नहीं हो सकता। उन्होंने विश्वास जताया कि गोलू देवता के आशीर्वाद से उत्तराखंड और भारत हमेशा आगे बढ़ेगा।

‘पराक्रमो विजयते’ का किया उल्लेख

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कुमाऊं रेजीमेंट के ध्येय वाक्य ‘पराक्रमो विजयते’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पराक्रम ही विजयी होता है और यह संदेश हर सैनिक को ऊर्जा देता है। उन्होंने 1962 के रेजांग ला युद्ध में 13 कुमाऊं के मेजर शैतान सिंह और जवानों के आखिरी गोली और आखिरी सांस तक लड़ने तथा एक इंच भी पीछे न हटने के पराक्रम को नमन किया।

उन्होंने कहा कि देश की मिट्टी ने ऐसे यशस्वी सैनिक पैदा किए हैं। उनके मुताबिक 1967 में घोड़ाखाल में खोले गए सैनिक स्कूल से 800 से अधिक छात्र सैनिक अफसर बनकर निकले हैं। इसी भूमि ने भारत को पहला सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी दिया। उन्होंने मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

नितिन नवीन ने कहा कि सैनिक परिवार के बीच उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने उत्तराखंड को चार धाम के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘पंचम धाम’ यानी वीर सैनिकों की भूमि की संज्ञा दिए जाने को अभिनंदन योग्य बताया।

लाल चौक और तवांग का किया जिक्र

नितिन नवीन ने वर्ष 2011 का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री थे और राष्ट्रीय एकता यात्रा के सिलसिले में कश्मीर के लाल चौक गए थे, तब वहां पाकिस्तान का झंडा फहराता देखकर उनका सिर शर्म से झुक गया था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोच में परिवर्तन आया और आज लाल चौक पर लहराता तिरंगा हर भारतवासी और सैनिक को गर्व और ऊर्जा देता है।

उन्होंने वर्ष 2012 में तवांग की ‘शहीद श्रद्धांजलि यात्रा’ के दौरान बोमला सीमा पर कच्ची सड़कों की स्थिति देखने का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक उस समय सैनिकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया था कि तत्कालीन सरकार को आशंका थी कि सड़क निर्माण से चीन 1962 की तरह दोबारा सीमाओं तक पहुंच सकता है।

नितिन नवीन ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद 2017 तक भारत की सीमाओं तक पक्की सड़कें बन गईं। उन्होंने इसे नेतृत्व की सोच में बदलाव और सैनिकों का मनोबल ऊंचा उठाने वाला कदम बताया।

‘वन रैंक वन पेंशन’ का किया उल्लेख

नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सैनिकों के बीच दिवाली और होली मनाते हैं। उन्होंने सीमांत गांवों को ‘अंतिम गांव’ के बजाय ‘प्रथम गांव’ मानने की सोच में बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 46 वर्षों से लंबित ‘वन रैंक वन पेंशन’ को 7 नवंबर 2015 को लागू किया गया।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में आत्मनिर्भरता का दावा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सैनिक परिवारों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय परमाणु शक्ति बनने या रक्षा बजट बढ़ाने में झिझक थी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को परमाणु शक्ति बनाया।

उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। उनके अनुसार देश में 1.78 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हुआ है और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा है।

उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, ‘चार धाम ऑल वेदर रोड’, दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रीय युद्ध स्मारक’ में 25,942 सैनिकों के नाम अंकित होने और देहरादून में बन रहे ‘सैन्य धाम’ का उल्लेख किया। उन्होंने 1,845 वीर शहीदों की मूर्तियां उनके गांवों में लगाने के राज्य सरकार के फैसले की भी सराहना की।

युवाओं के लिए ‘सरहद का दर्शन’ कार्यक्रम की बात

नितिन नवीन ने कहा कि सैनिक परिवार के युवाओं को सरहद की अनुभूति होती रहती है, क्योंकि वे सैनिक परिवार में जन्मे हैं। लेकिन देश के अन्य युवाओं को भी कभी-कभी सरहद पर जाकर देखना चाहिए कि सीमाओं की रक्षा करने वाला सैनिक किन परिस्थितियों में खड़ा रहता है।

उन्होंने कहा कि उनके मन में यह विचार आया कि आने वाले समय में भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ‘सरहद का दर्शन’ करने की कोई योजना बननी चाहिए, ताकि युवा केवल सीमा का दर्शन ही न करें, बल्कि सैनिकों की भावनाओं और सरहद के महत्व को भी समझें। उन्होंने कहा कि वह प्रयास करेंगे कि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में ऐसा कार्यक्रम बनाया जाए।

मुख्यमंत्री धामी बोले- सैनिक कभी पूर्व नहीं होता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं को नमन करते हुए कहा कि सैनिकों ने अपने जीवन का स्वर्णिम समय राष्ट्र की रक्षा और सेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने अपने आज की चिंता किए बिना देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया।

“सैनिक कभी पूर्व या भूतपूर्व नहीं होता, वह जीवनभर सैनिक रहता है। हमारे पूर्व सैनिक ‘भूतपूर्व’ नहीं बल्कि ‘अभूतपूर्व’ हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिक अपने अनुशासन, समर्पण, राष्ट्रभक्ति और अनुभव से समाज एवं राष्ट्र को निरंतर नई दिशा देने का कार्य करते हैं।

‘मैं स्वयं एक सैनिक के पुत्र हूं’: धामी

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वह स्वयं एक सैनिक के पुत्र हैं और इसलिए सैनिक तथा उसके परिवार के त्याग, अनुशासन और संघर्ष को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी है। विक्टोरिया क्रॉस विजेता दरबान सिंह नेगी और गबर सिंह नेगी से लेकर जनरल बी.सी. जोशी और जनरल बिपिन रावत तक उत्तराखंड की भूमि ने देश को अनेक वीर सपूत दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की रक्षा व्यवस्था और सैन्य सामर्थ्य में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है और स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ने के साथ रक्षा उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि नया भारत अपनी सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता और सामर्थ्य के साथ निर्णय लेने में सक्षम है।

पूर्व सैनिकों के लिए सरकार के फैसलों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दशकों से लंबित ‘वन रैंक-वन पेंशन’ की मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं तथा उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण को प्राथमिकता देते हुए लगातार काम कर रही हैं।

धामी ने बताया कि देहरादून के गुनियाल गांव में भव्य सैन्य धाम का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। यह सैन्य धाम उत्तराखंड के वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान का प्रतीक बनने के साथ भावी पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा।

शहीद सैनिकों के आश्रितों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। परमवीर चक्र विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त अनुदान राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये किया गया है।

उन्होंने कहा कि बलिदानी सैनिक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में सेवायोजित करने की व्यवस्था के तहत आवेदन की समय-सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। राज्य के सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी रखी बात

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और सैनिक परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सैनिकों एवं उनके आश्रितों के कल्याण, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सैनिक कल्याण से जुड़े प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, कार्यक्रम संयोजक एवं दायित्वधारी सुरेश भट्ट, ध्रुव रौतेला, पूर्व मेयर जोगेंद्र रौतेला सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, सैनिक परिवार, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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