नई दिल्ली: नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी एयरलाइंस के पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2027 तक इस अभियान को पूरा करना होगा। हाल ही में हुई गंभीर विमानन घटनाओं के बाद DGCA ने यह कदम उठाया है। डीजीसीए ने सभी विमानन कंपनियों के पायलट की मादक पदार्थ संबंधी जांच कराने के आदेश दिए हैं और कंपनियों को जुलाई 2027 तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू करने को कहा है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू का भी कहना है कि इस महीने के अंत तक नए मानदंडों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने गुरुवार को दिल्ली में एक सम्मेलन के दौरान यह बात कही है। राममोहन नायडू ने कहा कि पायलटों के साइकोएक्टिव पदार्थों के परीक्षण से संबंधित संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स के मसौदे को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा। यह हितधारकों के साथ चर्चा के बाद होगा।
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DGCA ने पिछले महीने सभी एयरलाइंस को पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण का आदेश दिया था। यह निर्णय एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड के ड्रग परीक्षण में पॉजिटिव पाए जाने के बाद लिया गया है। यह घटना 4 अगस्त 2026 को हुई थी। जिसमें कई यात्री घायल हुए थे। इसके बाद विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे। 4 सितंबर 2026 को एयर इंडिया ने पायलट की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थीं।
बता दें कि फुकेत उड़ान घटना और पायलट के ड्रग परीक्षण में पॉजिटिव पाए जाने के बाद एयर इंडिया समूह ने अगस्त 2026 में ही अपने सभी पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण करने का निर्णय लिया था। एयर इंडिया का फुकेत-दिल्ली विमान 145 लोगों को ले जा रहा था। 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते समय विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम लगभग एक साथ फेल हो गए थे। इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद एएआईबी ने विमानन नियामक DGCA को साइकोएक्टिव पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।

















