पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल: आजादी के 79 साल बाद बुजुर्ग दंपती के घर पहुंची बिजली, दशकों का काम महज कुछ दिनों में हुआ संभव

भाजपा ने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि कभी-कभी, विकास का मतलब सिर्फ आंकड़े नहीं होते। कभी-कभी, इसका मतलब होता है रोशनी जलाना और किसी को मुस्कुराने की वजह देना।

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सुनीता मिश्रा

आजादी के 80वें वर्ष में, जब देश डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में आगे बढ़ रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना से सामने आई एक तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां एक बुजुर्ग दंपती के घर में पहली बार बिजली पहुंची तो कमरे में जलते बल्ब की रोशनी देखकर दोनों की आंखें नम हो गईं। जिस बिजली को देश का अधिकांश हिस्सा रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा मान चुका है, वही रोशनी इस दंपती के लिए दशकों के लंबे इंतजार के बाद खुशियों की नई किरण बनकर आई।

विकास का मतलब सिर्फ आंकड़े नहीं होते

बीजेपी फॉर इंडिया ने बुधवार (9 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भावुक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “दशकों से, बंगाल के नामखाना में यह परिवार उस चीज का इंतजार कर रहा था, जिसे हम लोगों में से अधिकतर आम बात समझते हैं। उनके घरों में बिजली दशकों बीतने के बाद भी नहीं आई। सरकारें आईं और गईं, लेकिन अंधेरा बना रहा। फिर कुछ ही महीनों में भाजपा के अथक प्रयासों से उनके घर में रोशनी आ गई। जो काम कई दशकों तक पहले की सरकारें नहीं कर पाईं, वह कुछ ही दिनों में मुमकिन हो गया।”

पोस्ट में आगे कहा गया कि इस बुजुर्ग जोड़े के लिए यह पहली रोशनी सिर्फ बिजली नहीं थी। वह उम्मीद की रोशनी थी, सम्मान की रोशनी थी। एक ऐसे सपने के सच होने की रोशनी थी, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। कभी-कभी, विकास का मतलब सिर्फ आंकड़े नहीं होते। कभी-कभी, इसका मतलब होता है रोशनी जलाना और किसी परिवार को मुस्कुराने की वजह देना।

बल्ब जलते ही भावुक हो गए

वीडियो में देखा जा सकता है​ कि नामखाना में रहने वाले बुजुर्ग दंपती के घर में जैसे ही बल्ब जला, वे भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। यह आंसू केवल खुशी के नहीं थे, बल्कि उस लंबे इंतजार की कहानी भी कह रहे थे, जिसमें रोशनी उनके घर से दूर रही। नामखाना सुंदरबन क्षेत्र का हिस्सा है, जहां नदियों, खाड़ियों और कठिन इलाकों के कारण बुनियादी ढांचे को अंतिम छोर तक पहुंचाना आसान नहीं रहा है, लेकिन शुभेंदु सरकार के सत्ता में आते ही यह मुमकिन हो पाया।

बिजली से केवल अंधेरा दूर नहीं होता, बल्कि यह बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, मोबाइल संचार, डिजिटल सेवाओं और आजीविका से जुड़ी बुनियादी जरूरत है। सोशल मीडिया यूजर्स ने पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक रहे वामपंथी शासन और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौर में विकास की धीमी गति पर सवाल उठाया। उनका दावा है कि दशकों के शासन के बावजूद राज्य के कुछ हिस्से बुनियादी सुविधाओं के मामले में पीछे रह गए।

 

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