पंजाब

पंजाब: AAP की मुफ्तखोर योजनाओं से कर्जदार हुआ ‘स्टेट पॉवर कॉर्पोरेशन’, बिजली सब्सिडी के 7550 करोड़ का भुगतान लंबित

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की गलत नीतियों से राज्य में आर्थिक संकट पैदा होता हुआ नजर आ रहा है।

Published by
राकेश सैन

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की गलत नीतियों से राज्य में आर्थिक संकट पैदा होता हुआ नजर आ रहा है। राज्य सरकार की लोकलुभावन और मुफ़्त खोरी की नीतियों से पंजाब रोडवेज के बाद अब पंजाब स्टेट पॉवर कॉर्पोरेशन कर्जदार हो रहा है। पंजाब में उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली की सुविधा जारी है लेकिन इसकी कीमत पावरकाम की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ रही है।

पंजाब सरकार से बिजली सब्सिडी के 7550 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जबकि विभिन्न सरकारी विभागों पर बिजली बिलों के करीब 2100 करोड़ रुपये और बकाया हैं। यानी सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का कुल बकाया करीब 9650 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

कर्ज लेने को विवश कॉर्पोरेशन
नकदी संकट के बीच पावरकाम को अपने जरूरी खर्च चलाने के लिए बाजार से कर्ज लेने की तैयारी करनी पड़ रही है। 7550 करोड़ रुपये की लंबित सब्सिडी में करीब 4000 करोड़ रुपये पिछले दो वित्तीय वर्षों का बकाया ब्याज समेत है। इसके अलावा करीब 3550 करोड़ रुपये चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की सब्सिडी के हैं। सरकारी विभागों में जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़, स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर करीब 125 करोड़ रुपये के बिजली बिल लंबित हैं।

सरकारी विभाग का कनेक्शन काटना मुश्किल
आम उपभोक्ता का बिल बकाया होने पर पावरकाम कनेक्शन काट सकता है, लेकिन सरकारी विभागों और आवश्यक सेवाओं के कनेक्शनों पर ऐसी कार्रवाई व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है। इसका सीधा असर निगम के कैश फ्लो पर पड़ रहा है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच पावरकाम को बाहर से बिजली और कोयला खरीदने, मरम्मत के लिए स्पेयर पार्ट्स व अन्य सामग्री जुटाने तथा वेतन समेत नियमित खर्चों का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है।

कोयले की कमी
दूसरी तरफ इन दिनों पी इस पी सी एल कोयले की भारी कमी से जूझ रहा है। अबकी बार राज्य में 35 प्रतिशत बारिश कम होने के कारण धान के खेतों में पानी लगाने के लिए अतिरिक्त बिजली की मांग बढ़ गई है। मौसम में उमस होने से शहरी क्षेत्रों में भी बिजली की मांग रिकॉर्ड छू रही है। ऊपर से कोयले की कमी बन रही है और कई ताप घरों में कुछ दिनों का कोयला ही बचा है। पी इस पी सी एल की आर्थिक हालत राज्य में ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।

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