लंदन में डॉ. मोहन भागवत जी का बड़ा संदेश- ‘अस्तित्व की एकता’ में है दुनिया की समस्याओं का समाधान
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लंदन में डॉ. मोहन भागवत जी का बड़ा संदेश- ‘अस्तित्व की एकता’ में है दुनिया की समस्याओं का समाधान

RSS Chief Mohan Bhagwat London Visit: आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर ब्रिटेन दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने डॉ. हेडगेवार जी के विचारों और हिंदू सभ्यता की जड़ों पर रखी बात।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Sep 6, 2026, 09:55 pm IST
inभारत, विश्व, संघ @100
RSS Chief Dr Mohan Bhagwat London Visit Speech Unity of Existence Panchjanya

लंदन: हिंदू सभ्यता और सांस्कृतिक जड़ों पर आधारित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना भारत में वर्ष 1925 में हुई थी। संघ इस वर्ष अपनी शताब्दी मना रहा है। इसी क्रम में संघ की विदेशी गतिविधियों और वार्ताओं का दायरा भी बढ़ रहा है। इसी कड़ी में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 2 से 7 सितंबर 2026 तक लंदन के दौरे पर हैं।

लंदन में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ के विचार और कार्य के आधार के रूप में प्रेम, परिवार, मानवता और प्रकृति से जुड़ाव को रेखांकित किया।

‘प्रेम ही हमारे काम का आधार है’

सरसंघचालक जी ने कहा कि अगर एक ही सिद्धांत बताना हो तो वह सभी के लिए प्रेम है। उन्होंने हिंदू जीवन दृष्टि में प्रकृति के प्रति प्रेम का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू केवल प्रकृति की पूजा नहीं करते, बल्कि उससे प्रेम भी करते हैं। उनके अनुसार यही प्रेम एकता, प्रगति, चरित्र और गुणों का आधार है।

“प्रेम है। यही आधार है हमारे काम का।”

उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में भी संघ के व्यवहार और वातावरण में परिवार, मानवता, प्रकृति से जुड़ाव और सबसे महत्वपूर्ण रूप से प्रेम दिखाई देता है।

अशांत दुनिया में हिंदू सभ्यता की भूमिका

प्रश्नोत्तर सत्र में दुनिया में जारी उथल-पुथल, स्थानीय और वैश्विक संघर्षों, पारिस्थितिक एवं आर्थिक चुनौतियों तथा नए डिजिटल युग के प्रभावों के संदर्भ में पूछा गया कि ऐसे समय में हिंदू सभ्यता दुनिया के लिए क्या लेकर आती है।

इसके जवाब में सरसंघचालक जी ने ‘अस्तित्व की एकता’ को हिंदू विचार का आधार बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में विविधता दिखाई देती है, लेकिन इस विविधता के पीछे अस्तित्व की एकता को ध्यान में रखना आवश्यक है।

‘हम एक हैं, सब एक है’

सरसंघचालक जी सरसंघचालक ने कहा कि विविधता से निपटते समय यह नहीं देखना चाहिए कि सामने वाला कुछ अलग है।

उन्होंने “हम एक हैं, सब एक है” की भावना के आधार पर हर चीज से निपटने की बात कही। उनके अनुसार इस आधार पर संघर्ष प्रबंधन भी आसान हो जाता है।

“हम एक हैं, सब एक है। इस आधार पर, हम हर चीज़ से निपटते हैं। तो, संघर्ष प्रबंधन बहुत आसान है।”

उन्होंने कहा कि जब किसी विषय को दुश्मनी या प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखा जाता है, तब टकराव पैदा होता है। इसके बजाय यदि यह विचार हो कि दोनों को उनका हिस्सा मिले और एक-दूसरे को भी आगे बढ़ने में सहयोग दिया जाए, तो समाधान का रास्ता निकलता है।

प्रकृति को जीतना नहीं, उसके साथ आगे बढ़ना

सरसंघचालक जी ने कहा कि मनुष्य प्रकृति का हिस्सा है और इसलिए प्रकृति के साथ प्रगति होनी चाहिए। विकास और प्रकृति के बीच टकराव नहीं, बल्कि दोनों के बीच पूरक संबंध होना चाहिए।

उन्होंने ‘हरित समाधान’ का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे समाधान मनुष्य की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण को भी बढ़ावा देते हैं और प्रकृति के विनाश की ओर नहीं ले जाते।

“जियो और जीने दो, न केवल यह, बल्कि जियो, जीने दो और दूसरों को भी जीने दो।”

व्यक्ति, समाज और मानवता की साथ-साथ प्रगति

सरसंघचालक जी ने कहा कि केवल व्यक्तिवाद या केवल समाजवाद के बजाय व्यक्ति और समाज दोनों की प्रगति साथ-साथ हो सकती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और समाज एक-दूसरे की प्रगति में योगदान कर सकते हैं।

उन्होंने मानवता की प्रगति को भी प्रकृति की प्रगति और उसके संरक्षण के साथ जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति के नष्ट होने की कीमत पर मानव प्रगति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार दोनों साथ-साथ संभव हैं।

‘अस्तित्व की एकता’ जोड़ने वाला सिद्धांत

सरसंघचालक जी ने कहा कि व्यक्ति, समाज, मानवता और प्रकृति के बीच संबंध को जोड़ने वाला सिद्धांत अस्तित्व की एकता है। उन्होंने इसके लिए ‘ब्रह्म’ और ‘शून्य’ जैसे शब्दों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि हिंदू विचार में व्यक्ति और समाज के साथ मानवता की प्रगति तथा प्रकृति की रक्षा को साथ लेकर चलने की बात है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अर्थ और काम धर्म के अनुशासन में चलते हुए मुक्ति की ओर बढ़ते हैं।

शरीर, मन, बुद्धि और आत्मन की उन्नति

सरसंघचालक जी ने कहा कि प्रगति केवल किसी एक स्तर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शरीर, मन और बुद्धि के साथ आत्मन की उन्नति भी आवश्यक है। उन्होंने सभी की साथ-साथ प्रगति की संभावना पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यही विचार एक साथ प्रगति और संतुलन का मार्ग दिखाता है।

“व्यक्तिगत और समाज और मानवता एक साथ प्रगति करते हैं प्रकृति के साथ।”

 

Topics: Panchjanya newsDr. HedgewarRSS Centenary YearRSS news todayMohan Bhagwat London VisitUnity of Existence
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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