प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) की शताब्दी समारोह में छात्रों और अन्य लोगों से बात की। उन्होंने देश में हो रहे सकारात्मक बदलावों, खासकर अर्थव्यवस्था की अच्छी हालत पर सवाल उठाने वालों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत को फ्रेजाइल फाइव में डालने वाले देश की प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं।
GDP ग्रोथ और रेटिंग अपग्रेड पर जिक्र
मोदी ने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था में अच्छी खबरें आ रही हैं। तिमाही GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही है। जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भारत को फ्रैजाइल फाइव में डालते थे, वे यह बात पचा नहीं पा रहे हैं। मोदी ने ऐसे लोगों को परिवार के उस नाराज फूफा की तरह बताया जो हर अच्छी चीज में खोट निकालते हैं और जिनके लिए गिलास कभी भरा हुआ नहीं होता।
पुरानी नीतियों का विरोध याद दिलाया
प्रधानमंत्री ने कहा कि GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने उनकी हर नीति का विरोध किया था। जैसे जन धन योजना, जिसमें बैंक खाते खुलवाए गए, और मेक इन इंडिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्धों और भू-राजनीतिक मुश्किलों के बावजूद भारत ने अच्छी ग्रोथ हासिल की। कुछ लोगों ने इन मुश्किलों को देखकर पहले ही जश्न मनाना शुरू कर दिया था कि सरकार गिर जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सत्य और झूठ की बात
मोदी ने नाम लिए बिना मुख्य रूप से कांग्रेस की तरफ इशारा किया। उन्होंने बीजेपी के ‘झूठ की गूंज’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि ‘सत्य की हुंकार’ झूठ की गूंज पर भारी पड़ेगी। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने होम्योपैथिक दवा के रूप में यह शब्द कहा और सारे दिमागी नक्सल बाहर निकल आए। लोग उनकी असली सूरत देख रहे हैं।
युवाओं से जुड़ने की कोशिश
भाषण में मोदी ने जेन जेड से जुड़ने की कोशिश की। उन्होंने ‘OG’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया। यूपीए सरकार के समय की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन लोगों को आम और गरीब लोगों को अपने पीछे घुमाते हुए मजा आता था। दशकों तक माई-बाप संस्कृति चली। लेकिन अब मोदी उनके सामने चट्टान की तरह खड़े हैं।
2013 के भाषण का जिक्र
उन्होंने याद दिलाया कि फरवरी 2013 में भी उन्होंने SRCC में ही भाषण दिया था। वह भाषण उनकी प्रधानमंत्री पद की यात्रा की शुरुआत जैसा था। तब उन्होंने अपना विजन रखा था। अब देश सामाजिक और आर्थिक रूप से ज्यादा सुरक्षित है। भाषण में मोदी ने इन तथ्यों को साफ शब्दों में रखा और छात्रों से सीधा संवाद किया।

















