गत अगस्त को वाराणसी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (काशी मध्य भाग) की ओर से रक्षाबंधन उत्सव आयोजित किया गया। यह उत्सव सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले, काशी मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. हेमंत गुप्त, तिलक नगर के नगर संघचालक श्री प्रदीप ने भगवा ध्वज को रक्षा सूत्र बांधा। इस उत्सव के दौरान श्री दत्तात्रेय होसबाले ने उपस्थित स्वयंसेवकों एवं मातृशक्ति को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारी एकता एवं एकात्मता विश्व बंधुत्व के संरक्षण और संवर्धन का आधार है। न्यायोचित मार्ग पर चलते हुए बंधुता को आधार बनाकर स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करने के लिए भारत ने सामाजिक समरसता को अंगीकार किया है।
सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि योग वशिष्ठ के एक श्लोक के अनुसार ऐसे लोग जिनसे प्रतिदिन मिलने से निकटता बढ़ती है और वे हमारे बंधु बन जाते हैं। संघ में भी अपरिचित को परिचित एवं परिचित को मित्र बनाने की परंपरा रही है। स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व की अवधारणाओं को विश्व के अनेक देशों ने अलग-अलग रूपों में स्वीकार किया है। जबकि भारतीय संस्कृति में बंधुता को स्वतंत्रता और समानता के साथ जोड़ा गया है। इन्हीं तीनों तत्वों पर हमारी सामाजिक समरसता आधारित है।
सरकार्यवाह जी ने कहा कि हिंदू संस्कृति में संपूर्ण विश्व को एक कुटुंब माना गया है। संबंधों में दृढ़ विश्वास से रक्षाबंधन का स्नेहसूत्र भी होता है। जब हम सभी विश्व बंधुत्व की चर्चा करते हैं तो उसका मूलाधार ‘भविष्य पुराण’ का श्लोक-‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः’ है। इसके अनुसार जिस प्रकार राजा बलि को स्नेह बंधन में बांधा गया, उसी प्रकार मैं भी आपको स्नेह बंधन में बांधता हूं। यह बंधन स्थाई हो। कार्यक्रम में नेपाल में बाढ़ के कारण प्राण गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके साथ ही पीड़ितों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए प्रार्थना की गई कि उनका जीवन शीघ्र ही सामान्य हो, उनका तेजी से पुनर्वास हो।
















