
राघव चड्ढा
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में अपने नाम को ‘शिफ्टेड’ यानी स्थानांतरित के रूप में चिह्नित किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह आम आदमी पार्टी (आप) सरकार का राजनीतिक बदला है। चड्ढा 2022 में आप के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे और इस साल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उनका वोटर आईडी मोहाली, पंजाब में रजिस्टर्ड है। उन्होंने यह बात गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में कही।
चड्ढा ने लिखा कि वे पंजाब से राज्यसभा के सांसद हैं और उनका वोटर कार्ड मोहाली में है। इसके बावजूद ड्राफ्ट रोल में उनका नाम शिफ्टेड दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ ड्राफ्ट रोल हैं, फाइनल नहीं। नाम सुधारने का प्रोसेस चल रहा है। फाइनल रोल अक्टूबर 2026 में आएंगे। वे एसआईआर गाइडलाइंस के तहत अपनी शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह राजनीतिक बदले का मामला लगता है। नाम को शिफ्टेड किसने मार्क किया, किसने वेरिफाई किया और ऊपरी स्तर पर किसने प्रोसेस किया – ये सब आप की पंजाब सरकार के अधिकारी हैं।
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चड्ढा ने बताया कि वोटर लिस्ट सुधार के काम में जमीनी स्तर से लेकर ऊपर तक पंजाब सरकार के अधिकारी लगे हैं। बीएलओ आमतौर पर जूनियर कर्मचारी होते हैं। उनके ऊपर एईआरओ, ईआरओ और डीईओ भी पंजाब सरकार के अफसर हैं। सबसे ऊपर मुख्य चुनावी अधिकारी भी पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। इन अफसरों को पता है कि उनकी ट्रांसफर और पोस्टिंग आप सरकार के हाथ में है। इसलिए वे दबाव में काम कर सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आप छोड़कर भाजपा में गए दूसरे सांसदों पर भी पंजाब सरकार ने निशाना साधा है। आप छोड़ने के बाद से पार्टी की नाराजगी जारी है और पुलिस व प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल हो रहा है।
चड्ढा ने चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के गाइडलाइंस का जिक्र किया। पैराग्राफ 4(डी) में सार्वजनिक प्रतिनिधियों की एक प्रोटेक्टेड लिस्ट बनाने की बात है। इसमें जज, सांसद, विधायक आदि शामिल हैं। ऐसे नामों को ड्राफ्ट रोल में रखना चाहिए ताकि क्लेम और ऑब्जेक्शन के दौरान दस्तावेज जमा किए जा सकें। चड्ढा ने कहा कि वे बैठे हुए सांसद हैं। अगर उनका नाम फ्लैग भी हुआ होता तो भी नियमों के मुताबिक ड्राफ्ट में शामिल होना चाहिए था। उनके अनुसार यह जानबूझकर नहीं किया गया।
ये आरोप तब आए हैं जब चुनाव आयोग ने अगस्त में पंजाब का ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी किया। यह एसआईआर के दूसरे चरण का हिस्सा है। कुल 2.14 करोड़ रजिस्टर्ड वोटरों में से करीब 20.66 लाख नाम हटाए गए। यह 9.63 प्रतिशत बैठता है। हटाए गए नामों में 9,44,131 स्थायी रूप से शिफ्टेड, 5,74,568 मृतक, 4,12,715 न मिलने वाले और 1,19,145 डुप्लिकेट बताए गए।
जून 25 से अगस्त 3 तक घर-घर गणना हुई। इस दौरान 1.93 करोड़ यानी 90.37 प्रतिशत वोटरों ने फॉर्म भरे। क्लेम और ऑब्जेक्शन की प्रक्रिया 13 अगस्त से 12 सितंबर तक चल रही है। इसके बाद अक्टूबर में फाइनल रोल प्रकाशित होंगे।