देहरादून का कालसी अशोक शिलालेख: उत्तर भारत का एकमात्र 14 प्रमुख शिलालेख स्थल
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होम भारत उत्तराखंड

देहरादून का कालसी अशोक शिलालेख: उत्तर भारत का एकमात्र 14 प्रमुख शिलालेख स्थल

देहरादून जिले के हरिपुर कालसी में यमुना-टोंस संगम के पास स्थित अशोक का शिलालेख उत्तर भारत का एकमात्र स्थान है जहाँ 14 प्रमुख शिलालेख एक साथ उत्कीर्ण हैं। लगभग 250-253 ईसा पूर्व का यह ब्राह्मी-प्राकृत अभिलेख ASI द्वारा संरक्षित है।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा — edited by कुलदीप सिंह
Sep 1, 2026, 12:03 pm IST
inउत्तराखंड

देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून जिले में यमुना और टोंस नदी के संगम के पास स्थित हरिपुर कालसी का अशोक शिलालेख उत्तर भारत में सम्राट अशोक का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ उनके चौदह प्रमुख शिलालेख एक साथ उत्कीर्ण हैं।

ऐतिहासिक महत्व और खोज निर्माण

यह ऐतिहासिक शिलालेख लगभग 250 से 253 ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक के काल में एक विशाल क्वार्ट्ज चट्टान पर बनवाया गया था।

खोज

इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर को 1860 में फॉरेस्ट (जॉन फॉरेस्ट) के कर्मचारियों ने खोजा था।

संरक्षण:

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस स्थल की देखरेख करता है और 1912 में इसके ऊपर सुरक्षा के लिए एक गुंबद या छतरी का निर्माण किया गया था।

लिपि, भाषा और विशेषताएँ भाषा और लिपि

यह 10 फीट ऊंचा और 8 फीट चौड़ा शिलालेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है।

हाथी की आकृति: 

इस चट्टान के उत्तरी भाग पर एक हाथी की आकृति उकेरी गई है जिसके पास ‘गजतम’ शब्द लिखा हुआ है।

सार प्रशासन: 

इन 14 शिलालेखों में कलिंग युद्ध के बाद अशोक के हृदय परिवर्तन, अहिंसा के संदेश, प्रजा के प्रति पिता जैसे स्नेह और पशुओं की हिंसा रोकने के निर्देश शामिल हैं।

वैश्विक दृष्टि:

इसके एक शिलालेख में यूनानी (हेलेनिस्टिक) राजाओं जैसे एंटिओकोस, टॉलेमी और एंटीगोनोस का उल्लेख मिलता है, जो अशोक की दूरदर्शिता को दर्शाता है।

Topics: कालसी अशोक शिलालेखहरिपुर कालसी अशोकदेहरादून अशोक शिलालेखअशोक के 14 प्रमुख शिलालेख
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