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ईरानी IRGC की यूनिट 4000 पूर्वी एशिया में जहाजों और बंदरगाहों पर हमले की तैयारी में

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार आईआरजीसी की यूनिट 4000 तीन गैर-ईरानी लोगों को भर्ती कर पूर्वी एशिया के जलमार्गों, मलाका स्ट्रेट और चीन-इंडोनेशिया के बंदरगाहों पर हमले की योजना बना रही है। कमांडर रहमान मोगद्दम की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया जानें।

Published by
कुलदीप सिंह

खाड़ी में चल रहे संकट के बीच आईआरजीसी बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। वह इस्लामिक संगठन की खुफिया शाखा पूर्वी एशिया में जहाजों, जलमार्गों और बंदरगाहों पर हमले कराने के लिए गैर-ईरानी लोगों को भर्ती कर रही है। इसमें चीन के दो बड़े बंदरगाह भी शामिल हैं।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिट 4000 (आईआरजीसी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन का स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन) तीन लोगों को भर्ती कर चुकी है और ऑपरेशन की तैयारी चल रही है। ये भर्ती थाईलैंड और इंडोनेशिया के शिया मौलवियों के जरिए हुई। योजना में मलाका और बांग्का जलडमरूमध्य के साथ-साथ इंडोनेशिया का तांजंग प्रियोक बंदरगाह और चीन के निंगबो-झूशान तथा शंघाई बंदरगाह शामिल हैं।

कमांडर रहमान मोगद्दम का भूमिका

इस काम की निगरानी ब्रिगेडियर जनरल रहमान मोगद्दम कर रहे हैं, जो यूनिट 4000 के कमांडर हैं। मार्च 2026 में तेहरान में इजरायली हमले में उनकी मौत की खबर आई थी। इजरायली एजेंसियों ने उन्हें मारे गए वरिष्ठ अधिकारियों में गिना था। लेकिन नए सूत्रों के अनुसार, वे बच गए हैं और अब समुद्री ऑपरेशनों की नई कड़ी संभाल रहे हैं।

मोगद्दम पहले डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रोटेक्शन एंड इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन में डिप्टी कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं। करीब तीन साल पहले उन्होंने यूनिट 4000 का जिम्मा संभाला। यह यूनिट पहले भी विरोधियों और इजरायली हितों के खिलाफ विदेश में हमलों से जुड़ी रही है।

इंडोनेशियाई और चीनी जलक्षेत्र में लक्ष्य

दो सूत्रों ने कहा कि मोगद्दम पूर्वी एशियाई पानी में यूनिट के काम को बढ़ाने का नया कार्यक्रम चला रहे हैं। मलाका जलडमरूमध्य (दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट्स में से एक) और बांग्का जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक, सैन्य और निजी जहाजों को निशाना बनाने की सोच है। तांजंग प्रियोक (इंडोनेशिया का सबसे व्यस्त बंदरगाह) और चीन के बड़े बंदरगाहों पर भी योजनाएं बनी हैं।

यह ईरान के समुद्री दबाव अभियान का भौगोलिक विस्तार होगा। फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग सीमित करने की कोशिश कर रहा है। यमन में हूथी बाब अल-मंदब और लाल सागर के आसपास ट्रैफिक बाधित कर रहे हैं।

थाईलैंड और इंडोनेशिया में भर्ती के संपर्कयूनिट गैर-ईरानी भर्तियों पर जोर दे रही है ताकि पकड़े जाने पर इनकार करना आसान हो। भर्ती हुए लोगों को ईरान लाकर ट्रेनिंग दी गई और फिर पूर्वी एशिया के लिए नियुक्त किया गया।

थाईलैंड में मोगद्दम ने शिया समुदाय के प्रमुख शख्स सैयद मोमेन साकेतिचा से संपर्क किया। वे 2023 में थाई प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान गए थे और हमास से मिलकर थाई बंधकों की रिहाई की कोशिश में शामिल रहे। साकेतिचा थाई शिया मौलवी सैयद सुलेमान हुसैनी के करीबी हैं। हुसैनी अल-महदी फाउंडेशन चलाते हैं और अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं (अमेरिका ने इस यूनिवर्सिटी पर 2020 में प्रतिबंध लगाया था)।

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इंडोनेशिया पर मुख्य फोकस

ज्यादातर योजना इंडोनेशिया पर केंद्रित है। मोगद्दम ने दो इंडोनेशियाई मौलवियों के जरिए संभावित भर्तियों को खोजा। एक हैं जाहिर याह्या, अहलुलबैत इंडोनेशिया के अध्यक्ष, जिन्होंने संभावित लोगों को यूनिट से मिलाया। दूसरे हैं अब्दुल्ला सक्काफ, बोगोर में अमीर अल-मुमिनिन मदरसे के प्रमुख और अल-मुस्तफा यूनिवर्सिटी से जुड़े।

साकेतिचा, याह्या और सक्काफ ने संभावित भर्तियों को आईआरजीसी से मिलाया। भर्ती और ट्रेनिंग का जिम्मा मोहसेन अगाजादेह और वहीद येकेह-देहकान के पास था।

तीन आतंकियों की भर्तियां की

सूत्रों के अनुसार तीन लोगों को भर्ती किया गया: पांडु युधाविनाता (इंडोनेशियाई, पहले हिजबुल्लाह और ईरानी खुफिया से जुड़ा था, साथ ही 1994 के बैंकॉक साजिश और श्रीलंका हमलों से भी जुड़े बताए जाता है।), अरदियंता मुतोहा और मोहम्मद हुसैन। तीनों तेहरान गए थे और पूर्वी एशिया के बंदरगाहों तथा जलमार्गों पर गुप्त ऑपरेशन के लिए ट्रेनिंग ली।

 

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