देश के सीमांत राज्य पंजाब में पाकिस्तानी जासूसी की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, और यह जासूसी हमारे ही कैमरों से हो रही है। लुधियाना में पंजाब पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित तौर पर काम कर रहे रछपाल सिंह को गिरफ्तार किया है। लुधियाना में थाना सराभा नगर पुलिस के अनुसार आरोपी फिरोजपुर रोड स्थित किराए की दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों तक पहुंचा रहा था। पुलिस को शक है कि कैमरों के जरिए पुलिस और वीआईपी गतिविधियों समेत संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
जांच में हुआ खुलासा
सब-इंस्पेक्टर अर्शदीप सिंह को गश्त के दौरान मिले गुप्त इनपुट के आधार पर पुलिस ने न्यू सुंदर नगर में मेडीवे अस्पताल के सामने स्थित दुकान पर दबिश देकर आरोपी को पकड़ा। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि कैमरा नेटवर्क का इस्तेमाल अलग-अलग नंबरों से धमकियां दिलाने और पंजाब का माहौल बिगाड़ने के लिए किया जाना था।
साथियों की तलाश
पुलिस ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया है। अब उसके स्थानीय मददगारों और स्लीपर सेल से जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी को पाकिस्तान से कितनी रकम और किस माध्यम से मिलती थी।
दुकान के बाहर कैमरा
रिछपाल सिंह ने बद्दोवाल छावनी के पास अपनी दुकान के बाहर ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे, जिनका रुख सैन्य वाहनों के मूवमेंट वाले रास्ते की तरफ था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कैमरों का यूजर आईडी-पासवर्ड अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स को दे रखा था, जिससे वे मोबाइल एप के जरिये कैमरों की लाइव फीड देख रहे थे। दुकान के किराये के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे थे। आरोपी को अलग-अलग किश्तों में लगभग 3 लाख भी मिले थे।
जासूसी के इन मामलों का यह दौर मुख्य रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेजी से उभरा है। इसमें सामरिक ठिकानों के आसपास ऐसे कैमरे लगाए जाते हैं, जिन्हें बिजली या पारंपरिक वायरिंग की जरूरत नहीं होती।
नया प्रचलन आया सामने
देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने जासूसी का एक नया और चिंताजनक पैटर्न सामने आया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हैंडलर्स सामरिक रूप से संवेदनशील सैन्य इलाकों के बाहर इंटरनेट और सोलर चालित सीसीटीवी कैमरे लगवा रहे हैं। इनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान पहुंचाई जा रही है।
अब तक पकड़े गए केस
मार्च 2026 : एनआईए की जांच में सोनीपत और दिल्ली छावनी रेलवे स्टेशनों के पास सोलर-चालित कैमरे लगाने का खुलासा, 21 गिरफ्तार
अप्रैल 2026 : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के सैन्य क्षेत्रों के पास ऐसे 9 कैमरों का पता लगाया। इसी महीने कपूरथला और जालंधर में भी सिम-आधारित कैमरों के जरिए सैन्य गतिविधियों की लाइव फीड पाकिस्तान भेजने के सबूत मिले।
मई 2026 : पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुकान में कैमरा लगाकर सेना के मूवमेंट पर नजर रखने वाले आरोपी दबोचे गए।
जून 2026 : बठिंडा में राजमार्ग पर पुलिस और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खंभे पर लगाया गया सोलर कैमरा बरामद।
अगस्त 2026 : केंद्रीय एजेंसियों ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 14 राज्यों में चलाया अभियान, 253 लोग हिरासत में, 200 से ज्यादा गिरफ्तार, आईईडी और हथियारों के साथ बड़ी संख्या में कैमरे भी बरामद।
अश्लील साइट पर कर रहे खुफिया बातचीत
रक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के नए और खतरनाक हथकंडे का खुलासा किया है। खुफिया निगरानी से बचने के लिए आतंकी पारंपरिक सोशल मीडिया की जगह डेटिंग और चैट के नाम पर चलने वाली एडल्ट वेबसाइट्स और विशेष एनक्रिप्टड एप्स पर सीक्रेट चैट का इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी हैंडलर घाटी में सक्रिय आतंकियों और मददगारों को निर्देश भेजने के लिए इन्हीं का उपयोग कर रहे हैं।
कैमरों का सोशल ऑडिट हो
विशेषज्ञों के अनुसार इन गतिविधियों से निपटने के लिए सी सी टी वी कैमरों का सोशल ऑडिट किया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए कैमरों का पूरा रिकॉर्ड और उन पर निगरानी रखी जानी चाहिए। साधारण नागरिक को भी इन गतिविधियों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए और सामरिक गतिविध वाले स्थानों पर कैमरों पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।












