विश्लेषण

राहुल गांधी और कांग्रेस का दलित अपमान का इतिहास: आंबेडकर से लेकर खड़गे तक

कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के दलित विरोधी इतिहास को जानें। मल्लिकार्जुन खड़गे, बाबा साहेब अंबेडकर, जगजीवन राम और अन्य नेताओं के अपमान के किस्से। मोदी सरकार के दलित सम्मान के कदमों से तुलना।

Published by
अभय कुमार

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का हल्द्वानी में खड़गे के अपमान का मुद्दा केवल एक राजनीतिक मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार का दलित विरोध का इतिहास रहा हैं। कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार नवसामन्तवाद का प्रतीक है। कांग्रेस पार्टी का इतिहास दलितों के अपमान और प्रताड़ना से भरा हुआ हैं। गांधी परिवार ने कई अवसरों पर दलित पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ दलित नेताओं बाबा साहब अंबेडकर, बाबू जगजीवन और सीताराम केसरी का खुलेआम अपमान किया है।

प्रियंका गांधी वाड्रा के वायनाड में नामांकन प्रक्रिया के दौरान गांधी परिवार के सदस्यों ने मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान किया था और उनको नामांकन कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया था। पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री वरिष्ठ नेता कांग्रेस पार्टी वी नारायण स्वामी राहुल गांधी का चप्पल उठाने का वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। हरियाणा में कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेत्री कुमारी शैलजा को पार्टी ने अपने बैनर पोस्टर से उनको गायब कर दिया गया है। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के मंदिर में नीचे बैठने को लेकर मार्च 2024 में एक वीडियो वायरल हुआ था और उस पर राजनीतिक विवाद हुआ था।

बाबा साहब अंबेडकर और बाबू जगजीवन सरीखे नेताओं को छोड़ना पड़ा पार्टी

कांग्रेस पार्टी का इतिहास गवाह है कि बाबा साहब अंबेडकर और बाबू जगजीवन सरीखे नेताओं को पार्टी छोड़ना पड़ा था। बाबू जगजीवन राम को मजबूरी में कांग्रेस पार्टी छोड़ना पड़ा था और वे पहली बार इस देश ने दलित समाज का उप प्रधानमंत्री बने। बाबू जगजीवन राम भारतीय जनसंघ समर्थित सरकार में उप प्रधानमंत्री बने थे। बाबू जगजीवन राम 1971 की पकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में रक्षा मंत्री के तोर पर अहम योगदान दिया था, मगर कांग्रेस पार्टी ने सारा श्रेय इंदिरा गांधी दिया था। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी की पुस्तक ‘हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ (How Prime Ministers Decide)  में बाबू जगजीवन राम के राजनीतिक सफर और उनके प्रधानमंत्री न बन पाने के दर्द को रेखांकित किया गया है।  पुस्तक में उल्लेख है कि देश के कद्दावर दलित नेता बाबू जगजीवन राम ने बेहद कड़वाहट और निराशा के साथ कथित रूप से यह बात कही थी कि “सिर्फ कांग्रेस पार्टी की वजह से इस देश में कोई दलित कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता।”

बाबा साहब आंबेडकर को नेहरू ने चुनाव हराने की कोशिश की

बाबा साहब अंबेडकर को चुनाव हराने के लिए नेहरू और कांग्रेस पार्टी ने विशेष प्रयास किये थे। बाबा साहब अंबेडकर 1952 का लोकसभा का चुनाव बॉम्बे उत्तर सेंट्रल सीट से 14561 मतों से चुनाव हार गए थे और इस सीट पर 74333 मतों को अवैध घोषित कर दिया गया था। उनको हराने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू खुद दो बार उनके लिए प्रचार करने गए थे। उस समय आवागमन के साधन की कमी के बावजूद भी नेहरू द्वारा दो बार आंबेडकर जी के खिलाफ जाकर प्रचार करना दिखाता है कि नेहरू उनको हराने के लिए कितना आतुर थे।

पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 16 जनवरी 1952 को लेडी एडविना माउंटबेटन को लिखे गए पत्र में 1952 के पहले आम चुनावों के परिणामों, विशेष रूप से बॉम्बे और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हालात पर चर्चा की थी। नेहरू ने लिखा था कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर चुनाव हार गए हैं। पत्र में यह उल्लेख किया गया था कि समाजवादियों ने अंबेडकर की पार्टी के साथ गठबंधन किया, जिससे जनता के बीच उनकी साख प्रभावित हुई। नेहरू ने आगे यह भी टिप्पणी की थी कि डॉ. अंबेडकर ने कुछ हिंदू सांप्रदायिक/सांप्रदायिकता से जुड़े तत्वों के साथ तालमेल बिठाया है। नेहरू का यह पात्र ‘सिलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू’ (Selected Works of Jawaharlal Nehru, Second Series, Vol. 17, पृष्ठ 35-38) में प्रकाशित हुआ है।

मोदी सरकार का डॉ. भीमराव आंबेडकर को सम्मान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े प्रमुख स्थानों को ‘पंचतीर्थ’ का दर्जा दिया है। इसमें उनके जन्म स्थान मऊ (मध्य प्रदेश) को जन्मोत्सव और प्रेरणा का केंद्र बनाया गया है। उनके लंदन का घर को शिक्षा भूमि का दर्ज़ा दिया है, जहां वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई के दौरान रहे थे। नागपुर को दीक्षा भूमि का नाम दिया गया है, जहाँ उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया था। दिल्ली के अलीपुर रोड स्थित वह स्थान, जहां उनका महापरिनिर्वाण (निधन) हुआ था उसको महापरिनिर्वाण भूमि का दर्ज़ा दिया गया हैं। महाराष्ट्र के मुंबई के दादर चौपाटी के पास उनके महासमाधि स्थल को चैत्य भूमि का दर्ज़ा दिया गया है।

मोदी सरकार ने डॉ. अंबेडकर के सम्मान में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली के 15, जनपथ रोड पर स्थित सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान का स्थापना किया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 दिसंबर 2017 को किया गया था। इसका उद्देश्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, सामाजिक-आर्थिक दर्शन, जीवन संघर्ष और समावेशी विकास के सिद्धांतों पर उन्नत शोध, नीतिगत वकालत और सार्वजनिक कार्यक्रमों का एक प्रमुख मंच है।

गांधी परिवार के मंत्रियों ने खुद को ही दिया भारत रत्न

गांधी परिवार के दो-दो प्रधानमंत्री मंत्रियों ने पद पर रहते हुए खुद को भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया था। मगर बाबासाहेब अंबेडकर को भारत रत्न भाजपा समर्पित केंद्र सरकार के द्वारा दिया गया। संसद के सेंट्रल हॉल में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का तैल चित्र 12 अप्रैल 1990 को लगाया गया था, जिसका अनावरण तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किया था। इस गैर-कांग्रेसी सरकार को बाहर से भाजपा का समर्थन प्राप्त था। इससे पहले कांग्रेस सरकारों के समय सेंट्रल हॉल में जगह न होने का हवाला देकर तैल चित्र लगाने की मांग टाल दी गई थी।

फ़रवरी 2019 में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह बयान दिया था कि दलित समुदाय से होने के कारण उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनने से वंचित कर दिया गया। फरवरी 2019 में दावणगेरे में एक बैठक के दौरान जी परमेश्वर ने कहा था कि मल्लिकार्जुन खड़गे और उन्हें उनकी जाति के कारण मुख्यमंत्री पद नहीं दिया गया, क्योंकि कांग्रेस पार्टी दलितों को हमेशा सत्ता में आने से रोकने का प्रयास किया जाता रहा है। जी परमेश्वर कांग्रेस पार्टी में ही थे और कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के दौरान उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में काफी चर्चा हुई थी।

दूसरी तरफ भाजपा ने बड़े पैमाने पर दलितों का राजनितिक तौर पर सम्मान दिया है। भाजपा ने उड़ीसा में पहली सरकार में एक आदिवासी समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है। छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी समाज का व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है। भाजपा के सरकार में मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार दलित समाज का व्यक्ति उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके अलावा राजस्थान में दलित समाज का व्यक्ति उप मुख्यमंत्री भाजपा ने बनाया है। बाबा साहब अंबेडकर के बाद देश के इतिहास में पहली बार दलित समाज के अर्जुन राम मेघवाल को केंद्र में कानून मंत्री मोदी सरकार में बनाया गया।

कांग्रेस ने किया वंचितों का अपमान

बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान  बिहार कांग्रेस पार्टी के प्रदेश के दलित अध्यक्ष राजेश कुमार राम को  पटना हवाई अड्डे के बाहर दिल दहलाने वाला हिंसा का सामना करना पड़ा था। इसके अलावे पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी, हरियाणा में कुमारी शैलजा,  कर्नाटक के परमेश्वर, तेलंगाना सरकार में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क केंद्र में खड़गे का उदाहरण दर्शाता है कि किस प्रकार कांग्रेस पार्टी ने दलित समाज को केवल राजनीतिक रोटी सेकने का माध्यम बनाया है।

मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्षों में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई ठोस कदम उठाया है। सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम, 2016 के तहत पीड़ितों को मिलने वाली वित्तीय सहायता और मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी की थी। अपराध की गंभीरता और प्रकृति के आधार पर इस सहायता राशि के स्लैब को तय किया गया है, जो न्यूनतम ₹85,000 से लेकर अधिकतम ₹8,25,000 तक है। यह राशि एफआईआर (FIR) दर्ज होने, चार्जशीट दाखिल होने और अदालत का फैसला आने के अलग-अलग चरणों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

मोदी सरकार द्वारा चलाई जा रही कई प्रमुख विकास योजनाओं और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों (जैसे PM-AJAY – प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना) के माध्यम से शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के लिए केंद्रीय सहायता का बड़ा हिस्सा सीधे आवंटित किया जाता है। इसके तहत दलित बाहुल्य गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने, स्वरोजगार के लिए कम ब्याज पर ऋण देने और उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए विभिन्न सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण विभाग की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक और प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के बजट में निरंतर वृद्धि की गई है ताकि ड्रॉप-आउट दर को कम किया जा सके। मेधावी अनुसूचित जाति के छात्रों को देश के शीर्ष निजी आवासीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए श्रेष्ठा योजना जैसी नई पहल शुरू की गई हैं।

जम्मू कश्मीर में कांग्रेस पार्टी के कारण दलितों का हकमारी

कांग्रेस पार्टी के केंद्र सरकार के कार्यकाल में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A के कारण बड़े पैमाने पर दलीय हितो से हकमारी होती थी। जम्मू-कश्मीर में रह रहे दलितों और विशेषकर वाल्मीकि समाज के परिवारों को बुनियादी मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों से वंचित रहना पड़ा था। 1950 के दशक में बाहर मुख्य रूप से पंजाब से आए सफाई कर्मचारी परिवार पीढ़ियों से जम्मू-कश्मीर में रह रहे थे। अनुच्छेद 35A के कारण इन परिवारों को राज्य का ‘स्थायी निवासी प्रमाण पत्र’ नहीं मिलता था। प्रमाण पत्र न होने के कारण वे राज्य में कानूनी पहचान और अन्य बुनियादी सुविधाओं से दूर थे।

वाल्मीकि समाज के पास स्थायी निवास न होने के कारण वे केवल सफाई कर्मचारी के रूप में ही काम कर सकते थे। वाल्मीकि समाज को अन्य सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं थी। उनके बच्चे पेशेवर डिग्री या उच्च शिक्षा के लिए संस्थानों में आसानी से लाभ नहीं ले पाते थे। वाल्मीकि समाज के के बच्चे अगर उच्च डिग्री लेने में सफल भी हो जाते थे तो उन्हें सिर्फ सफाई का काम ही करने की मजबूरी थी। ये परिवार जम्मू-कश्मीर में अपने नाम पर जमीन या मकान नहीं खरीद सकते थे। देश के अन्य राज्यों की तरह दलितों पर अत्याचार रोकने वाले सख्त कानून (जैसे SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम) वहां पूरी तरह लागू नहीं होते थे।  स्थानीय स्तर पर मतदान और राजनीतिक भागीदारी के अधिकार भी प्रभावित होता था।

मोदी सरकार के कार्यकाल में अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद इन समुदायों को  निवास प्रमाण पत्र  मिलने के बाद  अब वाल्मीकि और अन्य दलित परिवारों के लोग देश के अन्य नागरिकों की तरह शिक्षा, सरकारी नौकरियों और अन्य संवैधानिक अधिकारों का स्वतंत्र रूप से लाभ उठा रहे हैं। राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की अशोक गहलोत सरकार में 18 जुलाई 2019 को राजस्थान के भिवाड़ी (अलवर जिले के पास) में हरीश जाटव पर हमले की घटना हुई थी और 15 अगस्त 2019 को उन्होंने आत्महत्या कर लिया था। गहलोत सरकार के कार्यकाल में 15 सितंबर 2021 को अलवर में योगेश जाटव पर हमले की घटना हुई थी और 18 सितंबर 2021 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई थी।

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में झालावाड़ में 1 जुलाई 2021 को कृष्णा वाल्मीकि पर हमला हुआ था और 6 जुलाई 2021 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी, जिस पर राजनीतिक दलों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप लगे थे। 1 जुलाई 2021 को झालावाड़ (झालरापाटन) में कृष्णा वाल्मीकि को बेरहमी से पीटा गया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया था और जांच के बाद इसे आपसी रंजिश का मामला बताया था। उस समय की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। राजनीतिक हलकों के अनुसार वोट बैंक की राजनीति के कारण दलितों पर होने वाले अत्याचारों में ढिलाई बरती गयी थी। कांग्रेस पार्टी के राज्य सरकारों में ऐसे अनगिनत दलित उत्पीड़न और अत्याचार की घटना जीवंत है।

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