लखनऊ में एक युवक की हत्या कर दी गई। धीरेन्द्र प्रताप सिंह शनिवार से लापता थे। उनकी पत्नी ने अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। रविवार को लखनऊ के दुबग्गा क्षेत्र में उनका शव पाया गया। धीरेन्द्र प्रताप सिंह लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी से शनिवार को गायब हुए थे। आशंका है कि भूमि विवाद की रंजिश में धीरेंद्र की हत्या की गई है। विवादित जमीन की कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
धीरेंद्र मूल रूप से उन्नाव जिले के निवासी थे और लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में इलाके में रह रहे थे। वह 29 अगस्त को सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र से अचानक गायब हो गए थे। परिजनों ने शनिवार रात करीब 1 बजे तक उनको ढूंढा। जब वह घर नहीं लौटे तो पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई।
रविवार को दुबग्गा थाना क्षेत्र में किसान पथ के पास एक नहर से उनका शव मिला। पुलिस ने बताया कि फॉर्च्यूनर गाड़ी में ही सिर और सीने पर गोली मारकर हत्या की गई। इसके बाद शव को नहर में फेंक दिया गया। शुरुआती जांच में धीरेंद्र के ड्राइवर रवि तिवारी की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। परिजनों का आरोप है कि ड्राइवर रवि ने धीरेंद्र के दुश्मनों के साथ मिलकर उनकी हत्या की है। पुलिस ने रवि और उसके अन्य साथियों समेत 6 लोगों को हिरासत में लिया है।
हिंंदूवादी नेता की नहीं हुई हत्या
इस मामले में सोशल मीडिया और मीडिया में खबरें चलने लगी कि हिन्दूवादी नेता धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या हो गई और यह खबरें देख हिन्दूवादी नेता धीरेन्द्र परेशान हो गयें। उन्होंने वीडियो जारी किया और कुछ मीडिया संस्थानों में अपना बयान भी दर्ज कराया। बताया कि जिस धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या हुई है वह उन्नाव का रहने वाला है और लखनऊ में रहकर प्रापर्टी डीलर का काम करता था। एक ही नाम और एक ही शहर होने की वजह से भ्रमवश खबरें मेरे नाम पर चली जिसको लेकर शुभचिंतकों को जवाब देते-देते थक गया हूं कि मैं जिंदा हूं।

















