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होम खेल क्रिकेट

अनाया बांगर के क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया द्वारा पात्र पाए जाने पर क्यों उपजे विरोध के स्वर ?

संजय बांगर के बेटे आर्यन अब अनया बन चुकी हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें घरेलू महिला क्रिकेट में खेलने की अनुमति दी है, जबकि आईसीसी के सख्त नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरुष प्यूबर्टी वाले खिलाड़ियों को महिला क्रिकेट से रोकते हैं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Aug 30, 2026, 01:47 pm IST
inक्रिकेट, खेल

भारत के पूर्व क्रिकेटर संजय बांगर के बेटे आर्यन बांगर जो कि अब सर्जरी के बाद अनाया बन गए हैं, उनकी क्रिकेट खेलने की मंशा को जहां क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से सकारात्मक जबाव मिला है तो वहीं अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की यह नीति चर्चा का विषय बन गई है।

अनाया बांगर महिला क्रिकेट टीम में शामिल होना चाहती हैं और उन्होंने बीसीसीआई से कई बार संपर्क भी किया है। अनाया बनने से पहले आर्यन मुंबई की अन्डर 19 टीम के लिए क्रिकेट खेल चुके थे। इससे उनकी क्रिकेट के प्रति ललक को समझा जा सकता है। उन्होंने वर्ष 2022 में लिंग परिवर्तन प्रक्रिया आरंभ की थी और साल 2026 में उन्होंने जेंडर-अफ़र्मिंग सर्जरी कराई थी।

उसके बाद उन्होंने बार-बार भारत की महिला टीम में खेलने की इच्छा जाहिर की थी, मगर बीसीसीआई के पास कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण उन्हें कोई भी स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। चूंकि यह बहस खेल जगत में बहुत तेजी से हो रही है कि क्या लिंग परिवर्तन के बाद महिला बने खिलाड़ियों को महिला टीमों में रखा जाए, तो इसमे आईसीसी के नियमों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

क्या है ट्रांस महिलाओं को लेकर आईसीसी के नियम?

हर खेल का अपना एक प्राधिकरण या निर्णय लेने वाली समिति होती है। और वही यह निर्धारित करती है कि इस खेल में क्या नियम होंगे और क्या नहीं? क्रिकेट में यह निर्णय लेने वाली काउंसिल है आईसीसी अर्थात अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद। आईसीसी के ट्रांस महिला खिलाड़ियों को लेकर नियम बहुत सख्त हैं।

आईसीसी के नियमों के अनुसार, ऐसे किसी भी खिलाड़ी को किसी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला क्रिकेट में भाग लेने का अधिकार नहीं है, जिन्होंने किसी भी रूप में पुरुष प्यूबर्टी का अनुभव किया हो। यह प्रतिबंध केवल जेंडर-अफ़र्मिंग सर्जरी पर ही नहीं, बल्कि हार्मोनल थेरेपी पर भी लागू होती है।

क्यों है यह प्रतिबंध?

यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह प्रतिबंध क्यों है? यह मानते हुए कि जैविक विकास के स्तर पर महिला और पुरुष दोनों के शारीरिक गठन एकदम अलग होते हैं, और यदि पूर्व में पुरुष रह चुके व्यक्ति को लिंग परिवर्तन के बाद महिलाओं की टीम में शामिल किया जाता है तो महिला खेल के प्रति जो सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता है, उस पर प्रश्न उठेंगे। ऐसा माना जाता है और देखा भी गया है कि ऐसे खिलाड़ियों की शारीरिक बनावट महिलाओं की शारीरिक बनावट से अधिक ताकतवर होती है, जिससे उन्हें खेल में अनुचित लाभ मिलता है।

इसके साथ ही महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा पर भी प्रश्न उठते हैं।

फिर ऑस्ट्रेलिया ने कैसे अनाया बांगर को खेलने की अनुमति दी?

अब यह प्रश्न उठता है कि आर्यन से बनी अनाया को ऑस्ट्रेलिया ने कैसे खेलने के लिए पात्र माना है? तो यह समझा जाना आवश्यक है कि आईसीसी के जो नियम हैं, वे केवल और केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर के महिला क्रिकेट पर ही लागू होते हैं, मगर यह कभी भी घरेलू क्रिकेट और लीग और कम्यूनिटी क्रिकेट पर लागू नहीं होते हैं। आईसीसी ने इन मैचों के लिए नियम बनाने का अधिकार देशों के क्रिकेट बोर्ड पर छोड़ दिया है। जैसे कि बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया जैसे बोर्ड।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीति

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की अपनी घरेलू नीति आईसीसी के नियमों से कुछ अलग है और उसमें ट्रांस महिला खिलाड़ियों के लिए प्रक्रिया सरल है। इसमें लैंगिक पहचान के आधार पर खिलाड़ियों को भागीदारी की अनुमति है। और यह लैंगिक पहचान व्यक्ति की अपनी चुनी हुई हो सकती है और इसमें सर्जरी या हार्मोन की बाध्यता भी नहीं है।

यही कारण है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में अनया खेलने जा रही हैं। हालांकि, इसमें भी कुछ नियम हैं, कि जैसे टेस्टोस्टेरोन का स्तर एक नियत दायरे में होना चाहिए। और इसे लगातार ही कई टेस्टस के माध्यम से दायरे में बनाए रखना आवश्यक होता है।

इस निर्णय के खिलाफ विरोध के स्वर

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के इस निर्णय के खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं। जहां क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने यह कहा है कि अनाया सेक्स डिस्क्रिमिनेशन एक्ट 1984′ और मानवाधिकार आयोग अनाया को इस आधार पर खेलने के लिए पात्र बनाता है कि उसका टेस्टोटेरेन का स्तर नियंत्रित रहे।

मगर वहीं विरोधियों का कहना है कि मेल प्यूबर्टी के कारण हड्डियों के ढांचे और फेफड़ों की क्षमता में जो जैविक बढ़त मिलती है, वह हार्मोन थेरेपी के बाद भी महिलाओं के समान नहीं हो सकती है और ऐसे में इन ट्रांस महिला खिलाड़ियों को लाभ होता है। इस निर्णय के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका की महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर मारिजैन कैप ने आवाज उठाई है, उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस निर्णय को एकदम बेतुका बताया है, जिसकी अनुमति नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, अनाया का कहना है कि उन्हें केवल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में खेलने के लिए पात्र माना गया है, उन्हें खेलने की अनुमति के लिए अभी प्रदर्शन करना होगा और उसके बाद ही उन्हें किसी टीम में लिया जा सकता है।

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