ईरान में एक बार फिर से सजा की चर्चा हो रही है। अभी तक जिन लोगों को फांसी जैसी सजा दी गई थी, उन पर यह आरोप लगाया गया था कि वे सड़कों पर उतरकर सरकार का विरोध कर रहे थे। मगर दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच चले इस आंदोलन के दौरान लगभग 50,000 लोगों को अभी तक हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि, ये आधिकारिक आँकड़े हैं, जिन पर यह विवाद है कि ये कम भी हो सकते हैं और असली गिरफ्तारियाँ कहीं अधिक है।
ईरान में महिलाओं को बेवजह फांसी
वहीं इन्हीं गिरफ्तार किए गए लोगों में से भी हैरान करने वाली कहानियाँ सामने आ रही हैं। ईरान में लीला अबोलहसानी नामक महिला को केवल इसलिए फांसी की सजा सुनाई गई है क्योंकि उन्होंने अपने मोबाइल फोन में उस आग को रिकार्ड कर लिया, जो आंदोलन के दौरान शाहीन बाजार में लगी थी। जब ऐसा हुआ तो वे वहाँ से गुजर रही थीं। उन्होंने बिना किसी भी राजनीतिक मंशा के उस दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया और उसी दिन ईरान के सुरक्षा बलों ने उनके घर पर छापा मारकर उन्हें हिरासत में ले लिया।
43 वर्षीय लीला, दो किशोर बच्चियों की माँ हैं। और उन्हे केवल इस अपराध के लिए कि उन्होंने सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान आग की तस्वीर ले ली थी, मुहारेबे अर्थात खुदा के खिलाफ दुश्मनी के आरोप में गिरफ्तार करके फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। nypost के अनुसार, ईरान की अदालत जो कि सुप्रीम लीडर के नियंत्रण में पूरी तरह से है, ने लीला पर स्टोर में आगजनी और उसे लूटने का आरोप लगाया। इस आरोप के सच साबित होने पर मौत तक की सजा का प्रावधान है। हाना ह्यूमेन राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन के अनुसार इस्लामिक अदालत ने यह दावा किया था कि लीला ने ही विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक सुपरमार्केट में आग लगाई थी।
लीला के घरवालों ने आरोपों को नकारा
मगर इसे लेकर लीला के घरवालों का कहना अलग है। उनका कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। लीला ने कुछ नहीं किया है। लीला तो उधर से गुजर रही थीं। वहीं लीला के मुकदमे के विषय में कोई भी जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है। लीला को उनकी गिरफ़्तारी के बाद इसफहन शहर की दौलताबाद जेल में कैद करके रखा हुआ है। मई के अंत में उन्हें इसफहन रेवलूशनेरी कोर्ट की ब्रांच 5 की जज ने मौत की सजा सुनाई थी। उन्हें फांसी पर लटकाकर मारने की सजा सुनाई गई थी।
लीला की माँ ने इस फैसले को चुनौती दी थी और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
फांसी डर फैलाने के लिए प्रयोग की जाती है
फांसी की सजा को लेकर ईरान में चर्चा हो रही है। हालांकि, अभी लीला की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, मगर उसका नतीजा क्या आएगा, यह शायद सभी को पता है। न्यूजनेशननाऊ के अनुसार ईरान के एक शरणार्थी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लीला को केवल वह दिखाने के लिए गिरफ्तार किया गया, जो उस समय सड़कों पर चल रहा था। उसने कहा कि “लीला ने जो रिकार्ड किया था, उससे दुनिया को यह दिखाया जा सकता था कि यह शासन किस सीमा तक निर्दयी है और शासन नहीं चाहता कि पूरी दुनिया उस सच को देखे जो ईरान में घटित हो रहा है। यही कारण है कि वे लोग लीला को फांसी देने की कोशिश कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उसका मामला हर उस व्यक्ति के लिए एक सबक के रूप में सामने आए जो भी ईरान के इस्लामी शासन के खिलाफ कुछ बोलना चाहता है।“ उसने कहा कि वे लोग डर का माहौल बनाना चाहते हैं कि जिससे लोग कुछ भी सच बताने से डरें।
उसने आगे कहा कि लीला और उसकी बच्चियों के साथ जो रहा है, उसे देखकर लोग डर जाएं और चुप रहें, ऐसा शासन चाहता है।
विरोध प्रदर्शन में लगभग 50000 लोग
ईरान की सरकार के खिलाफ हुए इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 50000 लोग मारे गए थे और जिनमें 250 के लगभग बच्चे भी थे और 50,000 के करीब लोगों को ही हिरासत में लिया हुआ है। जेल में महिला कैदियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण के भी मामले सामने आए थे और लगातार आ रहे हैं। फरवरी में न्यूज़नेशंस नाऊ ने रिपोर्ट किया था कि जिन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है, या फांसी दी गई है, उनके साथ उससे पहले बलात्कार भी किया गया। हालांकि, उसने खुद इस दावे की पुष्टि नहीं की थी और एक ईरानी सोर्स के ही हवाले से यह कहा था जेल में हर रोज लोगों के साथ बलात्कार किया जा रहा है। और भी अत्याचारों की कहानियाँ सुनाई थीं।
कइयों को फांसी दी गई और सैकड़ों लोग फांसी के इंतजार में
इस महीने की शुरुआत में ही यूनाइटेड नेशंस मानवाधिकार के प्रमुख वॉलकर तुर्क ने कहा था कि ईरान मार्च से लेकर अभी कुल 56 लोगों को फांसी दे दी गई है और जिनमें से 27 मामले जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार सैकड़ों लोग ऐसे हैं जो फांसी का इंतजार कर रहे हैं।

















