महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने का मुद्दा इन दिनों काफी चर्चा में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने इन चालकों को कामकाजी मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दे दिया है। इसी फैसले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे ने तीखा बयान दिया है।
अमित ठाकरे राज ठाकरे के बेटे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके ध्यान में आता है कि कोई ऑटो चालक हिंदी में बात कर रहा है या बदतमीजी से पेश आ रहा है, तो उसकी पिटाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश की भाषा या हिंदी बोलने के लिए न कहा जाए। उनका साफ कहना था कि हम मराठी में बात करेंगे।
अमित ठाकरे का पूरा बयान
अमित ठाकरे ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि हमें समझ आ गया है कि मराठी भाषा और हमारे राज्य के लिए आपके मन में कितना लगाव है। उन्होंने कहा कि गुजरात, पंजाब या दक्षिण भारत जाइए, हर जगह लोग अपनी भाषा से लगाव रखते हैं। अब उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए आप एक साल का समय विस्तार दे रहे हैं। आप पर ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी है कि हमें अपनी भाषा और अपने राज्य को ही छोड़ देना चाहिए?
सरकार का फैसला क्या था
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की थी। इन प्रतिनिधियों का नेतृत्व हाजी अरफात शेख कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चालक संगठन कामकाजी मराठी सीखने के नियम का पूरा समर्थन करते हैं और इसे सीखने के लिए तैयार हैं। लेकिन चालक अलग-अलग उम्र के हैं और कई ने सालों पहले पढ़ाई छोड़ दी थी, इसलिए कम समय में मराठी सीखना मुश्किल है।
फडणवीस ने कहा कि प्रतिनिधियों ने एक साल का समय मांगा था। राज्य सरकार ने यह मांग स्वीकार कर ली है। इस एक साल की अवधि में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि चालक खुद आगे आए हैं और मराठी सीखने के इच्छुक हैं, इसलिए समय देना जरूरी था।
नोटिस पहले जारी हो चुके थे
परिवहन विभाग शिवसेना नेता प्रताप सरनाइक के पास है। सरनाइक ने बताया था कि 20 अगस्त को राज्यव्यापी जांच के पहले दिन विभाग ने 1,268 वाणिज्यिक यात्री वाहन चालकों को मराठी का पर्याप्त ज्ञान न होने पर नोटिस जारी किए थे। मराठी परीक्षा में फेल रहने वाले चालकों को कामकाजी मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया गया था। ऐसा न करने पर उनके बैज तीन महीने के लिए निलंबित किए जाने थे।
सरकार के इस एक साल के समय विस्तार के बाद मनसे ने चेतावनी जारी कर दी है। अमित ठाकरे ने सरकार के फैसले को उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा है। यह पूरा मामला महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गया है।
















