क्या दाहिनी कलाई पर राखी बांधने का है कोई खास कारण? जानिए धर्म से लेकर शरीर विज्ञान तक पूरी कहानी
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क्या दाहिनी कलाई पर राखी बांधने का है कोई खास कारण? जानिए धर्म से लेकर शरीर विज्ञान तक पूरी कहानी

आम तौर पर भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ-साथ शरीर विज्ञान और योगशास्त्र से जुड़े कुछ रोचक संदर्भ भी बताए जाते हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Aug 24, 2026, 03:01 pm IST
inधर्म-संस्कृति

रक्षाबंधन केवल कलाई पर एक धागा बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में विश्वास, स्नेह, जिम्मेदारी और संरक्षण की भावना को मजबूत करने वाला भारतीय संस्कृति का अत्यंत भावपूर्ण त्योहार है। भाई की कलाई पर बंधी राखी बहन के प्रेम और मंगलकामना का प्रतीक मानी जाती है, तो भाई का दिया हुआ वचन उस रिश्ते की मर्यादा और जिम्मेदारी को दर्शाता है। यही कारण है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा में राखी बांधने के लिए कलाई को विशेष स्थान दिया गया है।

आम तौर पर भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ-साथ शरीर विज्ञान और योगशास्त्र से जुड़े कुछ रोचक संदर्भ भी बताए जाते हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दाहिनी कलाई के किसी विशेष नस-बिंदु को सीधे मानसिक नियंत्रण या मानसिक स्वास्थ्य का केंद्र नहीं मानता। फिर भी भारतीय परंपरा में कलाई को ऊर्जा, चेतना और संकल्प से जोड़कर देखने की एक गहरी प्रतीकात्मक परंपरा रही है।

दाहिने हाथ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

भारतीय परंपरा में दाहिने हाथ को कर्म, संकल्प और शुभ कार्यों का हाथ माना गया है। पूजा-पाठ में संकल्प लेना हो, किसी को आशीर्वाद देना हो या धार्मिक अनुष्ठान में कोई कार्य करना हो, दाहिने हाथ का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। इसी कारण रक्षासूत्र या कलावा भी प्रायः दाहिनी कलाई पर बांधा जाता है। राखी भी इसी परंपरा से जुड़ी हुई मानी जाती है। बहन जब भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है, तो वह केवल प्रेम का धागा नहीं बांधती, बल्कि एक तरह से उसके जीवन में शुभता, संयम और जिम्मेदारी की कामना करती है। भाई के लिए यह धागा बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प याद दिलाने वाला प्रतीक बन जाता है।

कलाई और शरीर विज्ञान का संबंध

शरीर विज्ञान की दृष्टि से कलाई हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। कलाई के अंगूठे की ओर रेडियल आर्टरी गुजरती है, जहां नाड़ी या पल्स को आसानी से महसूस किया जा सकता है। डॉक्टर भी सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान इसी स्थान पर नाड़ी की गति महसूस करते हैं। यहां यह अंतर समझना आवश्यक है कि नाड़ी बिंदु का शरीर में महत्वपूर्ण होना और उसका मानसिक नियंत्रण का केंद्र होना दो अलग बातें हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार रेडियल पल्स मुख्य रूप से हृदय की धड़कन और रक्त संचार की जानकारी देता है। ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इस स्थान पर राखी बांधने से सीधे तनाव, चिंता या मानसिक स्वास्थ्य नियंत्रित होता है। फिर भी राखी बांधने की प्रक्रिया का मनोवैज्ञानिक प्रभाव अवश्य हो सकता है। किसी प्रिय व्यक्ति का स्नेह, स्पर्श, शुभकामना और भावनात्मक जुड़ाव मन में सुरक्षा और अपनापन पैदा कर सकता है। यही भाव मन को शांत करने और तनाव कम करने में सहायक हो सकता है।

यह भी पढ़ें- रक्षाबंधन कब है 27 या 28 अगस्त? एक क्लिक में जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और भद्रा काल

योगशास्त्र में कलाई और ऊर्जा की अवधारणा

योग और भारतीय परंपरागत ज्ञान में मानव शरीर को केवल हड्डियों, मांसपेशियों और रक्तवाहिनियों का समूह नहीं माना गया, बल्कि इसे प्राण और ऊर्जा का एक सूक्ष्म तंत्र भी समझा गया है। योगशास्त्र में नाड़ियों का उल्लेख मिलता है, जिनके माध्यम से प्राण के प्रवाह की कल्पना की जाती है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन सूक्ष्म नाड़ियों को शरीर की नसों या धमनियों के समान नहीं मानता, लेकिन योग परंपरा में शरीर के विभिन्न अंगों और मानसिक अवस्थाओं के बीच संबंध की चर्चा लंबे समय से होती रही है। कलाई पर रक्षासूत्र बांधने को इसी व्यापक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी देखा जा सकता है। कलाई हमारे दैनिक कर्मों में लगातार सक्रिय रहती है। हम लिखने, काम करने, भोजन करने, किसी को स्पर्श करने और अनेक प्रकार के कार्यों में हाथों का उपयोग करते हैं। इसलिए कलाई पर बंधा हुआ धागा दिनभर बार-बार दिखाई देता और महसूस होता रहता है। यह व्यक्ति को उस भावना और संकल्प की याद दिला सकता है जिसके साथ वह धागा बांधा गया था।

मानसिक नियंत्रण से अधिक महत्वपूर्ण है मानसिक स्मरण

दाहिनी कलाई की नाड़ी को सीधे मानसिक नियंत्रण का केंद्र बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। लेकिन राखी को मानसिक स्मरण और भावनात्मक अनुशासन का प्रतीक जरूर माना जा सकता है। जब भाई अपनी कलाई पर बंधी राखी को देखता है, तो उसे बहन का प्रेम, परिवार की जिम्मेदारी और अपने रिश्ते की याद आती है।

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परंपरा में छिपा भावनात्मक विज्ञान

भारतीय संस्कारों की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वे जीवन के सामान्य कार्यों को भी भावनाओं और मूल्यों से जोड़ देते हैं। राखी का धागा छोटा है, लेकिन उसका अर्थ बहुत बड़ा है। बहन जब भाई की कलाई पकड़कर राखी बांधती है, तो उस क्षण में बचपन की यादें, परिवार का स्नेह और एक-दूसरे के प्रति विश्वास जैसे अनेक भाव एक साथ जुड़ जाते हैं।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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