राखी का वो इतिहास जो कम लोग जानते हैं: जब एक धागे ने पूरे बंगाल को जोड़ा
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राखी का वो इतिहास जो कम लोग जानते हैं: जब एक धागे ने पूरे बंगाल को जोड़ा

यह कहानी साल 1905 के बंगाल की है। उस समय अंग्रेज सरकार ने बंगाल के विभाजन का फैसला किया था। इस फैसले ने लोगों के बीच चिंता और विरोध की भावना पैदा कर दी थी।

Written byMahak SinghMahak Singh
Aug 23, 2026, 06:00 pm IST
inधर्म-संस्कृति

राखी का नाम सुनते ही सबसे पहले आंखों के सामने भाई की कलाई, बहन का प्यार और उस कलाई पर बंधा एक छोटा-सा धागा आता है। यह धागा देखने में भले ही बहुत साधारण हो, लेकिन इसके साथ जुड़ी भावनाएं बहुत गहरी होती हैं। आमतौर पर हम रक्षाबंधन को भाई-बहन के त्योहार के रूप में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था, जब राखी को सिर्फ भाई की कलाई तक सीमित नहीं रखा गया था? एक दौर में इस धागे को लोगों को आपस में जोड़ने और एकता का संदेश देने के लिए भी इस्तेमाल किया गया।

यह कहानी साल 1905 के बंगाल की है। उस समय अंग्रेज सरकार ने बंगाल के विभाजन का फैसला किया था। इस फैसले ने लोगों के बीच चिंता और विरोध की भावना पैदा कर दी थी। ऐसे समय में महान कवि और विचारक रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी को एकता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में देखा। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधने की अपील की, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि लोगों के बीच का रिश्ता किसी सरकारी फैसले से नहीं टूट सकता।

1905 में क्यों हुआ था बंगाल का विभाजन?

बीसवीं सदी की शुरुआत में बंगाल ब्रिटिश शासन के अधीन था। उस समय बंगाल बहुत बड़ा क्षेत्र था। अंग्रेज सरकार ने प्रशासन को आसान बनाने का कारण बताते हुए बंगाल को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया। 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल का विभाजन लागू हुआ। इसके बाद लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली। बहुत से लोगों को लगा कि इस विभाजन के पीछे केवल प्रशासनिक वजह नहीं थी, बल्कि लोगों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश भी थी। बंगाल में इस फैसले का बड़े स्तर पर विरोध हुआ। बाजारों में विदेशी सामान का बहिष्कार किया जाने लगा और लोग अपने तरीके से विरोध जताने लगे। इसी माहौल में राखी ने भी एक नया अर्थ पाया।

यह भी पढ़ें- रक्षाबंधन कब है 27 या 28 अगस्त? एक क्लिक में जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और भद्रा काल

रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी को बनाया एकता का प्रतीक

रवींद्रनाथ टैगोर सिर्फ साहित्यकार ही नहीं थे, बल्कि समाज और देश में हो रही घटनाओं को लेकर भी बेहद संवेदनशील थे। बंगाल के विभाजन से वह भी चिंतित थे। उन्होंने लोगों के बीच एकता बढ़ाने के लिए राखी को एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने का विचार रखा। उनका संदेश था कि बंगाल के लोग आपस में भाई-भाई की तरह जुड़े रहें। धर्म, जाति या किसी दूसरे अंतर के कारण उनके बीच दूरी नहीं आनी चाहिए। कहा जाता है कि 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन लागू होने के दिन लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी। यह राखी सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं थी।

रवींद्रनाथ टैगोर चाहते थे कि बंगाल के अलग-अलग समुदाय एक-दूसरे को अपना समझें। इसलिए राखी बांधने की परंपरा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि लोगों के बीच रिश्ते किसी सीमा या सरकारी आदेश से नहीं टूट सकते। एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की कलाई पर राखी बांधकर यह भाव व्यक्त कर सकता था कि हम अलग नहीं हैं, हम एक-दूसरे के साथ हैं। यही वजह है कि उस समय राखी का दृश्य बहुत भावुक था। जिन लोगों के बीच शायद पहले कोई व्यक्तिगत रिश्ता नहीं था, वे भी एक-दूसरे की कलाई पर धागा बांध रहे थे। वह धागा उन्हें एक बड़े सामाजिक रिश्ते से जोड़ रहा था।

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राखी ने दिया एकता का संदेश

राखी की ताकत हमेशा से उसके धागे में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी भावना में रही है। रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसके पीछे सुरक्षा, प्रेम और विश्वास की भावना होती है। बंगाल विभाजन का विरोध लगातार बढ़ता गया। लोगों के आंदोलन और विरोध के बीच ब्रिटिश सरकार ने 1911 में बंगाल के विभाजन को रद्द कर दिया।

Topics: Rabindranath TagorePartition of BengalHistory of RakhiRakshabandhan DatePartition of Bengal 1905Partition of Bengal and RakhiOpposition to Partition of Bengal
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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