इंडोनेशिया के प्रसिद्ध पर्यटन द्वीप बाली में पवित्र हिंदू पर्व ‘न्येपी’ यानी डे ऑफ साइलेंस का कथित रूप से अपमान करने के मामले में एक 26 वर्षीय स्विस पर्यटक को एक साल जेल की सजा सुनाई गई है। डेनपसार की अदालत ने उसे सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने और बाली की धार्मिक परंपराओं के खिलाफ टिप्पणी करने का दोषी माना।
न्येपी के नियम तोड़ना पड़ा भारी
न्येपी बाली के हिंदू समुदाय का एक बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक दिवस है। इस दिन पूरे द्वीप पर शांति और आत्मचिंतन का वातावरण रहता है। लोग घरों में रहते हैं और काम, मनोरंजन तथा कई तरह की बाहरी गतिविधियों से दूरी बनाए रखते हैं। इस दौरान सड़कें और समुद्र तट लगभग सुनसान दिखाई देते हैं। यहां तक कि बाली का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी निर्धारित अवधि के लिए बंद रहता है। अदालत में बताया गया कि पर्यटक को होटल कर्मचारियों ने न्येपी के नियमों के बारे में पहले ही जानकारी दी थी। इसके बावजूद उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह नियमों को तोड़ने की बात करता दिखाई दिया। उसने समुद्र तट पर जाने का दावा किया और न्येपी की परंपरा के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद मार्च में पर्यटक को गिरफ्तार कर लिया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अदालत से माफी मांगते हुए कहा कि उसे नियमों की गंभीरता पूरी तरह समझ नहीं आई थी। उसने बताया कि पवित्र दिन पर खाना नहीं मिलने के कारण वह भूखा और परेशान था और इसी स्थिति में उसने वीडियो पोस्ट किया। उसने बाली के लोगों की भावनाएं आहत करने पर खेद भी जताया। जज जोकोर्डा पुत्रा बुडी पास्टिमा ने कहा कि आरोपी के व्यवहार से स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और समाज में नाराजगी पैदा हुई। इसलिए उसे अपने कृत्य की जिम्मेदारी लेनी होगी। आरोपी पहले ही लगभग पांच महीने जेल में प्री-ट्रायल हिरासत में बिता चुका है, जिसे उसकी सजा में समायोजित किया जाएगा। स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि वे आरोपी को आवश्यक कांसुलर सहायता प्रदान कर रहे हैं।
















